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शारदीय नवरात्र आज से
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2015 11:36 PM IST
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नवरात्र का शुभारंभ मंगलवार से हो रहा है। शारदीय नवरात्र इस बार 10 दिन का होगा। तिथियों में फेरबदल के कारण इस बार द्वितीया दो दिन का होगा। इन दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना होगी और दशमी के दिन मां की विदाई की जाएगी। पहले दिन मां के दिव्य रूप शैलपुत्री की पूजा होगी।
इस दिन नारियल, चुनरी चढ़ाई जाएगी। घरों में कलश पूजन होगा तथा नौ दिनों तक मां की अखंड ज्योति जलाकर अवगुणों को त्यागने का संकल्प होगा। नौ दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना फलदायिनी होती है। पूजा-अर्चना के लिए विभिन्न स्थानों पर देवी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है।
नगर के मुख्य चौराहे के पास मां काली भवानी का मंदिर है। वर्षों पुराने इस मंदिर में मां काली की आराधना की जाती है। यहां आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन से ही मंदिर के बाहर नारियल, चुनरी, फूल मालाओं सहित अन्य सामानों की दुकानें सज जाती हैं। अगर, कपूर, पुष्प, अक्षत एवं सुगंध से मां की आराधना होगी।
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नगर के ग्रामीण व शहर के बीच यह मंदिर बहुत ही पुराना है। यहां मंदिर के बगल बने पोखरे में भक्त स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा करते हैं। इसके बाद यहां गरीबों को दान देते हैं। मां को चढ़ावे के सारे सामान यहां मिलते हैं। महंत कैलाश नारायण गिरि ने बताया कि यहां पूरे नवरात्र तक भीड़ रहती है। हजारों भक्त यहां मन्नतें मांगते हैं और मां उनकी आराधना को सुनती हैं।
बेलसर ब्लॉक के उमरी बेगमगंज से दो किलोमीटर की दूरी पर उत्तरी भवानी (मां बाराही देवी) का भव्य मंदिर है। भगवान बाराह अवतार के समय मां बाराही देवी का यहां प्राकट्य हुआ था। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब पृथ्वी को बचाने के लिए बाराह अवतार लिया था तो उनके सहयोग के लिए मां ने बाराही देवी का अवतार लेकर उनका सहयोग किया था। इस मंदिर पर वैसे तो पूरे वर्ष आराधना होती है, लेकिन नवरात्र में यहां विशेष व्यवस्था की जाती है।
पंडित राजन मिश्र के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मंगलवार है। सुबह आठ से 9.30 बजे तक राहुकाल है। ऐसे में सुबह छह से सुबह आठ बजे तक तथा 9.30 बजे से शाम तक कलश की स्थापना की जा सकती है।
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इस दिन नारियल, चुनरी चढ़ाई जाएगी। घरों में कलश पूजन होगा तथा नौ दिनों तक मां की अखंड ज्योति जलाकर अवगुणों को त्यागने का संकल्प होगा। नौ दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना फलदायिनी होती है। पूजा-अर्चना के लिए विभिन्न स्थानों पर देवी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है।
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नगर के मुख्य चौराहे के पास मां काली भवानी का मंदिर है। वर्षों पुराने इस मंदिर में मां काली की आराधना की जाती है। यहां आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन से ही मंदिर के बाहर नारियल, चुनरी, फूल मालाओं सहित अन्य सामानों की दुकानें सज जाती हैं। अगर, कपूर, पुष्प, अक्षत एवं सुगंध से मां की आराधना होगी।
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नगर के ग्रामीण व शहर के बीच यह मंदिर बहुत ही पुराना है। यहां मंदिर के बगल बने पोखरे में भक्त स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा करते हैं। इसके बाद यहां गरीबों को दान देते हैं। मां को चढ़ावे के सारे सामान यहां मिलते हैं। महंत कैलाश नारायण गिरि ने बताया कि यहां पूरे नवरात्र तक भीड़ रहती है। हजारों भक्त यहां मन्नतें मांगते हैं और मां उनकी आराधना को सुनती हैं।
बेलसर ब्लॉक के उमरी बेगमगंज से दो किलोमीटर की दूरी पर उत्तरी भवानी (मां बाराही देवी) का भव्य मंदिर है। भगवान बाराह अवतार के समय मां बाराही देवी का यहां प्राकट्य हुआ था। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब पृथ्वी को बचाने के लिए बाराह अवतार लिया था तो उनके सहयोग के लिए मां ने बाराही देवी का अवतार लेकर उनका सहयोग किया था। इस मंदिर पर वैसे तो पूरे वर्ष आराधना होती है, लेकिन नवरात्र में यहां विशेष व्यवस्था की जाती है।
पंडित राजन मिश्र के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मंगलवार है। सुबह आठ से 9.30 बजे तक राहुकाल है। ऐसे में सुबह छह से सुबह आठ बजे तक तथा 9.30 बजे से शाम तक कलश की स्थापना की जा सकती है।