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Gonda News: प्रधानमंत्री मोदी ने की गोंडा के डॉल्फिन रेस्क्यू की सराहना
Mon, 01 Jun 2026 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:45 PM IST
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बलरामपुर के ईटाई रामपुर में गंगा डॉल्पफन रेस्क्यू अभियान चलाते वन विभाग के अधिकारी। स्रोत:
- फोटो : अमर उजाला/संवाद
गोंडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में गोंडा वन प्रभाग में हुए गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू का उल्लेख कर गोंडा-बलरामपुर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने एक्स पर भी इस सफल रेस्क्यू का वीडियो साझा किया। प्रधानमंत्री से सराहना मिलने के बाद वन विभाग और रेस्क्यू से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों में उत्साह है।
यह मामला गोंडा वन प्रभाग के बलरामपुर के रेहरा बाजार रेंज अंतर्गत ग्रामसभा ईटई रामपुर का है। डीएफओ अनुराग प्रियदर्शी ने बताया कि दो मई को सरयू नहर खंड-चार में एक नर गंगा डॉल्फिन के फंसे होने की सूचना वन विभाग को मिली थी। नहर में पानी का स्तर कम होने के कारण डॉल्फिन आगे नहीं बढ़ पा रही थी और उसके जीवन पर खतरा मंडरा रहा था।
सूचना मिलते ही वन विभाग, टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों से डॉल्फिन को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद शुरू हुए रेस्क्यू में टीम ने करीब 13 घंटे तक लगातार मेहनत की। डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने के बाद विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच राप्ती नदी में छोड़ा गया। रेस्क्यू की गई डॉल्फिन का वजन 26.4 किलोग्राम और लंबाई लगभग 5.3 फीट थी। विशेषज्ञों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
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गोंडा वृत्त के वन संरक्षक डाॅ. एम सेम्मारन ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में इस अभियान का उल्लेख किया जाना जिले और वन विभाग के लिए गौरव की बात है। इससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही टीमों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा कि गंगा डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है। इसके संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
पहली डॉल्फिन एंबुलेंस बनी अभियान की ताकत
रेस्क्यू में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की विशेष डॉल्फिन एंबुलेंस का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह देश की पहली ऐसी अत्याधुनिक एंबुलेंस है, जिसे जनवरी 2026 में शुरू किया गया था। एंबुलेंस में डॉल्फिन के उपचार, निगरानी और सुरक्षित परिवहन की पूरी व्यवस्था है। टीएसए के प्रतिनिधि भास्कर दीक्षित ने बताया कि यह एंबुलेंस एक चलती-फिरती आईसीयू की तरह कार्य करती है। इसमें आवश्यक मेडिकल उपकरण, निगरानी प्रणाली और आपातकालीन उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
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यह मामला गोंडा वन प्रभाग के बलरामपुर के रेहरा बाजार रेंज अंतर्गत ग्रामसभा ईटई रामपुर का है। डीएफओ अनुराग प्रियदर्शी ने बताया कि दो मई को सरयू नहर खंड-चार में एक नर गंगा डॉल्फिन के फंसे होने की सूचना वन विभाग को मिली थी। नहर में पानी का स्तर कम होने के कारण डॉल्फिन आगे नहीं बढ़ पा रही थी और उसके जीवन पर खतरा मंडरा रहा था।
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सूचना मिलते ही वन विभाग, टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों से डॉल्फिन को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद शुरू हुए रेस्क्यू में टीम ने करीब 13 घंटे तक लगातार मेहनत की। डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने के बाद विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच राप्ती नदी में छोड़ा गया। रेस्क्यू की गई डॉल्फिन का वजन 26.4 किलोग्राम और लंबाई लगभग 5.3 फीट थी। विशेषज्ञों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
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गोंडा वृत्त के वन संरक्षक डाॅ. एम सेम्मारन ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में इस अभियान का उल्लेख किया जाना जिले और वन विभाग के लिए गौरव की बात है। इससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही टीमों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा कि गंगा डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है। इसके संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
पहली डॉल्फिन एंबुलेंस बनी अभियान की ताकत
रेस्क्यू में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की विशेष डॉल्फिन एंबुलेंस का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह देश की पहली ऐसी अत्याधुनिक एंबुलेंस है, जिसे जनवरी 2026 में शुरू किया गया था। एंबुलेंस में डॉल्फिन के उपचार, निगरानी और सुरक्षित परिवहन की पूरी व्यवस्था है। टीएसए के प्रतिनिधि भास्कर दीक्षित ने बताया कि यह एंबुलेंस एक चलती-फिरती आईसीयू की तरह कार्य करती है। इसमें आवश्यक मेडिकल उपकरण, निगरानी प्रणाली और आपातकालीन उपचार की सुविधा उपलब्ध है।