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Gonda News: एसआईटी की जांच से खुलेंगे 306 अपंजीकृत मदरसों के राज
Mon, 23 Oct 2023 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 23 Oct 2023 11:17 PM IST
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गोंडा। विदेशी फंडिंग की आशंका के बीच मदरसों की जांच नए सिरे से शुरू कर दी गई है। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय व आतंकवाद निरोधी दस्ते के सहयोग से बनी एसआईटी को यह जिम्मेदारी दी गई है। नेपाल बाॅर्डर से सटे जिलों में स्थित मदरसों की खासतौर से जांच की जा रही है। ऐसे में गोंडा जिला भी एसआईटी की रडार पर है। ऐसे में जिले के कुल 306 अपंजीकृत मदरसों को फिर से खंगाला जाएगा।
जिले में वित्तीय सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या सात तो वित्तविहीन मदरसों की संख्या 286 है। जबकि जिले में करीब 306 मदरसे बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से इन मदरसों की जांच कराई जा चुकी है। जबकि एसआईटी को इन मदरसों की सूचना भी भेजी गई है। बिना किसी वित्तीय सहायता व पंजीकरण के संचालित मदरसे एसआईटी की जांच के दायरे में हैं। यह मदरसे पूरे जिले में अलग-अलग जगहों पर किराये या किसी की निजी भूमि पर संचालित हो रहे हैं। जहां एक या दो शिक्षक मौजूद हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि मदरसों की जानकारी शासन को भेज दी गई है।
विदेशी फंडिंग पर नहीं मिला जवाब
विदेशी फंडिंग के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से सभी मदरसों से जवाब मांगा जा चुका है। अभी तक किसी भी मदरसे ने विदेशी फंडिंग की बात स्वीकार नहीं की है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि एटीएस या शासन की ओर से भी विदेशी फंडिंग की पुष्टि नहीं की गई है।
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वर्ष 2016 से नहीं मिली मान्यता, अटका मानदेय
शासन ने मदरसों को वर्ष 2016 से मान्यता नहीं दी है। कई मदरसों की मान्यता की फाइल अटकी हुई है। जिससे मदरसे बिना मान्यता के संचालित होने को मजबूर हैं। वहीं, मदरसों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों का मानदेय भी लंबे समय से अटका हुआ है। जिले के करीब 800 मदरसा शिक्षकोें को बीते छह साल से मानदेय नहीं दिया गया है। ऐसे में शिक्षक बिना मानदेय के ही अध्यापन का कार्य करने को विवश हैं।
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जिले में वित्तीय सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या सात तो वित्तविहीन मदरसों की संख्या 286 है। जबकि जिले में करीब 306 मदरसे बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से इन मदरसों की जांच कराई जा चुकी है। जबकि एसआईटी को इन मदरसों की सूचना भी भेजी गई है। बिना किसी वित्तीय सहायता व पंजीकरण के संचालित मदरसे एसआईटी की जांच के दायरे में हैं। यह मदरसे पूरे जिले में अलग-अलग जगहों पर किराये या किसी की निजी भूमि पर संचालित हो रहे हैं। जहां एक या दो शिक्षक मौजूद हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि मदरसों की जानकारी शासन को भेज दी गई है।
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विदेशी फंडिंग पर नहीं मिला जवाब
विदेशी फंडिंग के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से सभी मदरसों से जवाब मांगा जा चुका है। अभी तक किसी भी मदरसे ने विदेशी फंडिंग की बात स्वीकार नहीं की है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि एटीएस या शासन की ओर से भी विदेशी फंडिंग की पुष्टि नहीं की गई है।
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वर्ष 2016 से नहीं मिली मान्यता, अटका मानदेय
शासन ने मदरसों को वर्ष 2016 से मान्यता नहीं दी है। कई मदरसों की मान्यता की फाइल अटकी हुई है। जिससे मदरसे बिना मान्यता के संचालित होने को मजबूर हैं। वहीं, मदरसों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों का मानदेय भी लंबे समय से अटका हुआ है। जिले के करीब 800 मदरसा शिक्षकोें को बीते छह साल से मानदेय नहीं दिया गया है। ऐसे में शिक्षक बिना मानदेय के ही अध्यापन का कार्य करने को विवश हैं।