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वकीलों के हड़ताल से रजिस्ट्री आफिस में सन्नाटा, 2.13 करोड़ राजस्व घटा
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गोंडा में वकीलों के हड़ताल के चलते उप निबंधक कार्यालय में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। ग्राम न्यायालय की स्थापना के विरोध में बीते 20 दिनों से चल रही वकीलों की हड़ताल के कारण सरकार को करीब सवा दो करोड़ की चपत लगी है। यह घाटा केवल निबंधन कार्यालय में होने वाले काम काज का है।
अन्य विभागों के नुकसान को जोड़ने पर यह नुकसान और ज्यादा हो सकता है। वकीलों के कार्य बहिष्कार के चलते सितंबर माह में निबंधन कार्यालय लक्ष्य का मात्र 69 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा कर पाया है। बीते साल इसी माह लक्ष्य से अधिक 110 फीसदी राजस्व आय दर्ज हुई थी। वकीलों की हड़ताल के चलते अब तक सवा दो करोड़ के राजस्व का नुकसान हो चुका है।
ग्राम न्यायालय स्थापना के विरोध में चल रहे वकीलों के आंदोलन का सीधा असर रजिस्ट्री से लेकर स्टांप ब्रिकी पर दिख रहा है। जिस निबंधन कार्यालय में पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, दिनभर लोगों की भीड़ लगी रहती थी, वहां बीते बीस दिनों से सन्नाटा पसरा है।
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बीते साल सितंबर माह में निबंधन कार्यालय को 477 लाख की राजस्व आय का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष निबंधन कार्यालय ने 526.30 लाख का राजस्व जुटाया था। इस वर्ष भी 510 लाख लक्ष्य के सापेक्ष करीब 566 लाख कमाई की संभावना थी लेकिन वकीलों केे आंदोलन के चलते रजिस्ट्री से सरकार की आमदनी सिर्फ 352.67 लाख की ही हो सकी है।
वकीलों के आंदोलन के पहले सामान्य दिनों अप्रैल से अगस्त महीने तक स्टांप शुल्क से 14 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ हैं वहीं निबंधन शुल्क से 2 करोड़ 72 लाख रुपये की कमाई हुई थी लेकिन वकीलों के आंदोलन के चलते निबंधन कार्यालय में काम काज ठप होने से सितंबर माह में सिर्फ 3 करोड़ 52 लाख की ही कमाई हो सकी। वर्ष 2021 में निबंधन कार्यालय को वार्षिक लक्ष्य 20 करोड़ 24 लाख निर्धारित की गई है। इसके सापेक्ष अभी तक सिर्फ 30 प्रतिशत राजस्व ही प्राप्त हुआ है।
सितंबर माह में वकीलों के हड़ताल के कारण राजस्व प्राप्ति में कमी आई है। गत वर्ष सितंबर माह में लक्ष्य के सापेक्ष 110 प्रतिशत हुई थी। इस वर्ष भी सितंबर माह में 115 प्रतिशत की कमाई होती लेकिन सिर्फ 69 प्रतिशत ही हो सकी। अक्टूबर में यदि हड़ताल खत्म हो गयी तो लक्ष्य के 130 प्रतिशत राजस्व की संभावना है।
सुधा यादव, उप निबंधक सदर तहसील
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अन्य विभागों के नुकसान को जोड़ने पर यह नुकसान और ज्यादा हो सकता है। वकीलों के कार्य बहिष्कार के चलते सितंबर माह में निबंधन कार्यालय लक्ष्य का मात्र 69 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा कर पाया है। बीते साल इसी माह लक्ष्य से अधिक 110 फीसदी राजस्व आय दर्ज हुई थी। वकीलों की हड़ताल के चलते अब तक सवा दो करोड़ के राजस्व का नुकसान हो चुका है।
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ग्राम न्यायालय स्थापना के विरोध में चल रहे वकीलों के आंदोलन का सीधा असर रजिस्ट्री से लेकर स्टांप ब्रिकी पर दिख रहा है। जिस निबंधन कार्यालय में पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, दिनभर लोगों की भीड़ लगी रहती थी, वहां बीते बीस दिनों से सन्नाटा पसरा है।
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बीते साल सितंबर माह में निबंधन कार्यालय को 477 लाख की राजस्व आय का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष निबंधन कार्यालय ने 526.30 लाख का राजस्व जुटाया था। इस वर्ष भी 510 लाख लक्ष्य के सापेक्ष करीब 566 लाख कमाई की संभावना थी लेकिन वकीलों केे आंदोलन के चलते रजिस्ट्री से सरकार की आमदनी सिर्फ 352.67 लाख की ही हो सकी है।
वकीलों के आंदोलन के पहले सामान्य दिनों अप्रैल से अगस्त महीने तक स्टांप शुल्क से 14 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ हैं वहीं निबंधन शुल्क से 2 करोड़ 72 लाख रुपये की कमाई हुई थी लेकिन वकीलों के आंदोलन के चलते निबंधन कार्यालय में काम काज ठप होने से सितंबर माह में सिर्फ 3 करोड़ 52 लाख की ही कमाई हो सकी। वर्ष 2021 में निबंधन कार्यालय को वार्षिक लक्ष्य 20 करोड़ 24 लाख निर्धारित की गई है। इसके सापेक्ष अभी तक सिर्फ 30 प्रतिशत राजस्व ही प्राप्त हुआ है।
सितंबर माह में वकीलों के हड़ताल के कारण राजस्व प्राप्ति में कमी आई है। गत वर्ष सितंबर माह में लक्ष्य के सापेक्ष 110 प्रतिशत हुई थी। इस वर्ष भी सितंबर माह में 115 प्रतिशत की कमाई होती लेकिन सिर्फ 69 प्रतिशत ही हो सकी। अक्टूबर में यदि हड़ताल खत्म हो गयी तो लक्ष्य के 130 प्रतिशत राजस्व की संभावना है।
सुधा यादव, उप निबंधक सदर तहसील