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3.83 करोड़ से सशक्त होंगे स्वयं सहायता समूह
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गोंडा। जिले के स्वयं सहायता समूहों को रोजगारपरक कार्यों के लिए शासन ने तीन करोड़ 83 लाख 50 हजार रुपये अनुदान दिया है। ये धनराशि 4080 समूहों को दी जाएगी। जिससे रोजगार सृजन के साथ ही कई नई गतिविधियां शुरू होंगी। रोजगार के लिए कार्य करने वाले इन समूहों को विभिन्न मदों में अनुदान मिला है। जिससे वह अपने कार्य को आगे बढ़ा सकें। इससे जिले की करीब 40 हजार महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही उनके उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने का खाका भी खींचा जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
जिले में स्वयं सहायता समूहों की ओर से कई कार्य किए जा रहे हैं। इसमें हलधरमऊ के धनगर कमालपुर के स्वयं सहायता समूह के कार्य की तारीफ प्रधानमंत्री तक कर चुके हैं। इसके बाद से जिले में समूहों की ओर से नर्सरी, फूलों की खेती, अचार-मुरब्बा, सिलाई, सीएफएल बल्ब आदि बनाने के काम शुरू किए गये। इसके बाद जिले में करीब 1,800 स्वयं सहायता समूहों ने रोजगार के लिए कार्ययोजना तैयार की। जिस पर शासन ने अनुदान की स्वीकृति दी है। जिसमें 1,800 समूहों को रिवाल्विंग फंड के लिए 15-15 हजार रुपये की दर से दो करोड़ 70 लाख रुपये की मदद दी गई है।
इसकेे अलावा इतने ही समूहों को 2500 रुपये के हिसाब से 45 लाख रुपये स्टार्ट अप फंड में दिया गया है। इसके अलावा 82 समूहों के ग्राम संगठन को स्टार्टअप फंड के लिए 75 हजार रुपये के हिसाब से 61 लाख 50 हजार रुपये का बजट मिला है। इसके साथ ही दो संकुल स्तरीय समूहों के संघ को साढ़े तीन लाख के हिसाब से सात लाख रुपये का बजट दिया गया है। इससे समूह की महिलाएं अपने काम आगे बढ़ाएंगी और रोजगारपरक कार्य एकजुट होकर करेंगी। जिससे वह स्थायी रोजगार हासिल कर सकें। हर समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में जिले की 40 हजार महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में गोंडा प्रदेश के टॉप टेन जिलों में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक नीलांबुज कहते हैं कि प्रदेश स्तर की समीक्षा में जिले की सराहना हुई है। जिले में समूहों की तरफ से कई कार्य हो रहे हैं। जिससे महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। बीसी सखी, बिजली सखी के साथ ही अन्य गतिविधियों में समूह की महिलाएं शामिल हैं। डीसी एनआरएलएम एनबी सविता कहते हैं कि समूहों को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन स्तर से अनुदान स्वीकृत हुए हैं, जिसे समूहों के खाते में भेजा गया है। अब वह आत्मनिर्भरता के लिए कार्य कर सकेंगी।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुुमार का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। समूहों को सशक्त बनाने और महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए मनरेगा से भी जोड़ा जा रहा है।
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जिले में स्वयं सहायता समूहों की ओर से कई कार्य किए जा रहे हैं। इसमें हलधरमऊ के धनगर कमालपुर के स्वयं सहायता समूह के कार्य की तारीफ प्रधानमंत्री तक कर चुके हैं। इसके बाद से जिले में समूहों की ओर से नर्सरी, फूलों की खेती, अचार-मुरब्बा, सिलाई, सीएफएल बल्ब आदि बनाने के काम शुरू किए गये। इसके बाद जिले में करीब 1,800 स्वयं सहायता समूहों ने रोजगार के लिए कार्ययोजना तैयार की। जिस पर शासन ने अनुदान की स्वीकृति दी है। जिसमें 1,800 समूहों को रिवाल्विंग फंड के लिए 15-15 हजार रुपये की दर से दो करोड़ 70 लाख रुपये की मदद दी गई है।
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इसकेे अलावा इतने ही समूहों को 2500 रुपये के हिसाब से 45 लाख रुपये स्टार्ट अप फंड में दिया गया है। इसके अलावा 82 समूहों के ग्राम संगठन को स्टार्टअप फंड के लिए 75 हजार रुपये के हिसाब से 61 लाख 50 हजार रुपये का बजट मिला है। इसके साथ ही दो संकुल स्तरीय समूहों के संघ को साढ़े तीन लाख के हिसाब से सात लाख रुपये का बजट दिया गया है। इससे समूह की महिलाएं अपने काम आगे बढ़ाएंगी और रोजगारपरक कार्य एकजुट होकर करेंगी। जिससे वह स्थायी रोजगार हासिल कर सकें। हर समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में जिले की 40 हजार महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में गोंडा प्रदेश के टॉप टेन जिलों में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक नीलांबुज कहते हैं कि प्रदेश स्तर की समीक्षा में जिले की सराहना हुई है। जिले में समूहों की तरफ से कई कार्य हो रहे हैं। जिससे महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। बीसी सखी, बिजली सखी के साथ ही अन्य गतिविधियों में समूह की महिलाएं शामिल हैं। डीसी एनआरएलएम एनबी सविता कहते हैं कि समूहों को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन स्तर से अनुदान स्वीकृत हुए हैं, जिसे समूहों के खाते में भेजा गया है। अब वह आत्मनिर्भरता के लिए कार्य कर सकेंगी।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुुमार का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। समूहों को सशक्त बनाने और महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए मनरेगा से भी जोड़ा जा रहा है।