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चंद्रग्रहण पर सूतक काल से बंद रहे मंदिरों के कपाट
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गोंडा नगर के रामेश्वर शिवधाम मंदिर में बंद कपाट। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। चंद्र ग्रहण को लेकर मंगलवार सुबह आठ बजे से सूतक काल लगने के बाद शहर भर के मंदिरों के कपाट बंद रहे। यहां श्रद्धालुओं की संख्या न के बराबर रही। शाम को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान के साथ दान-पुण्य किया। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में श्रद्धालु जुटे।
शहर के मालवीयनगर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर का कपाट चंद्र ग्रहण को लेकर सुबह बंद कर दिया था। नवदुर्गा व साईं मंदिर का कपाट भी बंद रहा। इसके अलावा रामलीला मैदान स्थित रामेश्वर शिवधाम मंदिर का कपाट भी नहीं खोला गया था। इसके अलावा खैरा भवानी मंदिर, दुखहरणनाथ मंदिर, मंशादेवी मंदिर में कपाट बंद रहे। ग्रहण को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति रहती है। पं. रामसुरेश का कहना है कि सूतक शुरू होने से पहले घरों में भोजन नहीं करना चाहिए।
घर में घड़े में रखे पानी को फेंक देना चाहिए। इसके बाद स्नान करके साफ-सफाई करें। इसके बाद भोजन ग्रहण करें। अगर पहले ही भोजन बन गया हो तो उसमें तुलसी की पत्ती डाल दें। चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद भोजन किया जा सकता है। जिले में सुबह आठ बजे से सूतक शुरू हो गया। जो शाम 5.10 बजे तक रहा। इसके बाद चंद्र ग्रहण लग गया। चंद्रमा पर 6.15 बजे तक ग्रहण लगा रहा।
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भगवान का जपें नाम
हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी पं. शरद मिश्रा का कहना है कि ग्रहण काल में लोगों को भगवान का नाम जपना चाहिए। बताया कि जिले में सुबह आठ बजे से सूतक लग गया, जो शाम 5.10 बजे तक रहा। इसके बाद चंद्र ग्रहण का दौर शुरू हुआ जो, शाम 6.15 बजे तक रहा। सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों को स्नान-दान करना चाहिए।
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शहर के मालवीयनगर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर का कपाट चंद्र ग्रहण को लेकर सुबह बंद कर दिया था। नवदुर्गा व साईं मंदिर का कपाट भी बंद रहा। इसके अलावा रामलीला मैदान स्थित रामेश्वर शिवधाम मंदिर का कपाट भी नहीं खोला गया था। इसके अलावा खैरा भवानी मंदिर, दुखहरणनाथ मंदिर, मंशादेवी मंदिर में कपाट बंद रहे। ग्रहण को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति रहती है। पं. रामसुरेश का कहना है कि सूतक शुरू होने से पहले घरों में भोजन नहीं करना चाहिए।
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घर में घड़े में रखे पानी को फेंक देना चाहिए। इसके बाद स्नान करके साफ-सफाई करें। इसके बाद भोजन ग्रहण करें। अगर पहले ही भोजन बन गया हो तो उसमें तुलसी की पत्ती डाल दें। चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद भोजन किया जा सकता है। जिले में सुबह आठ बजे से सूतक शुरू हो गया। जो शाम 5.10 बजे तक रहा। इसके बाद चंद्र ग्रहण लग गया। चंद्रमा पर 6.15 बजे तक ग्रहण लगा रहा।
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भगवान का जपें नाम
हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी पं. शरद मिश्रा का कहना है कि ग्रहण काल में लोगों को भगवान का नाम जपना चाहिए। बताया कि जिले में सुबह आठ बजे से सूतक लग गया, जो शाम 5.10 बजे तक रहा। इसके बाद चंद्र ग्रहण का दौर शुरू हुआ जो, शाम 6.15 बजे तक रहा। सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों को स्नान-दान करना चाहिए।