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Gonda News: दुधमुंही बेटी को गले लगाकर रोया पति... पत्नी ने पोंछे आंसू

Sun, 23 Feb 2025 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 23 Feb 2025 11:16 PM IST
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The husband cried while hugging his infant daughter... the wife wiped her tears
 पुलिस लाइन में दंपतियों से बात करतीं सीओ ​शिल्पा वर्मा, साथ में थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह। - संव
गोंडा। रिजर्व पुलिस लाइन में शनिवार को आयोजित परिवार परामर्श केंद्र में सुनवाई के दौरान मां के साथ रह रही डेढ़ वर्षीय मासूम बेटी को गले लगाकर पिता फफक पड़ा। बेटी भी पिता को निहारती रही। इसके बाद परामर्श केंद्र का माहौल शांत हो गया। पत्नी ने पति के आंसू पोछे। दोनों साथ रहने के लिए राजी हो गए। परामर्शदाताओं ने पति-पत्नी के साथ ही मायके वालों व ससुरालियों से बातचीत की। इसके बाद परामर्श केंद्र से ही विवाहिता को ससुराल भेज दिया गया। इस तरह से 49 मामलों की सुनवाई की गई।
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छपिया थाना क्षेत्र के रहने वाले दंपती की करीब 10 साल पहले शादी हुई थी। पत्नी ने परामर्शदाताओं को बताया कि दोनों साथ रह रहे थे। फोन पर बात करने से नाराज होकर पति ने दुधमुंही बच्ची के साथ घर से निकाल दिया था। बीते 20 जनवरी को विवाहिता ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी की सुनवाई शुरू हुई। केंद्र से पति को नोटिस जारी किया गया तो वह चेन्नई से पहुंचा। शनिवार को सुनवाई शुरू हुई तो पहले दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लगा दी। पति ने बताया कि वह चेन्नई में रहकर मजदूरी करता है। पत्नी अपने मायके वालों की बात ही सुनती है। पति ने कहा, आखिर दो-दो घंटे तक किससे बात करती हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद परामर्शदाताओं ने इच्छा पूछी तो दुधमुंही बेटी को देखकर पति फफक पड़ा। बेटी को गले से लगा लिया। पति को बिलखते देखकर पत्नी के आंसू छलक उठे। पति के आंसू पोंछने के बाद दोनों एकसाथ रहने के लिए राजी हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति पर परिवार परामर्श केंद्र से ही विदाई कर दी गई। इस दौरान परामर्शदाता गंगाधर शुक्ल, संतोष ओझा, यशोदानंदन त्रिपाठी, अनीता श्रीवास्तव, राजमंगल मौर्य, सीओ शिल्पा वर्मा, थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह, आरक्षी शाइना और ज्योति राजभर समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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इसलिए नहीं जुड़ पा रहे अधिकतर परिवार


केंद्र पर कुल 49 फाइलों की सुनवाई की गई। इसमें दो जोड़े गिले-शिकवे भुलाकर एकसाथ रहने के लिए राजी हुए। जबकि दो मामलों में विधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई। परामर्शदाता गंगाधर शुक्ल ने बताया कि पति-पत्नी के बीच समझौते की गुंजाइश के बावजूद कई बाहरी कारणों से विवाद का हल नहीं हो पाता है। बाहरी लोग ज्यादातर मामलों को कोर्ट में घसीटने का प्रयास करते हैं। कई मामलों में मायके वाले सामंजस्य में सहयोग करने के बजाय अपने नियम व शर्तें थोपना चाहते हैं, इससे मुश्किलें आती हैं। मोबाइल के चलते भी परिवारों में संशय पैदा हो रहा है।
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16 फाइलें बंद, आठ में एक पक्ष ही आया


परिवार परामर्श केंद्र में 16 मामलों में या तो कोई नहीं आया या फिर सबकुछ ठीक होने के चलते पत्रावलियां बंद कर दी गईं। आठ ऐसे मामले सामने आए, जिसमें सिर्फ एक पक्ष ही आया। इन मामलों में सुनवाई नहीं हो पाई। इसमें अगली तारीख दी गई है।
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