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Gonda News: कत्ल के 20 दिन बाद रूस से आया कामगार का शव
Sat, 22 Jun 2024 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 22 Jun 2024 11:15 PM IST
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मोहम्मद अली हुसैन। फाइल फोटो
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गोंडा। रूस में हत्या के 20 दिन बाद शनिवार को युवक का शव घर पहुंचा। शव देखते ही परिजन बिलखने लगे। परिजनों के मुताबिक गोंडा के रहने वाले युवक की दो जून को रूस में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री की पहल पर रूस से शव को गांव लाया गया। यहां उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
वजीरगंज के ग्राम चड़ौवा दर्जीपुरवा निवासी मोहम्मद हुसैन ने बताया कि छह दिसंबर 2023 को उनका बेटा मोहम्मद अली हुसैन (28) मजदूरी के लिए रूस गया था। वजीरगंज के ग्राम विरहमतपुर निवासी रबीउल्ला ने तीन वर्षीय वीजा पर अली हुसैन को रूस भेजा था। अली हुसैन रूस में एलएलसी बुलावा क्षेत्रीय रोस्तोवास्काया माइंस कंपनी में कपड़े की सिलाई करता था। पिता का आरोप है कि कंपनी ने नौ घंटे काम के लिए बुलाया था, लेकिन वहां 16 घंटे काम कराया जाता था। विरोध करने पर कंपनी के लोग अली हुसैन को पीटते व प्रताड़ित करते थे। भर पेट खाना तक नहीं दिया जाता था। जब बेटे ने वापस घर आने की जिद की तो दो जून की रात तीन बजे कंपनी वालों ने गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।
पीड़ित पिता के अनुसार कंपनी में कार्यरत अन्य कर्मचारियों ने चार जून को घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद एजेंट रबीउल्ला से संपर्क करके बेटे का शव मंगवाने के लिए कहा गया मगर उसने मना कर दिया। इसके बाद प्रधान सहदेव मिश्र के माध्यम से 11 जून को केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। साथ ही बेटे का शव मंगवाने की गुहार लगाई। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर शव पहुंचा। वहां से एंबुलेंस से शनिवार सुबह आठ बजे शव चड़ौवा गांव पहुंचा। जहां से पैतृक गांव रामापुर ले जाकर कब्रिस्तान में अली हुसैन को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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घटना से पहले पांच मई को कंपनी में कार्यरत दर्जनों वर्करों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए सामूहिक रूप से पत्र लिखकर भारतीय दूतावास को भेजा था। वर्करों ने बताया था कि यहां पर जान का खतरा है। ऐसे में सभी भारतीय वर्करों को अतिशीघ्र स्वदेश बुला लिया जाए। इसी क्रम में बुलावा कंपनी को भी वर्करों ने पत्र भेजकर अवगत कराया था कि उन पर रसियन लोगों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।
मृतक मोहम्मद अली हुसैन (28) आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई सद्दाम हुसैन (30), बहन मोमिना (26), भाई नबी हुसैन (23), भाई गुलाम हुसैन (19), बहन साहिना (17), रुबीना (15), सकीना (12) हैं। भाई-बहन व मां मयसरा व पिता मोहम्मद हुसैन रो-रोकर बेहाल हैं। मृतक के पिता के पास पांच बीघा जमीन है। उसी में खेती करके वह पूरे परिवार का गुजारा करते हैं।
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वजीरगंज के ग्राम चड़ौवा दर्जीपुरवा निवासी मोहम्मद हुसैन ने बताया कि छह दिसंबर 2023 को उनका बेटा मोहम्मद अली हुसैन (28) मजदूरी के लिए रूस गया था। वजीरगंज के ग्राम विरहमतपुर निवासी रबीउल्ला ने तीन वर्षीय वीजा पर अली हुसैन को रूस भेजा था। अली हुसैन रूस में एलएलसी बुलावा क्षेत्रीय रोस्तोवास्काया माइंस कंपनी में कपड़े की सिलाई करता था। पिता का आरोप है कि कंपनी ने नौ घंटे काम के लिए बुलाया था, लेकिन वहां 16 घंटे काम कराया जाता था। विरोध करने पर कंपनी के लोग अली हुसैन को पीटते व प्रताड़ित करते थे। भर पेट खाना तक नहीं दिया जाता था। जब बेटे ने वापस घर आने की जिद की तो दो जून की रात तीन बजे कंपनी वालों ने गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।
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पीड़ित पिता के अनुसार कंपनी में कार्यरत अन्य कर्मचारियों ने चार जून को घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद एजेंट रबीउल्ला से संपर्क करके बेटे का शव मंगवाने के लिए कहा गया मगर उसने मना कर दिया। इसके बाद प्रधान सहदेव मिश्र के माध्यम से 11 जून को केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। साथ ही बेटे का शव मंगवाने की गुहार लगाई। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर शव पहुंचा। वहां से एंबुलेंस से शनिवार सुबह आठ बजे शव चड़ौवा गांव पहुंचा। जहां से पैतृक गांव रामापुर ले जाकर कब्रिस्तान में अली हुसैन को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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घटना से पहले पांच मई को कंपनी में कार्यरत दर्जनों वर्करों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए सामूहिक रूप से पत्र लिखकर भारतीय दूतावास को भेजा था। वर्करों ने बताया था कि यहां पर जान का खतरा है। ऐसे में सभी भारतीय वर्करों को अतिशीघ्र स्वदेश बुला लिया जाए। इसी क्रम में बुलावा कंपनी को भी वर्करों ने पत्र भेजकर अवगत कराया था कि उन पर रसियन लोगों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।
मृतक मोहम्मद अली हुसैन (28) आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई सद्दाम हुसैन (30), बहन मोमिना (26), भाई नबी हुसैन (23), भाई गुलाम हुसैन (19), बहन साहिना (17), रुबीना (15), सकीना (12) हैं। भाई-बहन व मां मयसरा व पिता मोहम्मद हुसैन रो-रोकर बेहाल हैं। मृतक के पिता के पास पांच बीघा जमीन है। उसी में खेती करके वह पूरे परिवार का गुजारा करते हैं।