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Gonda News: कटान में तेजी से नदी में समा रहीं खेतों में खड़ी फसलें
Tue, 25 Aug 2026 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:58 PM IST
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गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। मंगलवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 105.980 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से नौ सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में कमी से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन नदी के किनारे कटान तेज हो गया है। कई स्थानों पर नदी खेतों की ओर कटान कर रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 106.000 मीटर था। यह खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर नीचे था। सोमवार रात भी जलस्तर 106.000 मीटर पर बना रहा। मंगलवार सुबह आठ बजे इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और जलस्तर 105.980 मीटर पहुंच गया। इस दौरान नदी में कुल 2,23,165 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
जलस्तर घटने के बावजूद बेहटा, पारा, परसावल, मांझा रायपुर और बहुवन मदार मांझा के सामने नदी लंबे समय से कटान कर रही है। कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह खेतों के किनारे की मिट्टी नदी में समा रही है। किसानों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटान के कारण उनकी फसल और जमीन को नुकसान होता है। किसानों का कहना है कि नदी की कटान से खेतों का रकबा कम होने लगा है।
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सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि सरयू का जलस्तर मामूली रूप से घटा है। फिलहाल नदी खतरे के निशान से नौ सेंटीमीटर नीचे है। बैराजों से छोड़े जा रहे पानी में भी कमी आई है। इससे फिलहाल नदी का जलस्तर बढ़ने के संकेत नहीं हैं। हालांकि नदी के किनारे रहने वाले लोगों को कटान को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
वहीं, नवाबगंज इलाके में जलस्तर घटने के कारण थोड़ी राहत तो मिली है। मगर समस्या कम नहीं हुई है। बाड़ी माझा के फूलचंद यादव ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से फसलें सड़ रही हैं। बाढ़ पीड़ितों को अब तक कोई मुआवजा या राहत किट नहीं मिली है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 106.000 मीटर था। यह खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर नीचे था। सोमवार रात भी जलस्तर 106.000 मीटर पर बना रहा। मंगलवार सुबह आठ बजे इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और जलस्तर 105.980 मीटर पहुंच गया। इस दौरान नदी में कुल 2,23,165 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
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जलस्तर घटने के बावजूद बेहटा, पारा, परसावल, मांझा रायपुर और बहुवन मदार मांझा के सामने नदी लंबे समय से कटान कर रही है। कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह खेतों के किनारे की मिट्टी नदी में समा रही है। किसानों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटान के कारण उनकी फसल और जमीन को नुकसान होता है। किसानों का कहना है कि नदी की कटान से खेतों का रकबा कम होने लगा है।
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सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि सरयू का जलस्तर मामूली रूप से घटा है। फिलहाल नदी खतरे के निशान से नौ सेंटीमीटर नीचे है। बैराजों से छोड़े जा रहे पानी में भी कमी आई है। इससे फिलहाल नदी का जलस्तर बढ़ने के संकेत नहीं हैं। हालांकि नदी के किनारे रहने वाले लोगों को कटान को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
वहीं, नवाबगंज इलाके में जलस्तर घटने के कारण थोड़ी राहत तो मिली है। मगर समस्या कम नहीं हुई है। बाड़ी माझा के फूलचंद यादव ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से फसलें सड़ रही हैं। बाढ़ पीड़ितों को अब तक कोई मुआवजा या राहत किट नहीं मिली है।

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद