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त्रिमुहानी घाट पर घाघरा का सरयू से होता था संगम

Sun, 12 Jan 2020 10:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 10:57 PM IST
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The confluence of the Ghaghra at Trimuhani Ghat was done through Saryu
गोंडा में घाघरा नदी। - फोटो : GONDA
गोंडा। पौराणिक नदी घाघरा को अब उत्तर प्रदेश में सरयू के नाम से जाना जाएगा। तिब्बत से निकलने वाली घाघरा का संगम गोंडा के पसका सूकर खेत में त्रिमुहानी घाट पर सरयू से होता है। प्रदेश सरकार की कैबिनेट घाघरा नदी का नाम बदलकर सरयू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे सकती है। मंजूरी मिलने के बाद अब इसे दो नामों के बजाए एक नाम सरयू कहा जाएगा।
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घाघरा नदी का उद्गम स्थल दक्षिणी तिब्बत के हिमालय से होता है। यह तिब्बत से नेपाल होते हुए लखीमपुर खीरी में प्रवेेश करती है। इसे यहां शारदा के नाम से जाना जाता है। लेकिन बहराइच के मिहीपुरवा में शारदा बैराज से यह घाघरा कहलाती है। उत्तर प्रदेश के बलिया के आगे छपरा में यह गंगा से मिलती है। लेकिन पसका व अयोध्या को छोड़कर इसे घाघरा ही कहा जाता है।
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यह नदी बहराइच, सीतापुर, गोंडा, बाराबंकी, अयोध्या, टांडा, राजेसुल्तान, दोहरीघाट, बलिया होते हुए छपरा में संगम में मिल जाती है। यह उत्तर प्रदेश की सबसे प्रमुख नदी है। सरयू नदी का उद्गम स्थल उत्तराखंड के कुमायूं से हुआ है। यह शेराघाट व रामेश्वर से बहते हुए पंचेश्वर मे कालीनदी में गिर जाती है। कालीनदी बहराइच के ब्रह्माघाट पर घाघरा में मिल जाती है लेकिन कालीनदी के संगम के साथ ही एक धारा अलग से निकली है जिसे सरयू कहा जाता है। सरयू गोंडा के करनैलगंज से होते हुए पौराणिक स्थल पसका सूकर खेत में पुन: घाघरा से मिलती है।
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जिस स्थान पर घाघरा व सरयू का संगम होता है उसे त्रिमुहानी घाट कहते हैं। यहां संगम स्थल पर पौष माह में सैकड़ों साधु संत कल्पवास करते हैं और पौष पूर्णिमा पर तीन दिनों का मेला लगता है। इसके बाद यह पुन: घाघरा के नाम से जानी जाती है और अयोध्या में इसे एक बार फिर सरयू के नाम से बुलाया जाता है। अयोध्या में सरयू से टेढ़ी नदी भी जाकर मिलती है।
सनातन धर्म परिषद के अध्यक्ष डॉ. भगवदा चार्य ने बताया कि गरमी के दिनों में बस्ती के मखौड़ा से निकलने वाली 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में यह नदी पड़ती है। सैकड़ों साधु संत बाराबंकी के रास्ते होते हुए पसका क्षेत्र में नाव से प्रवेश करते हैं। पसका संगम स्थल पर भगवान वाराह का अवतार हुआ था। यहीं से थोड़ी दूर पर राजापुर में मानस रचनाकार गोस्वामीतुलसी दास जी का जन्म हुआ था।

यहां से थोड़ दूर पर मां वाराही देवी का मंदिर है। नवाबगंज में कपिल मुनि आश्रम है। इसलिए घाघरा का नाम सरयू करने के लिए साधु संत भी मांग करते रहे। भगवान राम के जन्म स्थान अयोध्या के उत्तर से निकलने वाली इस सरयू नदी के तट पर ही भगवान राम ने अठखेलियां की थी7 इसलिए सरकार के इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना होनी चाहिए।
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