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महिलाओं ने की पूजा-अर्चना
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2015 11:33 PM IST
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डाला छठ व्रत के चौथे दिन महिलाओं व पुरुषों ने सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपने पुत्र व पति की लंबी आयु, धन, सुख व संपन्नता की कामना की। मंगलवार को बिहार प्रांत का सबसे बड़ा त्योहार शहर के खैरा मंदिर कुंड, पीएसी लाइन, स्वामी नारायन छपिया कुंड पर मनाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
डाला छठ पूजन के लिए श्रद्धालु नंगे पैर सिर पर डाला रखकर कुंड पर पहुंचे। निर्जला व्रत के साथ महिलाओं ने डाला में सीताफल, नीबू, अदरक, हल्दी, चीकू, सेब, संतरा, अनार, केला, शरीफा व गन्ने को रखकर पोखरे के पानी में प्रवेश कर पूजा का शुभारंभ किया।
नव विवाहित महिलाओं ने पति, पुत्र को धन धान्य से परिपूर्ण रखने व असुर शक्तियों की छाया से परिवारीजनों को बचाने की कामना की।
निर्जला व्रत रखने रखने वाली महिलाओं का मानना है कि नदी व पोखरे के पानी में खड़े होकर सूर्य अस्त के समय दूध का अर्घ्य देने से रात की आसुरी शक्तियों का विनाश होता है।
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अस्ताचल सूर्य के अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने अपने घर के आंगन में गन्ने की फसल का झुंड लगाया। इसमें दीपक रख सारी रात छठ माता की आराधना की।
छठ व्रत रखने वाली महिलाएं दूसरे दिन बुधवार की सुबह चार बजे से ही पोखरा पर आकर अपने-अपने छठ माता की पिंडी पर दीपक जलाकर पोखरे में जाकर पूजन-अर्चन शुरू करेंगी।
सुबह सूर्य उदय होने पर महिलाएं सूर्य का पूजन अर्चन करेंगी और भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेेंगी। घाट पर पूजन समाप्त करने के बाद महिलाएं अपने पति व अन्य बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेंगी और पूजन का प्रसाद खाकर 48 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत को तोड़ेंगी।
मंगलवार की सायं शहर के खैरा भवानी कुंड पर गाजे-बाजे के साथ छठ पूजन का शुभारंभ हुआ। छठ व्रत रहने वाली महिलाओं के परिजन गाजे-बाजे के साथ छठ व सूर्यदेव की आराधना में जुटे रहे।
खैरा मंदिर के महंत कैलाशनाथ गिरी ने छठ पर्व पर खैरा मैदान में जागरण का आयोजन किया है। इसमें दिल्ली के कलाकार छठी मइया पर भजन प्रस्तुत करेंगे।
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डाला छठ पूजन के लिए श्रद्धालु नंगे पैर सिर पर डाला रखकर कुंड पर पहुंचे। निर्जला व्रत के साथ महिलाओं ने डाला में सीताफल, नीबू, अदरक, हल्दी, चीकू, सेब, संतरा, अनार, केला, शरीफा व गन्ने को रखकर पोखरे के पानी में प्रवेश कर पूजा का शुभारंभ किया।
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नव विवाहित महिलाओं ने पति, पुत्र को धन धान्य से परिपूर्ण रखने व असुर शक्तियों की छाया से परिवारीजनों को बचाने की कामना की।
निर्जला व्रत रखने रखने वाली महिलाओं का मानना है कि नदी व पोखरे के पानी में खड़े होकर सूर्य अस्त के समय दूध का अर्घ्य देने से रात की आसुरी शक्तियों का विनाश होता है।
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अस्ताचल सूर्य के अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने अपने घर के आंगन में गन्ने की फसल का झुंड लगाया। इसमें दीपक रख सारी रात छठ माता की आराधना की।
छठ व्रत रखने वाली महिलाएं दूसरे दिन बुधवार की सुबह चार बजे से ही पोखरा पर आकर अपने-अपने छठ माता की पिंडी पर दीपक जलाकर पोखरे में जाकर पूजन-अर्चन शुरू करेंगी।
सुबह सूर्य उदय होने पर महिलाएं सूर्य का पूजन अर्चन करेंगी और भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेेंगी। घाट पर पूजन समाप्त करने के बाद महिलाएं अपने पति व अन्य बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेंगी और पूजन का प्रसाद खाकर 48 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत को तोड़ेंगी।
मंगलवार की सायं शहर के खैरा भवानी कुंड पर गाजे-बाजे के साथ छठ पूजन का शुभारंभ हुआ। छठ व्रत रहने वाली महिलाओं के परिजन गाजे-बाजे के साथ छठ व सूर्यदेव की आराधना में जुटे रहे।
खैरा मंदिर के महंत कैलाशनाथ गिरी ने छठ पर्व पर खैरा मैदान में जागरण का आयोजन किया है। इसमें दिल्ली के कलाकार छठी मइया पर भजन प्रस्तुत करेंगे।