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कॉर्पोरेशन के कांट्रैक्टर गोद लेंगे बिजलीघर
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2015 10:17 PM IST
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बिजली चोरी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के साथ ही लाइन हानियों को कम करने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने एक अनूठी पहल शुरू की है।
मुख्य अभियंता देवीपाटन जोन हर्ष मुंशी ने इसके लिए पावर कॉर्पोरेशन में काम करने वाले कांट्रैक्टरों (सेवा प्रदाता फर्मों) से अपने-अपने स्तर से एक-एक बिजलीघर गोद लिए जाने की अपील की है। ताकि जिस बिजलीघर को यह ठेकेदार गोद लें, वहां न सिर्फ बिजली की लाइनों का प्रबंधन अच्छा हो, बल्कि राजस्व वसूली से लेकर लाइन हानि का ग्राफ भी 15 फीसदी से नीचे हो सके।
मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी का कहना है कि अगर उनका यह प्रयोग सफल होता है तो ऐसे बिजलीघरों को जनवरी 2016 से 18 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
प्रदेश सरकार अक्तूबर 2016 से गांवों को 16 से 18 घंटे और शहरों को 22 से 24 घंटे बिजली देने के लिए न सिर्फ ट्रांसमिशन लाइनों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही है, बल्कि उसकी अलग-अलग मशीनरियां बिजली की लाइन हानियों को कम करने के साथ ही पूरे प्रदेश से मिलने वाले राजस्व को भी बढ़ाने में जुटी हुई हैं।
ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा राजस्व मिले और वह लोगों को अधिक से अधिक बिजली दे सके। गांवों में बिजली की बिलिंग अभी तक न होने के नाते सरकार और ऊर्जा विभाग का पूरा ध्यान इन दिनों गांवों की बिजली आपूर्ति और वहां खप रही आपूर्ति पर लगा हुआ है, जहां लाइन हानियों का परसेंटेज 40 से 45 फीसदी है।
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इस परसेंटेज को 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए कॉर्पोरेशन स्तर से मिशन तारा-एक, दो व तीन के तहत अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी ने इसकी एक जिम्मेदारी उन सेवा प्रदाता फर्म के कांट्रैक्टरों को भी सौंपी है, जो बीते कई वर्षों से कॉर्पोरेशन में ठेकेदारी कर रहे हैं।
मुख्य अभियंता ने कॉर्पोरेशन के बड़े कांट्रैक्टरों को इसके लिए गोद लिए जाने वाले बिजलीघरों में अपनी टीम लगाकर गांव-गांव कांबिंग करने के निर्देश दिए हैं। ताकि कांट्रैक्टर के लोग गोद लिए गए बिजलीघरों से रिलीज होने वाली बिजली का एटीएंडसी लॉस कम करके एक अच्छा राजस्व कॉर्पोरेशन को दिला सकें।
उन्होंने सभी कांट्रैक्टरों को यह आश्वासन भी दिया है कि अगर ठेकेदार कॉर्पोरेशन की मंशा के अनुरूप बिजली की लाइन हानियों को अपने-अपने गोद लिए गए बिजलीघरों में 15 फीसदी से नीचे ले आते हैं तो ऐसे बिजलीघरों के क्षेत्र में आने वाले गांवों को वह जनवरी 2016 से 18 घंटे बिजली की आपूर्ति करने लगेंगे।
देवीपाटन मंडल के चार जिलों में चयनित 16 आरएपीडीआरपी टाउन की कांबिंग मोबाइल वैन से की जाएगी। इसके लिए कॉर्पोरेशन ने सभी चार जिलों में एक-एक मोबाइल वैन खरीदने के मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं। जिनसे कांबिंग टीमें गांव-गांव जाकर लोगों के घरों में लगे बिजली के मीटरों की रीडिंग लेकर उन्हें तत्काल बिल मुहैया कराएंगी। साथ ही उनके बिलों को जमा कराने की भी जिम्मेदारी कांबिंग टीम के लोगों की होगी।
पावर कॉर्पोरेशन के दो साल पहले तक मंडल में कुल ढाई लाख उपभोक्ता हुआ करते थे। जिनकी संख्या मौजूदा वक्त बढ़कर पांच लाख तक जा पहुंची है।
यही नहीं उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही उसको हर महीने मिलने वाले राजस्व में ढाई गुने तक का इजाफा हुआ है, जो मंडलभर के बिजली अधिकारियों के लिए एक शुभ संकेत है।
कॉर्पोरेशन की मंशा है कि जिस जिले को जितनी बिजली मिले, वहां से उसे उस बिजली के मुताबिक उतना ही राजस्व प्राप्त हो। जो तभी हो सकता है, जब उनका लाइन नेटवर्क बेहतर हो।
साथ में बिजली की लाइन हानि भी न के बराबर हो। बिजली का काम कराने वाले कांट्रैक्टर बतौर सेवा प्रदाता के काम करते हैं। इसलिए उन्हें इस अभियान में भागीदार बनाने का यह प्रयोग उन्होंने मंडल में किया है।
अगर इसके अच्छे रिजल्ट आए तो यह व्यवस्था मंडल भर के सभी 67 बिजलीघरों में लागू कर दी जाएगी। जिसकी शुरूआत वह फिलहाल पांच बिजलीघरों को अलग-अलग कांट्रैक्टरों को गोद दिए जाने से कर रहे हैं।
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मुख्य अभियंता देवीपाटन जोन हर्ष मुंशी ने इसके लिए पावर कॉर्पोरेशन में काम करने वाले कांट्रैक्टरों (सेवा प्रदाता फर्मों) से अपने-अपने स्तर से एक-एक बिजलीघर गोद लिए जाने की अपील की है। ताकि जिस बिजलीघर को यह ठेकेदार गोद लें, वहां न सिर्फ बिजली की लाइनों का प्रबंधन अच्छा हो, बल्कि राजस्व वसूली से लेकर लाइन हानि का ग्राफ भी 15 फीसदी से नीचे हो सके।
मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी का कहना है कि अगर उनका यह प्रयोग सफल होता है तो ऐसे बिजलीघरों को जनवरी 2016 से 18 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
प्रदेश सरकार अक्तूबर 2016 से गांवों को 16 से 18 घंटे और शहरों को 22 से 24 घंटे बिजली देने के लिए न सिर्फ ट्रांसमिशन लाइनों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही है, बल्कि उसकी अलग-अलग मशीनरियां बिजली की लाइन हानियों को कम करने के साथ ही पूरे प्रदेश से मिलने वाले राजस्व को भी बढ़ाने में जुटी हुई हैं।
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ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा राजस्व मिले और वह लोगों को अधिक से अधिक बिजली दे सके। गांवों में बिजली की बिलिंग अभी तक न होने के नाते सरकार और ऊर्जा विभाग का पूरा ध्यान इन दिनों गांवों की बिजली आपूर्ति और वहां खप रही आपूर्ति पर लगा हुआ है, जहां लाइन हानियों का परसेंटेज 40 से 45 फीसदी है।
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इस परसेंटेज को 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए कॉर्पोरेशन स्तर से मिशन तारा-एक, दो व तीन के तहत अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी ने इसकी एक जिम्मेदारी उन सेवा प्रदाता फर्म के कांट्रैक्टरों को भी सौंपी है, जो बीते कई वर्षों से कॉर्पोरेशन में ठेकेदारी कर रहे हैं।
मुख्य अभियंता ने कॉर्पोरेशन के बड़े कांट्रैक्टरों को इसके लिए गोद लिए जाने वाले बिजलीघरों में अपनी टीम लगाकर गांव-गांव कांबिंग करने के निर्देश दिए हैं। ताकि कांट्रैक्टर के लोग गोद लिए गए बिजलीघरों से रिलीज होने वाली बिजली का एटीएंडसी लॉस कम करके एक अच्छा राजस्व कॉर्पोरेशन को दिला सकें।
उन्होंने सभी कांट्रैक्टरों को यह आश्वासन भी दिया है कि अगर ठेकेदार कॉर्पोरेशन की मंशा के अनुरूप बिजली की लाइन हानियों को अपने-अपने गोद लिए गए बिजलीघरों में 15 फीसदी से नीचे ले आते हैं तो ऐसे बिजलीघरों के क्षेत्र में आने वाले गांवों को वह जनवरी 2016 से 18 घंटे बिजली की आपूर्ति करने लगेंगे।
देवीपाटन मंडल के चार जिलों में चयनित 16 आरएपीडीआरपी टाउन की कांबिंग मोबाइल वैन से की जाएगी। इसके लिए कॉर्पोरेशन ने सभी चार जिलों में एक-एक मोबाइल वैन खरीदने के मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं। जिनसे कांबिंग टीमें गांव-गांव जाकर लोगों के घरों में लगे बिजली के मीटरों की रीडिंग लेकर उन्हें तत्काल बिल मुहैया कराएंगी। साथ ही उनके बिलों को जमा कराने की भी जिम्मेदारी कांबिंग टीम के लोगों की होगी।
पावर कॉर्पोरेशन के दो साल पहले तक मंडल में कुल ढाई लाख उपभोक्ता हुआ करते थे। जिनकी संख्या मौजूदा वक्त बढ़कर पांच लाख तक जा पहुंची है।
यही नहीं उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही उसको हर महीने मिलने वाले राजस्व में ढाई गुने तक का इजाफा हुआ है, जो मंडलभर के बिजली अधिकारियों के लिए एक शुभ संकेत है।
कॉर्पोरेशन की मंशा है कि जिस जिले को जितनी बिजली मिले, वहां से उसे उस बिजली के मुताबिक उतना ही राजस्व प्राप्त हो। जो तभी हो सकता है, जब उनका लाइन नेटवर्क बेहतर हो।
साथ में बिजली की लाइन हानि भी न के बराबर हो। बिजली का काम कराने वाले कांट्रैक्टर बतौर सेवा प्रदाता के काम करते हैं। इसलिए उन्हें इस अभियान में भागीदार बनाने का यह प्रयोग उन्होंने मंडल में किया है।
अगर इसके अच्छे रिजल्ट आए तो यह व्यवस्था मंडल भर के सभी 67 बिजलीघरों में लागू कर दी जाएगी। जिसकी शुरूआत वह फिलहाल पांच बिजलीघरों को अलग-अलग कांट्रैक्टरों को गोद दिए जाने से कर रहे हैं।