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लोक अदालत में निपटेंगे हर तरह के वाद

Sat, 05 Dec 2015 11:59 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 05 Dec 2015 11:59 PM IST
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अगर आप वर्षों से किसी विवाद के निपटारे के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर काट रहे हैं व आपको इंसाफ नहीं मिल रहा है तो 12 दिसंबर का दिन आपको न्याय दिलाने के लिए काफी है। इस दिन न्याय विभाग के तमाम अफसर आपके केस की सुनवाई के लिए दीवानी न्यायालय में मौजूद रहकर न सिर्फ आपको इंसाफ दिलाएंगे बल्कि एक बार जो केस यहां से निस्तारित हो जाएगा, उसकी अपील की कोई गुंजाइश भी नहीं रखेंगे।
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प्रभारी जनपद न्यायाधीश रामानंद की उपस्थिति में 12 दिसंबर को इस लोक अदालत में बिजली चोरी अधिनियम 135 से लेकर दीवानी, फौजदारी, राजस्व-चकबंदी, गुजारा भत्ता, नकल विरोधी अध्यादेश, बैंक विवाद, वैवाहिक व मोटर दुर्घटना प्रतिकर व उत्तराधिकार प्रमाणपत्र से संबंधित हजारों की संख्या में वादों का निस्तारण किया जाएगा।
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इसके लिए न्याय विभाग की ओर से लगातार जिलास्तरीय अधिकारियों से लेकर बैंक समेत अन्य विभागों के अफसरों के साथ बैठकों का दौर भी जारी है।

राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि 12 दिसंबर को प्रभारी जिला जज की मौजूदगी में न्याय विभाग के सारे अफसर एक छत के नीचे उपस्थित रहकर वर्षों से न्याय की आस में एड़ियां रगड़ रहे फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण करेंगे।
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उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर कानूनी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 12 दिसंबर को लोक अदालत का आयोजन सालसा (उप्र स्टेट लीगल सर्विसेज अथारिटी) के तहत किया जा रहा है।

इसमें निपटने वाले वादों की कोर्ट फीस बाद में वापस कर दी जाएगी। इस अदालत में हर तरह के वाद का निस्तारण आपसी सामंजस्य से किया जाएगा ताकि वर्षों से न्याय के इंतजार में भटक रहे फरियादियों को त्वरित न्याय मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में जिन वादों का निस्तारण हो जाएगा। उसके बाद इन वादों की न तो कहीं कोई अपील होगी, न ही सुनवाई। लोक अदालत में निपटने वाले वाद हरेक अदालत में स्वीकार किए जाएंगे।


वादकारियों को 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के पहले अपने-अपने न्यायालयों में प्रार्थना पत्र प्रकरण की सुनवाई लोक अदालत में किए जाने के लिए देना होगा। ताकि 12 दिसंबर को सुनवाई वाले दिन उनके प्रकरण की फाइल पहले से ही मंगवाकर उसका निस्तारण आसानी से सुलह-समझौते के जरिए किया जा सके।

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