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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Syndicate of officers and contractor barrier in door step delivery

अफसरों व ठेकेदार का सिंडिकेट बना डोर स्टेप डिलेवरी में रोड़ा

Sun, 02 Jul 2017 10:09 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Sun, 02 Jul 2017 10:09 PM IST
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 जिले में अफसरों, अनाज माफिया व ठेकेदारों के सिंडिकेट के कारण डोर स्टेप डिलेवरी योजना फाइलों में कैद हो गई। करीब पांच साल पहले शासन की ओर से सरकारी अनाज के डायवर्जन व कालाबाजारी होने से रोकने के लिए डोर स्टेप डिलेवरी योजना शुरू की थी।
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लेकिन जिले में जिम्मेदार विभाग के लोगों को राशन माफिया के गठजोड़ से परवान नही चढ़ी। जिले में वर्ष 2004 व 2006 के बीच करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। जिसमें कई फाइनेंसर, ट्रांसपोर्टर,अधिकारी व कर्मचारी जेल जा चुके हैं।
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जिले में इस योजना के लिए सिर्फ कवायद शुरू हुई थी। शासन को योजना शुरू कर दिये जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से बिना कुछ ठोस व्यवस्था किये सिर्फ एक वाहन पर बैनर लगाकर योजना के तहत वाहन रवाना किये जाने की खानापूर्ति कर दी गई थी। तब से इसकी खोज खबर न तो शासन ने की न ही जिले के अधिकारियों ने इस इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई कार्य किया। 
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जिले के पूर्व जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह ने जिले में उचित दर विक्रेताओं के यहां तक सुरक्षित अनाज पहुंचाने के लिए शासन की ओर से शुरू की डोर स्टेप डिलेवरी योजना के तहत शुरूआत की थी। उन्होंने सरकार अनाज को एक ट्रक पर योजना का नाम ब्लाक गोदाम व दुकान लिखा बैनर लगे ट्रक को हरी झंडी देकर रवाना किया था। लेकिन उसी एक ट्रक के बाद न तो कोई ट्रक भेजी गई न ही इसके लिए कारगर उपाय हुए। मजे की बात यह रही इस योजना की किसी भी अफसर ने खोज खबर कर कभी समीक्षा भी नही की। 
 
अनाज के डायवर्जन को रोकने के लिए शासन की ओर से शुरू की गई डोर स्टेप डिलेवरी योजना की कवायद विभागों की लापरवाही में दब गई। पूत विभाग की ओर से राशन कार्डो के डिजिटाईजेशन में खूब लापरवाही की गई। इसी दौरान शासन की ओर से भी कभी कार्डो को बैंक खातों तो कभी वोटर आईडी तो कभी आधार से लिंक कि ये जाने के आदेश आते गये।

यही नही जब आधार फीडिंग पर जोर बढ़ा तो राशन कार्ड की फीडिंग करने  वाले जिम्मेदारों ने बोगस राशन कार्ड की फीडिंग करा दी। इससे एक तो विभाग के अधिकारी समीक्षा में डांट खाने से बच गये दूसरे यह काम और लटक गया । इसके अलावा दूसरा जिम्मेदार उस दौर में आवश्यक वस्तु निगम रहा है।


इस विभाग पर पूरी तरह से राशन माफिया का सिंडिकेट हाबी रहा। यही वजह रही कि इसके कई गोदाम प्रभारी कई बार गोदाम छोड़ छोड़ कर भागने पर मजबूर हुए। कई की पिटाई भी की गई। इस विभाग ने गोदाम से माल ढुलाई के लिए ठेकेदारों का चयन करने में कोई दिलचस्पी नही ली। यही नही इन विभागों कें जिम्मेदार अफसरों के साथ जिला प्रशासन ने भी इसकी तैयारी को लेकर न तो कोई काम किया न ही दिक्कतों पर शासन से कोई गाइड लाइन मांगी। योजना के कवायद व इससे जुड़ी फाइलों को अपने अपने पास दबाए रखा। 
 
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