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समाज बदलने व बेटी को इंसाफ दिलाने को उठाई आवाज
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गोंडा में फौव्वारा चौराहे पर हैदराबाद गैंग रेप कांड के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं।
- फोटो : GONDA
गोंडा। हैदराबाद में एक महिला पशु चिकित्सक के साथ हुए दुष्कर्म से आहत बेटियों ने रविवार को अपनी आवाज को बुलंद किया। बेटियों व महिलाओं ने एकत्र होकर गुरुनानक चौराहे पर प्रदर्शन किया और तख्तियों पर स्लोगन लिखकर दुष्कर्म व हत्या जैसे जघन्य अपराध रोकने की मांग उठाई।
महिलाओं ने कहा कि क्या ऐसे अपराधों पर अंकुश नहीं लगेगा। क्या बेटियां घर से बाहर निकलना बंद कर दें। दुष्कर्म के खिलाफ एकजुट होकर महिलाओं ने समाज को बदलने और सरकार को ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की नसीहत दिया। महिला और पशु अधिकार कार्यकर्ता रुसी दूबे द्वारा अकेले खड़े होकर शुरू किए गए इस प्रदर्शन में एक-एक कर चौराहे से गुजर रही महिलाएं और पुरुष जुड़ते गए और देखते ही देखते पूरा कारवां बन गया।
रुसी ने कहा कि आज मां-बाप अपनी बेटियों को कहते हैं कि अंधेरे में घर से बाहर न निकलो, सुनसान में मत जाओ। समाज में ऐसे कौन से लोग हैं जिनसे लोग इतना डरते हैं? अगर कानून प्रभावी है तो लोग इतना क्यों डरते हैं? छात्रा आस्था द्विवेदी ने कहा कि आज देश में हर 20 मिनट में एक दुष्कर्म हो रहा है, दरिंदगी बढ़ती जा रही है। तो क्या हम बेटियां घर से बाहर निकलना बंद कर दें ?
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किशलय तिवारी ने लोगों को अपने बेटों को मर्यादा सिखाने की नसीहत दी। नेत्री वंदना गुप्ता ने समाज को महिलाओं की सुरक्षा को जनांदोलन बनाने का आग्रह किया। वंदना लखवानी ने मां-बहन की गालियां देने व नशे की आदत को महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार का कारण बताया। दिव्यांशी ने सभी महिलाओं से एकजुट होकर महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज बनाने के लिए आंदोलन करने को कहा।
रुसी ने बताया कि उनका ये आंदोलन कल भी जारी रहेगा और समाज में महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा को पूरी तरह रोकने तक वे संघर्ष करती रहेंगी। इस मौके पर बीना राय, सिद्धि, सुमित्रा, शुभी कक्कर, अभिषेक दूबे, सिद्धार्थ शुक्ला, दिग्गी पांडेय, मनीष सिंह, राजू तिवारी, सचिन वर्मा, भानुप्रताप सिंह, अविनाश सिंह आदि मौजूद रहे।
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महिलाओं ने कहा कि क्या ऐसे अपराधों पर अंकुश नहीं लगेगा। क्या बेटियां घर से बाहर निकलना बंद कर दें। दुष्कर्म के खिलाफ एकजुट होकर महिलाओं ने समाज को बदलने और सरकार को ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की नसीहत दिया। महिला और पशु अधिकार कार्यकर्ता रुसी दूबे द्वारा अकेले खड़े होकर शुरू किए गए इस प्रदर्शन में एक-एक कर चौराहे से गुजर रही महिलाएं और पुरुष जुड़ते गए और देखते ही देखते पूरा कारवां बन गया।
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रुसी ने कहा कि आज मां-बाप अपनी बेटियों को कहते हैं कि अंधेरे में घर से बाहर न निकलो, सुनसान में मत जाओ। समाज में ऐसे कौन से लोग हैं जिनसे लोग इतना डरते हैं? अगर कानून प्रभावी है तो लोग इतना क्यों डरते हैं? छात्रा आस्था द्विवेदी ने कहा कि आज देश में हर 20 मिनट में एक दुष्कर्म हो रहा है, दरिंदगी बढ़ती जा रही है। तो क्या हम बेटियां घर से बाहर निकलना बंद कर दें ?
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किशलय तिवारी ने लोगों को अपने बेटों को मर्यादा सिखाने की नसीहत दी। नेत्री वंदना गुप्ता ने समाज को महिलाओं की सुरक्षा को जनांदोलन बनाने का आग्रह किया। वंदना लखवानी ने मां-बहन की गालियां देने व नशे की आदत को महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार का कारण बताया। दिव्यांशी ने सभी महिलाओं से एकजुट होकर महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज बनाने के लिए आंदोलन करने को कहा।
रुसी ने बताया कि उनका ये आंदोलन कल भी जारी रहेगा और समाज में महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा को पूरी तरह रोकने तक वे संघर्ष करती रहेंगी। इस मौके पर बीना राय, सिद्धि, सुमित्रा, शुभी कक्कर, अभिषेक दूबे, सिद्धार्थ शुक्ला, दिग्गी पांडेय, मनीष सिंह, राजू तिवारी, सचिन वर्मा, भानुप्रताप सिंह, अविनाश सिंह आदि मौजूद रहे।