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दुकानदार नहीं ले रहे दस का सिक्का
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 16 Oct 2016 10:51 PM IST
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दस का सिक्का
- फोटो : अमर उजाला
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दस रुपये के असली सिक्के अभी तक बाजार में चलन में रहे हैं। इसी बीच दस का नकली सिक्का भी बाजार में चलने लगा। अब नकली व असली भेद निकालने की झंझट की जगह दुकानदारों ने सिक्के लेने ही बंद कर दिए। यही नहीं यह भी अफवाह फैला दी गई कि दस रुपये का सिक्का रिजर्व बैंक ने बंद कर दिया है, जिससे सिक्के की बाजार खत्म होती गई। सामान खरीदने के बाद अगर कोई ग्राहक दस रुपये का सिक्का दुकानदार को देता है तो इसे लेकर चिक चिक हो जाती है।
15 दिन पहले दस रुपये का सिक्का लेने से दुकानदार, व्यापारी व नौकरी पेशा व्यक्ति इन्कार नहीं करता था, लेकिन 15 दिनों के अंदर दस रुपये के सिक्के को लेकर अफवाहें बढ़ती गईं। अब तो हालात ये हैं कि कोई भी दस रुपये का सिक्का लेने को तैयार नहीं है।
शहर के एलबीएस चौराहे के समीप चाय की दुकान चलाने वाले सियाराम ने बताया कि अभी तक लोग दस का सिक्का ले रहे थे। चाय के बदले में उसे दे रहे थे। मगर अब ग्राहकों को वह दस रुपये का सिक्का वापस करता है तो सब मना कर देते हैं। इसलिए उसने भी सिक्का लेने से इनकार कर दिया।
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बैंक ऑफ इंडिया के सामने समोसे की दुकान चलाने वाले रिंकू यादव ने बताया कि दस का सिक्का बंद होने से उसके पास थैली भर सिक्के रखे रह गए। कल पेट्रोल भराने गया था तो पंप वाले ने भी दस का सिक्का लेने से मना कर दिया। शहर के सुभाषनगर में मिठाई की दुकान चलाने वाले अरुण टंडन ने बताया कि अफवाह के चलते ग्राहकों ने दस के सिक्के लेने बंद कर दिए। अब वह अपने पास रखे दस के सिक्के को बैंक में ले जाकर जमा करेंगे।
इनसेट
असली व नकली में यह है फर्क
दस रुपये के असली सिक्के पर ऊपर रू. बना हुआ है। इसके नीचे संख्या में दस लिखा है। दस रुपये के असली सिक्के में जहां रुपये लिखा है, उसके ऊपर दस लकीरें खिंची रहती हैं जबकि नकली सिक्का इससे बिल्कुल अलग है। दस रुपये के नकली सिक्के में सिक्के के बीच में संख्या में दस तथा उसके नीचे रुपये हिंदी में तथा अंग्रेजी में रूपीज लिखा हुआ है। खास बात यह है कि सबसे ऊपर 16 लकीरे बनी हुई हैं।
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15 दिन पहले दस रुपये का सिक्का लेने से दुकानदार, व्यापारी व नौकरी पेशा व्यक्ति इन्कार नहीं करता था, लेकिन 15 दिनों के अंदर दस रुपये के सिक्के को लेकर अफवाहें बढ़ती गईं। अब तो हालात ये हैं कि कोई भी दस रुपये का सिक्का लेने को तैयार नहीं है।
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शहर के एलबीएस चौराहे के समीप चाय की दुकान चलाने वाले सियाराम ने बताया कि अभी तक लोग दस का सिक्का ले रहे थे। चाय के बदले में उसे दे रहे थे। मगर अब ग्राहकों को वह दस रुपये का सिक्का वापस करता है तो सब मना कर देते हैं। इसलिए उसने भी सिक्का लेने से इनकार कर दिया।
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बैंक ऑफ इंडिया के सामने समोसे की दुकान चलाने वाले रिंकू यादव ने बताया कि दस का सिक्का बंद होने से उसके पास थैली भर सिक्के रखे रह गए। कल पेट्रोल भराने गया था तो पंप वाले ने भी दस का सिक्का लेने से मना कर दिया। शहर के सुभाषनगर में मिठाई की दुकान चलाने वाले अरुण टंडन ने बताया कि अफवाह के चलते ग्राहकों ने दस के सिक्के लेने बंद कर दिए। अब वह अपने पास रखे दस के सिक्के को बैंक में ले जाकर जमा करेंगे।
इनसेट
असली व नकली में यह है फर्क
दस रुपये के असली सिक्के पर ऊपर रू. बना हुआ है। इसके नीचे संख्या में दस लिखा है। दस रुपये के असली सिक्के में जहां रुपये लिखा है, उसके ऊपर दस लकीरें खिंची रहती हैं जबकि नकली सिक्का इससे बिल्कुल अलग है। दस रुपये के नकली सिक्के में सिक्के के बीच में संख्या में दस तथा उसके नीचे रुपये हिंदी में तथा अंग्रेजी में रूपीज लिखा हुआ है। खास बात यह है कि सबसे ऊपर 16 लकीरे बनी हुई हैं।