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दर्द से तड़पती महिला को अस्पताल से किया बाहर
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Thu, 15 Oct 2015 10:02 PM IST
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कहते है कि मरीजों के लिए डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते है लेकिन बुधवार को मुजेहना सीएचसी गेट के बाहर डॉक्टर का जो निष्ठुर चेहरा देखने को मिला उसे देख हर किसी की रूह कांप उठी है। गुरुवार को एक घंटे तक सीएचसी के गेट पर एक महिला दर्द से तड़पती रही।
लेकिन सीएचसी के डॉक्टरों ने न तो महिला को हायर सेंटर रेफर किए जाने के लिए वाहन मुहैया कराया न ही उसका इलाज। उसे अस्पताल से जरूर बाहर कर दिया। महिला को गेट पर तड़पता देख जब लोगों से नहीं रहा गया तो उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। जिसके बाद सीएचसी से बाहर निकले डॉक्टर ने महिला को अस्पताल में भर्ती करने के बजाए यह कहकर बाहर कर दिया कि इसे किसी बड़े अस्पताल लेकर जाओ। इस दरम्यान करीब एक घंटे तक महिला दर्द से कराहती रही।
धानेपुर थाना क्षेत्र के गोंसाईपुरवा गांव निवासी राजकुमार वर्मा गुरुवार की दोपहर दो बजे अपनी पत्नी विमला (35) को सीएचसी मुजेहना लेकर आए थे। राजकुमार के मुताबिक उनकी पत्नी को तेज बुखार व पेट में दर्द हो रहा था। इस पर उन्होंने सीएचसी में कार्यरत प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विवेक मिश्र को दिखाया। जिन्होंने उससे बाजार से तीन इंजेक्शन और कुछ दवाएं लेकर आने कहा।
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राजकुमार के मुताबिक डॉक्टर ने एक इंजेक्शन उसकी पत्नी को लगाया और कहा कि जो दवा वह लाया है, उसे वह चाय के साथ पत्नी को पिला दे। इसके लिए वह जैसे ही चाय लेकर वापस आया कि देखा उसकी पत्नी को तेज झटके आ रहे थे। यह बात उसने जब डॉक्टर को बताई तो उन्होंने तत्काल उसे किसी बड़े अस्पताल लेकर जाने को कहा और उसकी पत्नी को अस्पताल से बाहर कर दिया।
जिसके बाद वह डॉक्टर से एक घंटे तक पत्नी को जिला अस्पताल ले जाने के लिए वाहन मुहैया कराए जाने की मन्नतें करता रहा। लेकिन उसकी एक न सुनी गई। जबकि उसकी पत्नी सीएचसी के बाहर पड़ी दर्द से कराहती रही। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और उस भीड़ ने हंगामा काटना शुरू कर दिया।
जिससे नाराज डॉक्टर सीएचसी से बाहर तो आए लेकिन बजाय अपना फर्ज निभाने के यह कहते हुए राजकुमार को ही खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी कि वह अपनी पत्नी को अगर बचाना चाहता है तो किसी बड़े अस्पताल लेकर जाए। यहां गेट पर हंगामा करने से कुछ नहीं मिलेगा। जिसके बाद लोगों ने डॉक्टर को मरीज के लिए भगवान का दूसरा रूप होने की याद दिलाई तो डॉक्टर सिर छिपाकर वहां से निकल लिए।
हालांकि बाद में आसपास जमा हुए लोगों ने जैसे-तैसे एक प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की। जिससे महिला को मुख्यालय लाकर एडमिट कराया गया।
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लेकिन सीएचसी के डॉक्टरों ने न तो महिला को हायर सेंटर रेफर किए जाने के लिए वाहन मुहैया कराया न ही उसका इलाज। उसे अस्पताल से जरूर बाहर कर दिया। महिला को गेट पर तड़पता देख जब लोगों से नहीं रहा गया तो उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। जिसके बाद सीएचसी से बाहर निकले डॉक्टर ने महिला को अस्पताल में भर्ती करने के बजाए यह कहकर बाहर कर दिया कि इसे किसी बड़े अस्पताल लेकर जाओ। इस दरम्यान करीब एक घंटे तक महिला दर्द से कराहती रही।
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धानेपुर थाना क्षेत्र के गोंसाईपुरवा गांव निवासी राजकुमार वर्मा गुरुवार की दोपहर दो बजे अपनी पत्नी विमला (35) को सीएचसी मुजेहना लेकर आए थे। राजकुमार के मुताबिक उनकी पत्नी को तेज बुखार व पेट में दर्द हो रहा था। इस पर उन्होंने सीएचसी में कार्यरत प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विवेक मिश्र को दिखाया। जिन्होंने उससे बाजार से तीन इंजेक्शन और कुछ दवाएं लेकर आने कहा।
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राजकुमार के मुताबिक डॉक्टर ने एक इंजेक्शन उसकी पत्नी को लगाया और कहा कि जो दवा वह लाया है, उसे वह चाय के साथ पत्नी को पिला दे। इसके लिए वह जैसे ही चाय लेकर वापस आया कि देखा उसकी पत्नी को तेज झटके आ रहे थे। यह बात उसने जब डॉक्टर को बताई तो उन्होंने तत्काल उसे किसी बड़े अस्पताल लेकर जाने को कहा और उसकी पत्नी को अस्पताल से बाहर कर दिया।
जिसके बाद वह डॉक्टर से एक घंटे तक पत्नी को जिला अस्पताल ले जाने के लिए वाहन मुहैया कराए जाने की मन्नतें करता रहा। लेकिन उसकी एक न सुनी गई। जबकि उसकी पत्नी सीएचसी के बाहर पड़ी दर्द से कराहती रही। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और उस भीड़ ने हंगामा काटना शुरू कर दिया।
जिससे नाराज डॉक्टर सीएचसी से बाहर तो आए लेकिन बजाय अपना फर्ज निभाने के यह कहते हुए राजकुमार को ही खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी कि वह अपनी पत्नी को अगर बचाना चाहता है तो किसी बड़े अस्पताल लेकर जाए। यहां गेट पर हंगामा करने से कुछ नहीं मिलेगा। जिसके बाद लोगों ने डॉक्टर को मरीज के लिए भगवान का दूसरा रूप होने की याद दिलाई तो डॉक्टर सिर छिपाकर वहां से निकल लिए।
हालांकि बाद में आसपास जमा हुए लोगों ने जैसे-तैसे एक प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की। जिससे महिला को मुख्यालय लाकर एडमिट कराया गया।