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Gonda News: वीर रस की लोकगायन विधा आल्हा का हो संरक्षण
Sun, 26 Jul 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:41 PM IST
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साहब शरण मिश्र।
परसपुर। परेटा के बघईपुरवा निवासी आल्हा गायक साहब शरण मिश्र ने लोक संस्कृति के पतन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वीर रस की लोकगायन विधा आल्हा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। इसे जीवित रखने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें आल्हा गायन का शौक था। 45 वर्षों से वह अपनी टीम के साथ प्रदेश सहित कई जगह आल्हा गायन कर चुके हैं। उनकी पांच सदस्यीय टीम जब हाथों में तलवार लेकर जोश के साथ आल्हा प्रस्तुत करती थी, तो लोग जरूरी काम छोड़कर भी सुनने पहुंचते थे।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युवाओं की रुचि लोक परंपराओं से कम हो रही है। नई पीढ़ी का झुकाव आधुनिक मनोरंजन की ओर बढ़ने से यह विधा समाप्त होती दिख रही है। लोक संस्कृति प्रेमियों ने शासन-प्रशासन से आल्हा जैसी कलाओं के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं चलाने और कलाकारों को आर्थिक सहयोग देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रयास नहीं हुआ तो भावी पीढ़ियां इस गौरवशाली परंपरा से वंचित हो जाएंगी। (संवाद)
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उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें आल्हा गायन का शौक था। 45 वर्षों से वह अपनी टीम के साथ प्रदेश सहित कई जगह आल्हा गायन कर चुके हैं। उनकी पांच सदस्यीय टीम जब हाथों में तलवार लेकर जोश के साथ आल्हा प्रस्तुत करती थी, तो लोग जरूरी काम छोड़कर भी सुनने पहुंचते थे।
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उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युवाओं की रुचि लोक परंपराओं से कम हो रही है। नई पीढ़ी का झुकाव आधुनिक मनोरंजन की ओर बढ़ने से यह विधा समाप्त होती दिख रही है। लोक संस्कृति प्रेमियों ने शासन-प्रशासन से आल्हा जैसी कलाओं के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं चलाने और कलाकारों को आर्थिक सहयोग देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रयास नहीं हुआ तो भावी पीढ़ियां इस गौरवशाली परंपरा से वंचित हो जाएंगी। (संवाद)
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