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96 लाख रुपए खर्च कर बना दिए तीन प्लेटफार्म, नहीं रुकी एक भी ट्रेन

Mon, 22 Nov 2021 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 10:27 PM IST
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Silence on three new platforms due to technical flaws
गोंडा में सूना पड़ा रेलवे प्लेटफार्म नंबर चार। - फोटो : GONDA
गोंडा। पूर्वोत्तर रेलवे ने तीन साल पहले 96 लाख रुपये खर्च कर गोंडा स्टेशन पर तीन नए प्लेटफार्म बनाए गए और इंटरलॉकिंग का कार्य भी पूरा किया। लेकिन आज तक इन तीनों प्लेटफार्मों पर एक भी ट्रेन का ठहराव नहीं हुआ। रेलवे की सभी कवायद बेकार साबित हुई।
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वर्तमान में ट्रेनों को आउटर पर रोककर प्लेटफार्म खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। बताया गया है कि इंटरलॉकिंग में तकनीकी खामियों के कारण कवायद पर पानी फिर रहा है। इससे गोंडा, बलरामपुर व बहराइच की तरफ से आने व जाने वाले यात्रियों को दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
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पूर्वोत्तर रेलवे का गोंडा स्टेशन जंक्शन बहुत ही महत्वपूर्ण है। गोरखपुर, लखनऊ, बलरामपुर व बहराइच की ओर जाने वाली ट्रेनों के ठहराव के लिए यहां पांच प्लेटफार्म बने थे।
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इसमें तीन ब्राडगेज तथा दो मीटर गेज के थे। मीटर गेज को खत्म कर बहराइच व बलरामपुर लाइन को ब्राडगेज में परिवर्तित कर दिया गया। पुराने माल गोदाम को अलग शिफ्ट कर उसके स्थान पर छह नंबर का नया प्लेटफार्म बनाया गया। वर्तमान में ब्राडगेज के तीन के बजाय अब छह प्लेटफार्म हो गए हैं। करीब 56 जोड़ी मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट समेत पैसेंजर ट्रेनें तथा 77 जोड़ी मालगाड़ी का आवागमन प्रतिदिन होता है।
रेलवे ने गोंडा रेलवे यार्ड स्थित तीन नए प्लेटफार्म बनाए। इन तीनों प्लेटफार्म पर करीब 96 लाख रुपये खर्च हुए। प्लेटफार्म के बनाने का मुख्य उद्देश्य था कि बलरामपुर से होकर आने वाली ट्रेनें गोंडा से होकर सीधे लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, दिल्ली, मुंबई, लुधियाना व जम्मू तवी की यात्रा का आनंद लोग उठा सकेंगे। बहराइच से गोंडा आने वाली ट्रेनें सीधे महानगरों तक बिना रुके या बदले लोग जा सकेंगे।
गोरखपुर व लखनऊ की ओर से आने वाली ट्रेनें आउटर पर नहीं खड़ी होंगी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की उदासीनता से तीन साल से गोंडा, बलरामपुर व बहराइच जनपदों के करीब डेढ़ करोड़ लोगों को यह सुविधा नहीं मिल सकी।
96 लाख की लागत से बने तीन नए प्लेटफार्म 36 महीने से बेकार हैं और छुट्टा जानवरों का अड्डा बन गया है। केवल बहराइच से गोंडा के बीच में एक जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चलाकर इस नए प्लेटफार्म पर चहल पहल बढ़ाई है। इसके बाद पूरा प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहता है।

प्लेटफार्म के फर्श पर टाइल्स पर भारी गंदगी जमा है। गोंडा रेलवे यार्ड से लिंक जोड़ने के लिए 36 माह से अधिक समय से पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम, डीआरएम, चीफ इंजीनियर सहित दर्जनों अधिकारी आए दिन रेलवे यार्ड का निरीक्षण करते हैं। निरीक्षण करने के पश्चात बैरंग मुख्यालय गोरखपुर व डिवीजन लखनऊ चले जाते हैं। इन अधिकारियों से लिंक के बारे में पूछा जाता है, तो बताते हैं एक व दो माह के अंदर शुरू हो जाएगा। लेकिन परिणाम सिफर रहता है।
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