{"_id":"62bc98db9a975876505b1ea3","slug":"report-fraud-ambulance-inquiry-gonda-news-lko637424390","type":"story","status":"publish","title_hn":"एंबुलेंस का फेरा परखने को घर पहुंचेगी टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एंबुलेंस का फेरा परखने को घर पहुंचेगी टीम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। एंबुलेंस सेवा से फर्जी फेरे का खेल करने के मामले की जांच ने अब तेजी पकड़ ली है। इस पूरे मामले की जांच सीएचसी पर चिकित्साधिकारियों एवं जिला महिला अस्पताल में एसीएमओ की निगरानी में चल रही है। इसके लिए एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने वाले लाभार्थियों के घरों पर जाकर जांच टीम साक्ष्य जुटाने में लगी है। फोन पर उचित रिस्पांस न मिलने के कारण ही जांच टीम ने सत्यापन की इस कवायद को शुरू किया है।
मरीजों व गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने तथा प्रसूताओं को घर छोड़ने के नाम पर एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से फेरों की संख्या में जमकर मनमानी बरती गयी। इसका खुलासा होने पर अब इस पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है। जांच टीम की ओर से जिले में करीब दो हजार से अधिक लाभार्थियों को फोन कर एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने अथवा न लेने की जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया। इस दौरान अधिकांश नंबर या तो मिले नहीं और मिले भी आउट ऑफ सर्विस पाए गए। इतना ही नहीं, एक ही मोबाइल नंबर पर कई लाभार्थियों के नाम दस्तावेजों की जांच में सामने आए।
इसके दृष्टिगत ही पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मेें लगे अधिकारियों की ओर से अस्पताल के बीएसटी में दर्ज लाभार्थी के पते पर जाकर एंबुलेंस सेवा का लाभ पाने का सत्यापन किया जाएगा। एसीएमओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही इसकी जांच रिपोर्ट अपर निदेशक स्वास्थ्य को सौंपी जाएगी। जिन लाभार्थियों का फोन नहीं मिल रहा था, उनसे संपर्क करने के लिए उनके पते पर जाकर मोबाइल नंबर व आधार नंबर को अस्पताल में दर्ज रिकार्ड से मिलान कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मरीजों व गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने तथा प्रसूताओं को घर छोड़ने के नाम पर एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से फेरों की संख्या में जमकर मनमानी बरती गयी। इसका खुलासा होने पर अब इस पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है। जांच टीम की ओर से जिले में करीब दो हजार से अधिक लाभार्थियों को फोन कर एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने अथवा न लेने की जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया। इस दौरान अधिकांश नंबर या तो मिले नहीं और मिले भी आउट ऑफ सर्विस पाए गए। इतना ही नहीं, एक ही मोबाइल नंबर पर कई लाभार्थियों के नाम दस्तावेजों की जांच में सामने आए।
विज्ञापन
इसके दृष्टिगत ही पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मेें लगे अधिकारियों की ओर से अस्पताल के बीएसटी में दर्ज लाभार्थी के पते पर जाकर एंबुलेंस सेवा का लाभ पाने का सत्यापन किया जाएगा। एसीएमओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही इसकी जांच रिपोर्ट अपर निदेशक स्वास्थ्य को सौंपी जाएगी। जिन लाभार्थियों का फोन नहीं मिल रहा था, उनसे संपर्क करने के लिए उनके पते पर जाकर मोबाइल नंबर व आधार नंबर को अस्पताल में दर्ज रिकार्ड से मिलान कराया जा रहा है।
विज्ञापन