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ऋषियों की तपोभूमि पर दिखा सौहार्द का संगम
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गोंडा के एकता चौराहे पर तैनात पुलिस बल और आते-जाते लोग।
- फोटो : GONDA
गोंडा। अयोध्या की तपोभूमि रही गोनर्द की धरती पर ऋषियों की थाती रही। असगर गोंडवी, अदम व जिगर मुरादाबादी की कर्मभूमि में अयोध्या फैसले के दूसरे दिन सौहार्द कायम रहा। तपोभूमि पर पहले की तरह ऋचाएं गूंज रही हैं। यहां मानस रचनाकार तुलसी की जन्मभूमि, यमदग्रि ऋषि, उद्यालक ऋषि, पाराशर, च्यवनमुनि, कपिलमुनि तथा पतंजलि के आश्रम हैं। अयोध्या के इस तपोभूमि पर सब कुछ पहले जैसा ही है। सौहार्द के संगम से यहां का जर्रा-जर्रा गुलजार है। श्री राम जन्मभूमि पर आए फैसले का हर किसी ने दिल खोलकर स्वागत किया और गंगा-जमुनी तहजीब का रंग गाढ़ा किया है।
अयोध्या की तपोभूमि गोंडा का कोना-कोना रहा है, परसपुर के सूकरखेत में आज भी गुरु नरहरि के आश्रम स्थल से राम कथा की गूंज है। मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली परसपुर का राजापुर क्षेत्र की धरा गुलजार सी लग रही है। यहां के लोगों के चेहरे फैसले से खिले हैं और मान रहे हैं कि सौहार्द की गंगा गोनार्द की धरती से बह रही है। आशंकाओं को तोड़ते हुए गोंडा की आवाम ने अपने सौहार्द और एकता के जज्बे को ऐसा कायम किया कि जिले के इतिहास की यादें ताजा हों गई हैं। असरगर गोंडवी की रचनाओं की चर्चा के साथ ही जनकवि अदम गोंडवी की गीत गुनगना रहीं गलियां खिली-खिली रहीं तो बाजार आम दिनों की तरह गुलजार रहीं।
पौराणिक इतिहासों की यादों को संजोए जिले की धरती राम-रहीम की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। तरबगंज केे परास में पराशर ऋषि के आश्रम, सुभागपुर के पास स्थित च्वनमुनि ऋषि, जमथा में यमदग्नि आश्रम और अमदही में अष्ठाबक्र आश्रम से ऋषियों के तप की खूशबू फैली है। मौका भले ही फैसले से भरे उत्साह और जोश का है लेकिन ऋषियों के तपोबल का प्रभाव आज भी लोगों में एकता और सौहार्द की ज्ञान से रोशन किए है। जिले की शान से देश के राष्ट्रपति डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद की तालीम से भी जुड़ा है तो जिगर मुरादाबादी की रचनाओं की अलग ही पहचान है। अयोध्या के तटवर्ती गांवों से आपसी सौहार्द की खुशबू ऐसी फैली कि हर क्षेत्र में सौहार्द का रंग गाढ़ा हुआ। अयोध्या को निहारती दुर्गागंज, तुलसी पुर माझा, कटरा शिवदयालगंज और जफरापुर की सुबह और शाम काबीलेतारीफ रही। 84 कोसी परिक्रमा से जुड़े एक दर्जन से अधिक पुण्य गांवों में आपसी एकता की गलबहियां बड़े संदेश देते नजर आए।
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ऐतिहासिक स्थलों में भी सजने लगी सौहार्द की चौपाल
जनपद में बाराही देवी, खैराभवानी तथा शंकर जी दुखहरन नाथ एवं पृथ्वीनाथ मंदिर अपनी धरोहर दीर्घकाल से संजोये हुये है। तहसील करनैलगंज व तरबगंज सरयू, घाघरा की तलहटी में बसा है। जनपद अपने एतिहासिक गौरव को संजोये हुये है। भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में यह जनपद अग्रहणी रहा है। यहाँ के राजा देवीबक्श सिंह एक वीर योद्धा व देशभक्त राजा थे जिन्हों स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के साथ लड़ते-लड़ते अपने जीवन को एवं अपने परिवार को न्योछावर कर दिया। उनका बनवाया हुआ सागर तालाब आज भी नगर की शोभा बड़ा रहा है। यहां सौहार्द के संदेशों की चौपालें सजती दिख रही हैं।
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अयोध्या की तपोभूमि गोंडा का कोना-कोना रहा है, परसपुर के सूकरखेत में आज भी गुरु नरहरि के आश्रम स्थल से राम कथा की गूंज है। मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली परसपुर का राजापुर क्षेत्र की धरा गुलजार सी लग रही है। यहां के लोगों के चेहरे फैसले से खिले हैं और मान रहे हैं कि सौहार्द की गंगा गोनार्द की धरती से बह रही है। आशंकाओं को तोड़ते हुए गोंडा की आवाम ने अपने सौहार्द और एकता के जज्बे को ऐसा कायम किया कि जिले के इतिहास की यादें ताजा हों गई हैं। असरगर गोंडवी की रचनाओं की चर्चा के साथ ही जनकवि अदम गोंडवी की गीत गुनगना रहीं गलियां खिली-खिली रहीं तो बाजार आम दिनों की तरह गुलजार रहीं।
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पौराणिक इतिहासों की यादों को संजोए जिले की धरती राम-रहीम की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। तरबगंज केे परास में पराशर ऋषि के आश्रम, सुभागपुर के पास स्थित च्वनमुनि ऋषि, जमथा में यमदग्नि आश्रम और अमदही में अष्ठाबक्र आश्रम से ऋषियों के तप की खूशबू फैली है। मौका भले ही फैसले से भरे उत्साह और जोश का है लेकिन ऋषियों के तपोबल का प्रभाव आज भी लोगों में एकता और सौहार्द की ज्ञान से रोशन किए है। जिले की शान से देश के राष्ट्रपति डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद की तालीम से भी जुड़ा है तो जिगर मुरादाबादी की रचनाओं की अलग ही पहचान है। अयोध्या के तटवर्ती गांवों से आपसी सौहार्द की खुशबू ऐसी फैली कि हर क्षेत्र में सौहार्द का रंग गाढ़ा हुआ। अयोध्या को निहारती दुर्गागंज, तुलसी पुर माझा, कटरा शिवदयालगंज और जफरापुर की सुबह और शाम काबीलेतारीफ रही। 84 कोसी परिक्रमा से जुड़े एक दर्जन से अधिक पुण्य गांवों में आपसी एकता की गलबहियां बड़े संदेश देते नजर आए।
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ऐतिहासिक स्थलों में भी सजने लगी सौहार्द की चौपाल
जनपद में बाराही देवी, खैराभवानी तथा शंकर जी दुखहरन नाथ एवं पृथ्वीनाथ मंदिर अपनी धरोहर दीर्घकाल से संजोये हुये है। तहसील करनैलगंज व तरबगंज सरयू, घाघरा की तलहटी में बसा है। जनपद अपने एतिहासिक गौरव को संजोये हुये है। भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में यह जनपद अग्रहणी रहा है। यहाँ के राजा देवीबक्श सिंह एक वीर योद्धा व देशभक्त राजा थे जिन्हों स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के साथ लड़ते-लड़ते अपने जीवन को एवं अपने परिवार को न्योछावर कर दिया। उनका बनवाया हुआ सागर तालाब आज भी नगर की शोभा बड़ा रहा है। यहां सौहार्द के संदेशों की चौपालें सजती दिख रही हैं।