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प्रवासियों की मजबूरी से कमाई कर रहे हैं वाहन मालिक

Sun, 18 Apr 2021 09:04 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Apr 2021 09:04 PM IST
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Vehicle owners are taking advantage of the helplessness of migrants
गोंडा। एक तरफ कोरोना की महामारी से दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूर बेहाल हो रहे हैं। तो मजदूरों की बेबसी का फायदा उठाकर निजी वाहन स्वामी मालामाल हो रहे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, पंजाब में फंसे गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती जिलों के श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए प्रतिदिन 93 निजी बसें व अन्य छोटे वाहन गोंडा जिले में आ रहे हैं। मजदूरों को घर वापसी के नाम पर कोरोना की दहशत का फायदा निजी वाहनों के मालिकाना जमकर उठा रहे हैं।
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महाराष्ट्र से गोंडा तक किराया 3 हजार से 5 हजार रुपये प्रति व्यक्ति की वसूली की जा रही है। इसके लिए यूपी की निजी बसें लगी हुई हैं। महाराष्ट्र व दिल्ली के मजदूरों को लाने के लिए यूपी के बॉर्डर से लोडिंग वाहन के साथ टैक्सी के ट्रांसपोर्टरों ने यूपी के मजदूरों का घर वापसी के नाम पर दहशत का फायदा उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
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अकेले गोंडा जिले की सीमा में लगभग छोटे-बड़े दो हजार से अधिक वाहन यूपी की सीमा से मजदूरों को लेकर आ रहे हैं। प्रत्येक वाहन में प्रति सवारी तीन हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
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गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर जिलों में आने वाले वाहनों की जिम्मेदारी वहां के ट्रांसपोर्टरों पर थी और ट्रांसपोर्टरों द्वारा मजदूरों से पैसा जमा कराने के बाद उन्हें वाहनों में ठूसकर बैठने के लिए विवश किया जा रहा है। उसके बाद उनके घरों को वापस भेजा जा रहा था।
यात्रियों की माने तो छोटे वाहनों पर जिसमें कम यात्री आते थे जिसमें ऑटो, पिकअप, डीसीएम पर यात्रा करने वाले यात्रियों से 2 हजार ढाई रुपये तक की वसूली की जा रही है। जबकि ट्रकों पर खचाखच भर कर यात्रा करने पर 2 हजार से लेकर ढाई हजार रुपये तक किराया वसूला जा रहा है।
यात्रियों में शमशेर, मुजाहिद, मुनव्वर, सेवक लाल, शिवचरण, गुड्डू, लल्ला, रामफेर, मनोहर लाल, मनिलाल, लल्लू प्रसाद, कन्हैया लाल, नकुल, परसादी, ललई, रज्जब अली, मोहम्मद मुख्तार, फखरुद्दीन, शाकिर अली आदि का कहना है कि महाराष्ट्र से गोंडा और मनकापुर, उतरौला, बलरामपुर के 76 लोगों को डबल डेकर बस पर बैठाया गया। जिनसे 22 सौ रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से किराया वसूल किया गया।
इसी तरह जितने भी वाहन महाराष्ट्र यूपी बॉर्डर तक आए हैं सभी वाहनों पर अच्छी खासी कीमत ट्रांसपोर्टरों द्वारा वसूली गई। मजे की बात तो यह है श्रमिकों का कहना है कि महाराष्ट्र में प्रत्येक जिले के श्रमिकों को वहां की पुलिस द्वारा अपने घरों को वापस जाने के लिए लगातार प्रेरित किया जाता रहा। सप्ताह में एक दिन भोजन की व्यवस्था कराई जाती थी।

बाकी दिनों के लिए भोजन मांगने पर स्पष्ट मना कर दिया जाता था। जबकि बाहर से आए हुए लोगों को भोजन न देकर महाराष्ट्र के लोगों को भोजन प्रतिदिन सरकारी कर्मचारी उपलब्ध कराते थे। हफ्ते में एक दिन भोजन पाकर जिंदा रह पाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए मजबूरी में ट्रांसपोर्टरों की शरण लेनी पड़ी और एक साथ वहां से श्रमिक वापस आने को विवश हो गए।
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