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मिलावटखोरी से मिठाई बाजार सुस्त
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2015 12:14 AM IST
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मिठाइयों का बाजार अब पहले जैसा जोरदार नहीं रहा। मिलावटखोरी ने मिठाई बाजार को बेजार कर दिया है। मिठाइयों में हानिकारक रंगों व मिलावटी खोवा के इस्तेमाल किये जाने से सेहत खराब होने के डर से अब लोग मिठाई के दूसरे विकल्पों पर जोर दे रहे हैं।
हर साल दिवाली में लोगों को मिठाई खाने खिलाने का चलन रहा है, लेकिन बदले दौर में अब लोगों का विश्वास मिठाइयों की मिलावटखोरी से कम होता जा रहा है।
ऐसे में हाई सोसायटी का तबका या फिर पढ़े लिखे समाज के लोग, मिठाइयों की खरीदारी में काफी फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं। इसका असर मिठाई के कारोबार पर भी पड़ रहा है।
एक दौर था जब लोग साधारण मिठाइयों को ही काफी पसंद करते थे। चीनी, मैदा, खोवा आदि से बनी मिठाइयों का दूर-दूर तक बखान होता था। लेकिन अब साधारण मिठाइयों ंकी डिमांड कम हो गई है।
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अब लोग न सिर्फ शुद्ध मिठाइयों चाह रहे हैं, बल्कि उसमें कुछ पौष्टिकता भी चाह रहे हैं। ऐसे में अब दुकानदार भी साधारण मिठाइयों की जगह ऐसी मिक्स मिठाइयां बनाने पर जोर दे रहे हैं, जो न सिर्फ टेस्टी हो और वह सेहत के हर लिहाज से बेहतर हो।
मिठाई का कारोबार करने वाले दुकानदारों का कहना है कि अब तो चमक-दमक का दौर हैं। लोग अच्छी मिठाइयों की पहचान कम करते हैं। मिठाई दुकानदार सीताराम का कहना है कि वह अपनी दुकान पर दूध मंगा कर खोवा बनाते थे । काफी साफ सफाई से मिठाई बनाते थे।
मिठाई की शुद्धता जरूरी है, क्योंकि मिठाई को न सिर्फ खाया जाता है बल्कि पूजा चढ़ावा भी इस्तेमाल होता है। अब तो बड़े-बड़े दुकानों का दौर है। इस बात का कोई क्या ख्याल रखेगा।
मिठाई दुकानदार शिव शंकर कहते हैं कि अब तो कानपुर का मिलावटी खोवा से बनी मिठाइयों लोगों को खिलाई जा रही है। लोग आज के चकाचौंध में देशी मिठाइयों की कद्र ही भूलते जा रहे हैं।
मिठाई लेते समय बरतें सावधानी
* मिठाई जान पहचान वाले से ही लें तो बेहतर है।
* दुकान की चमक-दमक में न जाएं, यह पता कर लें कि उसके यहां का प्रोडक्ट कैसा है।
* मिठाई लेते समय उसे थोड़ा सा खाकर व सूंघ कर देख लें कि वह पुरानी तो नही है। या फिर उसमें किसी सिंथेटिक रंगों की मिलावट तो नहीं है।
मिठाई के रेट (रुपये प्रति किलो)
लड्डू (मोदक) 200-350
लड्डू बेसन 200-400
लड्डू गोंद 400-600
कालाजाम 350-400
सफेद छेना 350-400
छेना रसगुल्ला 300-350
बत्तीसा 350-450
बर्फी 300-325
काजू बर्फी 600-900
राजभोग 400-500
कलाकंद 400-500
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हर साल दिवाली में लोगों को मिठाई खाने खिलाने का चलन रहा है, लेकिन बदले दौर में अब लोगों का विश्वास मिठाइयों की मिलावटखोरी से कम होता जा रहा है।
ऐसे में हाई सोसायटी का तबका या फिर पढ़े लिखे समाज के लोग, मिठाइयों की खरीदारी में काफी फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं। इसका असर मिठाई के कारोबार पर भी पड़ रहा है।
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एक दौर था जब लोग साधारण मिठाइयों को ही काफी पसंद करते थे। चीनी, मैदा, खोवा आदि से बनी मिठाइयों का दूर-दूर तक बखान होता था। लेकिन अब साधारण मिठाइयों ंकी डिमांड कम हो गई है।
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अब लोग न सिर्फ शुद्ध मिठाइयों चाह रहे हैं, बल्कि उसमें कुछ पौष्टिकता भी चाह रहे हैं। ऐसे में अब दुकानदार भी साधारण मिठाइयों की जगह ऐसी मिक्स मिठाइयां बनाने पर जोर दे रहे हैं, जो न सिर्फ टेस्टी हो और वह सेहत के हर लिहाज से बेहतर हो।
मिठाई का कारोबार करने वाले दुकानदारों का कहना है कि अब तो चमक-दमक का दौर हैं। लोग अच्छी मिठाइयों की पहचान कम करते हैं। मिठाई दुकानदार सीताराम का कहना है कि वह अपनी दुकान पर दूध मंगा कर खोवा बनाते थे । काफी साफ सफाई से मिठाई बनाते थे।
मिठाई की शुद्धता जरूरी है, क्योंकि मिठाई को न सिर्फ खाया जाता है बल्कि पूजा चढ़ावा भी इस्तेमाल होता है। अब तो बड़े-बड़े दुकानों का दौर है। इस बात का कोई क्या ख्याल रखेगा।
मिठाई दुकानदार शिव शंकर कहते हैं कि अब तो कानपुर का मिलावटी खोवा से बनी मिठाइयों लोगों को खिलाई जा रही है। लोग आज के चकाचौंध में देशी मिठाइयों की कद्र ही भूलते जा रहे हैं।
मिठाई लेते समय बरतें सावधानी
* मिठाई जान पहचान वाले से ही लें तो बेहतर है।
* दुकान की चमक-दमक में न जाएं, यह पता कर लें कि उसके यहां का प्रोडक्ट कैसा है।
* मिठाई लेते समय उसे थोड़ा सा खाकर व सूंघ कर देख लें कि वह पुरानी तो नही है। या फिर उसमें किसी सिंथेटिक रंगों की मिलावट तो नहीं है।
मिठाई के रेट (रुपये प्रति किलो)
लड्डू (मोदक) 200-350
लड्डू बेसन 200-400
लड्डू गोंद 400-600
कालाजाम 350-400
सफेद छेना 350-400
छेना रसगुल्ला 300-350
बत्तीसा 350-450
बर्फी 300-325
काजू बर्फी 600-900
राजभोग 400-500
कलाकंद 400-500