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एंबुलेंस के इंतजार में तड़पती रही महिला
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2015 11:31 PM IST
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सीएचसी करनैलगंज परिसर में गुरुवार देर शाम एक बीमार महिला तड़पती रही। सीएचसी के चिकित्सक ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर एंबुलेंस खड़ी होने के बाद भी चालक ने महिला को ले जाने से इन्कार कर दिया। बाद में तीमारदारों ने महिला को निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया।
करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र के करुआ गांव निवासी राज बहादुर की पत्नी बविता एनीमिया से ग्रसित थी। राजबहादुर उसे गुरुवार देर शाम सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां डॉ. पीएन राय ने उसका इलाज तो किया, मगर हालात गंभीर होने के कारण उन्होंने बबिता को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।
राजबहादुर ने बताया कि वह पत्नी को बाहर ले आया और 108 एंबुलेंस के लिए फोन करके मरीज की स्थिति बताते हुए एंबुलेंस की मांग की। राज बहादुर ने बताया कि उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा गया। करीब 30 मिनट के बाद जब उन्होंने फिर फोन किया तो उन्हें इंतजार करने की नसीहत दे दी गई।
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इतने में उसकी हालात और बिगड़ गई। सूचना पाते ही चिकित्सक राय पहुंचे और उसका पुन: इलाज करने लगे। राजबहादुर ने बताया कि उन्होंने 102 नंबर पर फोन मिलाया और सारी कहानी सुनाई। जिस पर उन्हें यह कह कर कोरा जवाब दे दिया गया कि 108 नंबर पर मिलाइये, यह केस 102 नंबर वाहन से संबंधित नहीं है।
महिला को करीब एक घंटे तक वाहन के इंतजार में रोकना पड़ा। जबकि सीएचसी परिसर में 102 नंबर के तीन वाहन बिना किसी काम के खड़े थे। एक घंटे बाद भी जब एंबुलेंस नही मिल पाई तो परिवारीजन प्राइवेट वाहन से उसे गोंडा ले गए।
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करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र के करुआ गांव निवासी राज बहादुर की पत्नी बविता एनीमिया से ग्रसित थी। राजबहादुर उसे गुरुवार देर शाम सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां डॉ. पीएन राय ने उसका इलाज तो किया, मगर हालात गंभीर होने के कारण उन्होंने बबिता को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।
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राजबहादुर ने बताया कि वह पत्नी को बाहर ले आया और 108 एंबुलेंस के लिए फोन करके मरीज की स्थिति बताते हुए एंबुलेंस की मांग की। राज बहादुर ने बताया कि उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा गया। करीब 30 मिनट के बाद जब उन्होंने फिर फोन किया तो उन्हें इंतजार करने की नसीहत दे दी गई।
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इतने में उसकी हालात और बिगड़ गई। सूचना पाते ही चिकित्सक राय पहुंचे और उसका पुन: इलाज करने लगे। राजबहादुर ने बताया कि उन्होंने 102 नंबर पर फोन मिलाया और सारी कहानी सुनाई। जिस पर उन्हें यह कह कर कोरा जवाब दे दिया गया कि 108 नंबर पर मिलाइये, यह केस 102 नंबर वाहन से संबंधित नहीं है।
महिला को करीब एक घंटे तक वाहन के इंतजार में रोकना पड़ा। जबकि सीएचसी परिसर में 102 नंबर के तीन वाहन बिना किसी काम के खड़े थे। एक घंटे बाद भी जब एंबुलेंस नही मिल पाई तो परिवारीजन प्राइवेट वाहन से उसे गोंडा ले गए।