{"_id":"570be78a4f1c1b02474a6b7c","slug":"the-procession-was-welcomed","type":"story","status":"publish","title_hn":"शोभायात्रा का हुआ स्वागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोभायात्रा का हुआ स्वागत
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:36 PM IST
विज्ञापन
शोभायात्रा में शामिल संत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत-नेपाल मैत्री के प्रतीक पीर रतननाथ की शोभायात्रा का सोमवार को शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में भव्य स्वागत किया गया। मंदिर के महंत मिथलेश नाथ योगी ने विधि-विधान के साथ पीर रतननाथ के पात्र देवता को मंदिर में स्थापित किया।
मालूम हो कि पीर रतननाथ मां पाटेश्वरी के परम भक्त थे। ऐसी मान्यता है कि नेपाल के दांग नरेश राजा रतनसेन ने सिद्धि प्राप्ति के लिए गुरु गोरक्षनाथ के आदेशानुसार देवीपाटन में तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर मां पाटेश्वरी ने उन्हें दर्शन दिया। देवी ने उन्हें वरदान दिया कि शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा की जाएगी।
देवी का वरदान मिलने के बाद राजा रतनसेन को ही योगी रतननाथ के रूप में मान्यता मिली। तभी से नवरात्र द्वितीया के दिन दांग जिले से रतननाथ की शोभायात्रा रवाना होती है।
विज्ञापन
पंचमी के दिन देवीपाटन पहुंचती है। नवरात्र पंचमी तिथि को ही पीर रतननाथ के प्रतीक स्वरुप पात्र देवता को मंदिर में स्थित दलीचे पर स्थापित किया जाता है। उसी दिन से नवरात्र की समाप्ति तक मंदिर के प्रधान पुजारियों द्वारा देवी के साथ-साथ पीर रतननाथ की पूजा भी पूजा-अर्चना की जाती है।
सोमवार को नवरात्र पंचमी के दिन भोर पहर में ही तुलसीपुर नगर सीमा पर स्थित नकटी नाला के निकट उदासीन आश्रम बड़ा अखाड़ा पर स्थानीय लोगों द्वारा पीर रतननाथ की शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शोभायात्रा नगर के पुरानी बाजार एवं अन्य पारंपरिक मार्गो से होती हुई देवीपाटन मंदिर पहुंची। सम्मय माता मंदिर के पास महंत मिथलेश नाथ योगी ने यात्रा का स्वागत एवं पूजन किया। हजारों श्रद्धालुओं ने भी पीर रतननाथ के पात्र देवता की पूजा-अर्चना की।
पीर रतननाथ की शोभायात्रा के साथ नेपाल से 40 महिला श्रद्धालुओं का जत्था भी सोमवार को देवीपाटन पहुंचा। नेपाली महिलाओं ने मंदिर में नृत्य एवं संगीत का अद्भुत नजारा पेश करते हुए विधि-विधान के साथ मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना की। नेपाली महिला श्रद्धालुओं के जत्थे का नगर एवं मंदिर में पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।
विज्ञापन
मालूम हो कि पीर रतननाथ मां पाटेश्वरी के परम भक्त थे। ऐसी मान्यता है कि नेपाल के दांग नरेश राजा रतनसेन ने सिद्धि प्राप्ति के लिए गुरु गोरक्षनाथ के आदेशानुसार देवीपाटन में तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर मां पाटेश्वरी ने उन्हें दर्शन दिया। देवी ने उन्हें वरदान दिया कि शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा की जाएगी।
विज्ञापन
देवी का वरदान मिलने के बाद राजा रतनसेन को ही योगी रतननाथ के रूप में मान्यता मिली। तभी से नवरात्र द्वितीया के दिन दांग जिले से रतननाथ की शोभायात्रा रवाना होती है।
विज्ञापन
पंचमी के दिन देवीपाटन पहुंचती है। नवरात्र पंचमी तिथि को ही पीर रतननाथ के प्रतीक स्वरुप पात्र देवता को मंदिर में स्थित दलीचे पर स्थापित किया जाता है। उसी दिन से नवरात्र की समाप्ति तक मंदिर के प्रधान पुजारियों द्वारा देवी के साथ-साथ पीर रतननाथ की पूजा भी पूजा-अर्चना की जाती है।
सोमवार को नवरात्र पंचमी के दिन भोर पहर में ही तुलसीपुर नगर सीमा पर स्थित नकटी नाला के निकट उदासीन आश्रम बड़ा अखाड़ा पर स्थानीय लोगों द्वारा पीर रतननाथ की शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शोभायात्रा नगर के पुरानी बाजार एवं अन्य पारंपरिक मार्गो से होती हुई देवीपाटन मंदिर पहुंची। सम्मय माता मंदिर के पास महंत मिथलेश नाथ योगी ने यात्रा का स्वागत एवं पूजन किया। हजारों श्रद्धालुओं ने भी पीर रतननाथ के पात्र देवता की पूजा-अर्चना की।
पीर रतननाथ की शोभायात्रा के साथ नेपाल से 40 महिला श्रद्धालुओं का जत्था भी सोमवार को देवीपाटन पहुंचा। नेपाली महिलाओं ने मंदिर में नृत्य एवं संगीत का अद्भुत नजारा पेश करते हुए विधि-विधान के साथ मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना की। नेपाली महिला श्रद्धालुओं के जत्थे का नगर एवं मंदिर में पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।