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नियम न प्रोटोकॉल, कोरोना का घर बन न जाए अस्पताल

Wed, 23 Jun 2021 08:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 08:24 PM IST
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Rules nor protocols, the hospital should not become the home of Corona
गोंडा के जिला अस्पताल में कोरोना जांच कराने वालों की लगी लाइन। - फोटो : GONDA
गोंडा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जिले को राहत जरूर मिली है लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते संक्रमण को फिर से वापसी का न्योता दिया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों का ओपीडी पर्चा देने से पहले कोरोना जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया। लेकिन कोरोना जांच के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कोई नियम नहीं बनाया गया।
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कोरोना जांच के लिए हर रोज दूर-दराज से आए मरीजों व उनके तीमारदारों को हजारों लोगों के भीड़ में घंटों तक कसरत करना पड़ रहा है। आलम ये है कि यदि भीड़ में कोई एक व्यक्ति भी संक्रमित हुआ तो भीड़ का हिस्सा बने हजारों लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा।
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बुधवार को सैकड़ों मरीजों व तीमारदारों की लंबी कतार दिखी। दूसरे जिले में तैनात एक दारोगा ने डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा काउंटर पर लाइन लगाया। बड़ी मसक्कत के बाद करीब 11 बजे जब उनका नंबर आया तो बताया गया कि पर्चा कोविड जांच के बाद ही दिया जाएगा।
उन्होंने कोविड जांच के लिए लाइन लगाया और दोपहर दो बजे तक उनका नंबर नहीं आया। तब तक डॉक्टर उठ कर चले गए। इसी तरह कई अन्य मरीजों की व्यथा देखने को मिली।
जिला अस्पताल में शासन ने भले ही ओपीडी शुरू कर दी है लेकिन उन्हें दिखाने के लिए दो से तीन दिन तक लग रहे हैं। विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर जब मरीज पर्चा काउंटर पर पहुंचता है तो उसे कोविड जांच कराना अनिवार्य करना डाक्टरों से दूर करना हो गया है।
डॉक्टर को दिखाने के लिए जब यही मरीज उनके आवास पर जाते हैं तो डॉक्टर बिना किसी जांच के ही मरीजों को देखने का काम करते हैं, लेकिन मरीज को जेब ढीली करनी पड़ती है। जिला अस्पताल प्रशासन के इस रवैये से डाक्टर से परामर्श लेना या दिखाना किसी भी के लिए आसान नहीं है।
कोरोना नियमों का पालन न किए जाने से लोगों को बीमारियों से निजात दिलाने वाला अस्पताल कोरोना का घर बन सकता है। संक्रमण के डर से बेपरवाह लोग सैकड़ों की भीड़ में अपनी बारी के लिए धक्का मुक्की करने में लगे हैं तो अस्पताल प्रशासन मूक बधिर बनकर बैठा है।

जांच के लिए न तो लाइन लगवाई गई है न ही कोई सुरक्षाकर्मी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए उपस्थित रहा। भीड़ में हर कोई पहले जांच कराने के लिए मसक्कत करते दिखा।
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