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आरटीओ को छह माह में नौ करोड़ का नुकसान
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गोंडा। कोरोना वायरस के संक्रमण से सरकारी हों या फिर गैर सरकारी सभी प्रकार के संस्थानों में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है। लेकिन जिले में सबसे अधिक हालात अगर खराब हुए हैं तो वो परिवहन विभाग के हुए हैं। राजस्व की मार सबसे अधिक परिवहन विभाग को ही झेलनी पड़ रही है।
विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते छह महीने में लगभग नौ करोड़ रुपये का घाटा परिवहन विभाग को हो चुका है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कोरोना वायरस के संक्रमण में सभी कार्यों पर लगने वाली रोक को माना जा रहा है।
20 मार्च के बाद से परिवहन विभाग मेें सभी प्रकार के कार्यों पर लगभग डेढ़ से दो महीने की रोक लग गई थी। इसके बाद परमिट का काम शुरू किया गया। लगभग एक महीने बाद से लाइसेंस का भी काम शुरू हुआ लेकिन सभी कागजात जो कि 1 फरवरी के बाद समाप्त होने वाले थे उनकी वैधता बढ़ा दी गई।
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पहले जून, फिर सितंबर और फिर बाद में दिसंबर तक वैधता को बढ़ा दिया गया। जिससे लगातार परिवहन विभाग पर राजस्व की चोट बढ़ती गई है। अब हाल ये है कि कोरोना संक्रमण के साथ बीते 6 महीने में विभाग को लगभग 9 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा है।
पहले आय थी 4 करोड़ और अब डेढ़ से पौने 2 करोड़
कोरोना संक्रमण से पहले परिवहन विभाग को एक महीने में लगभग 4 करोड़ की आय होती थी। जो कि अब घटकर केवल डेढ़ से पौने दो करोड़ रूपये रह गई है। सबसे बड़ा झटका रोड टैक्स और पंजीकरण न होने से लगा है। जिससे राजस्व में तेजी से गिरावट आ गई है। जिससे हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ का घाटा आरटीओ को सहना पड़ रहा है।
अब केवल 17 से 18 सौ वाहनों का ही पंजीकरण
पहले जहां आम दिनों में लगभग 4 हजार से 5 हजार वाहनों का पंजीकरण हर महीने होता था। लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन के बाद जब फिर वाहनों का पंजीकरण शुरू हुआ तो अब केवल 17 सौ से 18 सौ के बीच ही वाहनों का पंजीकरण होता है। जिससे रजिस्ट्रेशन से होने वाली आमदनी पर भी खासा असर पड़ा है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बता ये है कि चौपहिया वाहनों की बिक्री अब काफी हद तक कम हो गई है।
लाइसेंस के स्लाट भी हो गये हैं आधे
परमानेंट और लर्निंग लाइसेंस के लिए जो भी स्लाट निर्धारित थे वो अब पहले के मुकाबले आधे हो गये हैं जिससे लाइसेंस के आवेदनों से होने वाली राजस्व की प्राप्ति भी कम हो गई है। लोगों का लर्निंग लाइसेंस के लिए अब दो महीने से अधिक समय के लिए वेटिंग मिल रही है।
लॉकडाउन के असर से परिवहन विभाग के राजस्व पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। सबसे अधिक प्रभावित वाहनों की बिक्री हुई है। चौपहिया वाहनों और कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री से आमदनी सबसे अधिक होती थी लेकिन अब इन वाहनों बहुत अधिक घट गई है। अब केवल दो पहिया वाहनों की बिक्री के भरोसे ही रहना पड़ा रहा है। दीपावली से कुछ उम्मीदें विभाग को हैं कि कुछ राजस्व बढ़ेगा।
- संजीव कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते छह महीने में लगभग नौ करोड़ रुपये का घाटा परिवहन विभाग को हो चुका है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कोरोना वायरस के संक्रमण में सभी कार्यों पर लगने वाली रोक को माना जा रहा है।
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20 मार्च के बाद से परिवहन विभाग मेें सभी प्रकार के कार्यों पर लगभग डेढ़ से दो महीने की रोक लग गई थी। इसके बाद परमिट का काम शुरू किया गया। लगभग एक महीने बाद से लाइसेंस का भी काम शुरू हुआ लेकिन सभी कागजात जो कि 1 फरवरी के बाद समाप्त होने वाले थे उनकी वैधता बढ़ा दी गई।
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पहले जून, फिर सितंबर और फिर बाद में दिसंबर तक वैधता को बढ़ा दिया गया। जिससे लगातार परिवहन विभाग पर राजस्व की चोट बढ़ती गई है। अब हाल ये है कि कोरोना संक्रमण के साथ बीते 6 महीने में विभाग को लगभग 9 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा है।
पहले आय थी 4 करोड़ और अब डेढ़ से पौने 2 करोड़
कोरोना संक्रमण से पहले परिवहन विभाग को एक महीने में लगभग 4 करोड़ की आय होती थी। जो कि अब घटकर केवल डेढ़ से पौने दो करोड़ रूपये रह गई है। सबसे बड़ा झटका रोड टैक्स और पंजीकरण न होने से लगा है। जिससे राजस्व में तेजी से गिरावट आ गई है। जिससे हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ का घाटा आरटीओ को सहना पड़ रहा है।
अब केवल 17 से 18 सौ वाहनों का ही पंजीकरण
पहले जहां आम दिनों में लगभग 4 हजार से 5 हजार वाहनों का पंजीकरण हर महीने होता था। लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन के बाद जब फिर वाहनों का पंजीकरण शुरू हुआ तो अब केवल 17 सौ से 18 सौ के बीच ही वाहनों का पंजीकरण होता है। जिससे रजिस्ट्रेशन से होने वाली आमदनी पर भी खासा असर पड़ा है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बता ये है कि चौपहिया वाहनों की बिक्री अब काफी हद तक कम हो गई है।
लाइसेंस के स्लाट भी हो गये हैं आधे
परमानेंट और लर्निंग लाइसेंस के लिए जो भी स्लाट निर्धारित थे वो अब पहले के मुकाबले आधे हो गये हैं जिससे लाइसेंस के आवेदनों से होने वाली राजस्व की प्राप्ति भी कम हो गई है। लोगों का लर्निंग लाइसेंस के लिए अब दो महीने से अधिक समय के लिए वेटिंग मिल रही है।
लॉकडाउन के असर से परिवहन विभाग के राजस्व पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। सबसे अधिक प्रभावित वाहनों की बिक्री हुई है। चौपहिया वाहनों और कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री से आमदनी सबसे अधिक होती थी लेकिन अब इन वाहनों बहुत अधिक घट गई है। अब केवल दो पहिया वाहनों की बिक्री के भरोसे ही रहना पड़ा रहा है। दीपावली से कुछ उम्मीदें विभाग को हैं कि कुछ राजस्व बढ़ेगा।
- संजीव कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन