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Gonda News: डैमेज से पहले कंट्रोल की रणनीति
Sat, 15 Apr 2023 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 15 Apr 2023 10:42 PM IST
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गोंडा। निकाय चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद जीत दर्ज करने के लिए बागियों को मनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित होती है। अपनी ही पार्टी के खिलाफ ताल ठोकने वाले बागी पहले भी भाजपा का खेल बिगाड़ चुके हैं। इस बार डैमेज के पहले कंट्रोल करने की रणनीति तैयार की गई है। भाजपा ने अपने वरिष्ठ व दिग्गज नेताओं को बागियों के मनुहार की जिम्मेदारी सौंपी है। जिला प्रभारी अवनीश सिंह के पर्यवेक्षण में डैमेज कंट्रोल कमेटी बनाई गई है। गोंडा-बलरामपुर के विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह, विधायक प्रभात कुमार वर्मा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. रंजन शर्मा व महेश नारायण तिवारी तथा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष वीना राय राजभर को बागियों को मनाने का जिम्मा सौंपा गया है।
वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में भाजपा को अपनों के कारण ही शिकस्त मिली थी। प्रदेश की सत्ता पर आसीन होने के बावजूद सात निकाय सीटों में सिर्फ दो पर ही जीत मिली थी। बाकी पांच सीटों पर बागियों ने खेल बिगाड़ दिया था। नगर पालिका क्षेत्र गोंडा की सीट पर भाजपा ने अपने पुराने नेता अरुण कुमार शुक्ल की पत्नी माया शुक्ला को प्रत्याशी बनाया तो तत्कालीन चेयरमैन रूपेश कुमार उर्फ निर्मल श्रीवास्तव ने भाजपा के खिलाफ ताल ठोक दी। उस समय नगर में निर्मल श्रीवास्तव एक हिंदूवादी फायर ब्रांड नेता के रूप में माने जाते थे। नतीजतन पूर्व चेयरमैन व सपा के दिग्गज नेता उज्मा राशिद को जीत मिली।
इसी प्रकार नगर पालिका नवाबगंज की सीट पर भाजपा ने डॉ. अशोक सिंह की पत्नी मंजू सिंह को टिकट दे दिया। जिससे नाराज कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी के निर्णय को गलत ठहराते हुए खुले मंच से बगावत का एलान कर दिया। नवाबगंज के पहाड़ मोहल्ले पर लगे मंच से नेता जी ने निर्दल प्रत्याशी सतेंद्र सिंह को जीत दिलाने की अपील की। जिससे भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। खरगूपुर, करनैलगंज व कटरा बाजार में भी बागियों ने खेल बिगाड़ दिया था।
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वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में भाजपा को अपनों के कारण ही शिकस्त मिली थी। प्रदेश की सत्ता पर आसीन होने के बावजूद सात निकाय सीटों में सिर्फ दो पर ही जीत मिली थी। बाकी पांच सीटों पर बागियों ने खेल बिगाड़ दिया था। नगर पालिका क्षेत्र गोंडा की सीट पर भाजपा ने अपने पुराने नेता अरुण कुमार शुक्ल की पत्नी माया शुक्ला को प्रत्याशी बनाया तो तत्कालीन चेयरमैन रूपेश कुमार उर्फ निर्मल श्रीवास्तव ने भाजपा के खिलाफ ताल ठोक दी। उस समय नगर में निर्मल श्रीवास्तव एक हिंदूवादी फायर ब्रांड नेता के रूप में माने जाते थे। नतीजतन पूर्व चेयरमैन व सपा के दिग्गज नेता उज्मा राशिद को जीत मिली।
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इसी प्रकार नगर पालिका नवाबगंज की सीट पर भाजपा ने डॉ. अशोक सिंह की पत्नी मंजू सिंह को टिकट दे दिया। जिससे नाराज कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी के निर्णय को गलत ठहराते हुए खुले मंच से बगावत का एलान कर दिया। नवाबगंज के पहाड़ मोहल्ले पर लगे मंच से नेता जी ने निर्दल प्रत्याशी सतेंद्र सिंह को जीत दिलाने की अपील की। जिससे भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। खरगूपुर, करनैलगंज व कटरा बाजार में भी बागियों ने खेल बिगाड़ दिया था।
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