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Gonda News: मर्यादा व भव्यता का अनुपम उदाहरण है श्रीराम विवाह
Thu, 18 Dec 2025 11:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 18 Dec 2025 11:33 PM IST
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शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज में आयोजित श्रीराम कथा में नृत्य करतीं महिलाएं। स्रोत: सोशल
गोंडा। हमारे धर्मग्रंथों में दो ऐसे विवाहों का उल्लेख मिलता है, जो अपनी अद्भुत स्थिति और दिव्यता के लिए जाने जाते हैं। पहला शिव विवाह और दूसरा राम विवाह। शिव विवाह में जहां विचित्र बराती और वैराग्य का दृश्य था, वहीं राम विवाह के लिए बरात बिना किसी निर्धारित तिथि के ही अयोध्या से सजकर जनकपुर पहुंच गई थी। ये बातें महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने बुधवार को कहीं। वह शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज परिसर में श्रीमहाकाल भक्त परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम विवाह की कथा सुना रहे थे।
प्रवाचक ने बताया कि बरात की तैयारी अयोध्या की मर्यादा और संस्कृति को दर्शा रही थी। सबसे आगे दिव्य रथ पर गुरु वशिष्ठ विराजमान थे। उनके पीछे राजा दशरथ देवताओं को प्रणाम कर रथ पर सवार हुए। अयोध्या की पूरी प्रजा उल्लास और श्रद्धा से भरी हुई थी। बरात में देवता, ऋषि-मुनि और गंधर्व भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि राम विवाह मर्यादा, भव्यता और दिव्य अनुशासन का अनुपम उदाहरण है।
प्रवाचक ने कहा कि जनकपुर में जैसे ही बरात आने की सूचना मिली, राजा जनक स्वागत की तैयारियों में जुट गए। स्वागत की हर व्यवस्था इस प्रकार की गई कि अयोध्या से आए अतिथियों को जनकपुर की आतिथ्य परंपरा का अनुभव हो सके। दही-चूड़ा लेकर सेवक स्वागत के लिए आगे बढ़े।
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प्रवाचक ने कहा कि बरात तो जनकपुर पहुंच गई, लेकिन अब तक विवाह की कोई तिथि ही तय नहीं थी। गुरु वरिष्ठ के आग्रह पर ब्रह्मा जी ने लग्न निकालकर शुभ मुहूर्त निश्चित किया। इसके बाद चारों भाइयों का धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। इस मौके पर विधायक पल्टूराम, राजीव रस्तोगी, अजय सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, जनमेजय सिंह, एनएस भदौरिया, भूपेंद्र आर्य, अशोक पांडेय, अनुपम मिश्र आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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प्रवाचक ने बताया कि बरात की तैयारी अयोध्या की मर्यादा और संस्कृति को दर्शा रही थी। सबसे आगे दिव्य रथ पर गुरु वशिष्ठ विराजमान थे। उनके पीछे राजा दशरथ देवताओं को प्रणाम कर रथ पर सवार हुए। अयोध्या की पूरी प्रजा उल्लास और श्रद्धा से भरी हुई थी। बरात में देवता, ऋषि-मुनि और गंधर्व भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि राम विवाह मर्यादा, भव्यता और दिव्य अनुशासन का अनुपम उदाहरण है।
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प्रवाचक ने कहा कि जनकपुर में जैसे ही बरात आने की सूचना मिली, राजा जनक स्वागत की तैयारियों में जुट गए। स्वागत की हर व्यवस्था इस प्रकार की गई कि अयोध्या से आए अतिथियों को जनकपुर की आतिथ्य परंपरा का अनुभव हो सके। दही-चूड़ा लेकर सेवक स्वागत के लिए आगे बढ़े।
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प्रवाचक ने कहा कि बरात तो जनकपुर पहुंच गई, लेकिन अब तक विवाह की कोई तिथि ही तय नहीं थी। गुरु वरिष्ठ के आग्रह पर ब्रह्मा जी ने लग्न निकालकर शुभ मुहूर्त निश्चित किया। इसके बाद चारों भाइयों का धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। इस मौके पर विधायक पल्टूराम, राजीव रस्तोगी, अजय सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, जनमेजय सिंह, एनएस भदौरिया, भूपेंद्र आर्य, अशोक पांडेय, अनुपम मिश्र आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।