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सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब बनाएंगे खिलौने
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के स्कूलों में कार्यरत शिक्षक अब खिलौने भी तैयार करेंगे। विभाग की ओर से इसके लिए आदेश जारी किए गए हैं। खिलौना निर्माण से शिक्षक जहां अपनी प्रतिभा दिखाएंगे, वहीं वह गतिविधियों का प्रदर्शन खिलौनों के माध्यम से कर सकेंगे। शिक्षकों की ओर से तैयार किए जाने खिलौनों को ऑनलाइन प्लेटफार्म भी मिलेगा।
शासन की मंशा है कि खिलौनों को अगर सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए तो यह उद्योग और बढ़ेगा। आत्मनिर्भर भारत के तहत स्थानीय खिलौनों को आगे लाने की योजना है। हर गांव में स्कूल हैं और अगर खिलौनों के माध्यम से बच्चों को सिखाने की पहल अध्यापक करेंगे तो खिलौनों की मांग भी बढ़ेगी।
इसमें सरकारी स्कूलों के साथ ही निजी स्कूलों को भी शामिल किया जा सकता है। राष्ट्रीय खिलौना मेला (आईटीएफ) में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद को 75 स्टॉल दी गई हैं। इस मेले में यूपी के शिक्षक और स्कूल भी भाग लेंगे। यह मेला 27 फरवरी से 2 मार्च तक वर्चुअल तरीके से आयोजित होगा।
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इस मेले से उन शिक्षकों को प्रोत्साहन व मंच मिलेगा जो सिखाने के लिए अपने खेल-खिलौने व एजुकेशनल किट तैयार करते हैं। इसके तहत खिलौने, शैक्षिक किट, आओ करके सीखे, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, डिजिटल खेल, बोर्ड गेम आदि बनाया जा सकेगा।
खिलौने तैयार करने का एक प्रस्तुतिकरण भी किया जाएगा। ऐसे खिलौने बनाने हैं, जिनका उपयोग संस्कृति, इतिहास, भारतीय सभ्यता, सामाजिक व मानवीय मूल्य, पर्यावरण, गणित, विज्ञान आदि पढ़ाने में किया जा सके।
इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी खिलौने बनाए जा सकेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने इसके लिए नियमावली जारी कर दी है। इसमें सरकारी, सहायता प्राप्त व निजी प्राइमरी, जूनियर, इंटरमीडिएट स्कूल भाग ले सकेंगे।
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शासन की मंशा है कि खिलौनों को अगर सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए तो यह उद्योग और बढ़ेगा। आत्मनिर्भर भारत के तहत स्थानीय खिलौनों को आगे लाने की योजना है। हर गांव में स्कूल हैं और अगर खिलौनों के माध्यम से बच्चों को सिखाने की पहल अध्यापक करेंगे तो खिलौनों की मांग भी बढ़ेगी।
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इसमें सरकारी स्कूलों के साथ ही निजी स्कूलों को भी शामिल किया जा सकता है। राष्ट्रीय खिलौना मेला (आईटीएफ) में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद को 75 स्टॉल दी गई हैं। इस मेले में यूपी के शिक्षक और स्कूल भी भाग लेंगे। यह मेला 27 फरवरी से 2 मार्च तक वर्चुअल तरीके से आयोजित होगा।
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इस मेले से उन शिक्षकों को प्रोत्साहन व मंच मिलेगा जो सिखाने के लिए अपने खेल-खिलौने व एजुकेशनल किट तैयार करते हैं। इसके तहत खिलौने, शैक्षिक किट, आओ करके सीखे, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, डिजिटल खेल, बोर्ड गेम आदि बनाया जा सकेगा।
खिलौने तैयार करने का एक प्रस्तुतिकरण भी किया जाएगा। ऐसे खिलौने बनाने हैं, जिनका उपयोग संस्कृति, इतिहास, भारतीय सभ्यता, सामाजिक व मानवीय मूल्य, पर्यावरण, गणित, विज्ञान आदि पढ़ाने में किया जा सके।
इसमें दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी खिलौने बनाए जा सकेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने इसके लिए नियमावली जारी कर दी है। इसमें सरकारी, सहायता प्राप्त व निजी प्राइमरी, जूनियर, इंटरमीडिएट स्कूल भाग ले सकेंगे।