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एफआईआर निरस्त करने की याचिका खारिज
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गोंडा। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने नगर कोतवाली क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार कर दो बार भूमि का बैनामा कराने के मामले में आरोपी की एफआईआर निरस्त करने की याचिका खारिज कर दी है।
कोतवाली नगर के ग्राम पथवलिया निवासी साधु सरन शुक्ल ने देवीपाटन परिक्षेत्र के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल को प्रार्थनापत्र देकर कहा कि ग्राम पथवलिया स्थित स्वामी विवेकानंद मंदिर विद्यालय की 13 डिस्मिल जमीन को रामप्रकाश शुक्ल ने बृजेश कुमार अवस्थी के साथ साजिश करके 11 जुलाई 2008 को फर्जी कागजात तैयार कर पुष्पा देवी पत्नी हरीराम मोदी निवासी 174 ददुवा बाजार के पक्ष में बैनामा कर दिया।
इसका केस अपर सिविल जज सप्तम जूनियर डिवीजन की अदालत में विचाराधीन है। इसके बाद इन लोगों ने पुन: इसी जमीन का बैनामा नगीना देवी पत्नी अशोक कुमार निवासी पूरे तिवारीपुरवा कोतवाली करनैलगंज के नाम करा दिया।
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साधु सरन शुक्ल के प्रार्थनापत्र पर डीआईजी के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने बृजेश कुमार अवस्थी व चार अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया। इस मामले में आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर अधिवक्ता होने का हवाला देते हुए एफआईआर निरस्त करने की याचना की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति सरोज यादव ने एफआईआर का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध प्राथमिकी में आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास भी है, ऐसे में इस मामले में रिट याचिका खारिज की जाती है।
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कोतवाली नगर के ग्राम पथवलिया निवासी साधु सरन शुक्ल ने देवीपाटन परिक्षेत्र के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल को प्रार्थनापत्र देकर कहा कि ग्राम पथवलिया स्थित स्वामी विवेकानंद मंदिर विद्यालय की 13 डिस्मिल जमीन को रामप्रकाश शुक्ल ने बृजेश कुमार अवस्थी के साथ साजिश करके 11 जुलाई 2008 को फर्जी कागजात तैयार कर पुष्पा देवी पत्नी हरीराम मोदी निवासी 174 ददुवा बाजार के पक्ष में बैनामा कर दिया।
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इसका केस अपर सिविल जज सप्तम जूनियर डिवीजन की अदालत में विचाराधीन है। इसके बाद इन लोगों ने पुन: इसी जमीन का बैनामा नगीना देवी पत्नी अशोक कुमार निवासी पूरे तिवारीपुरवा कोतवाली करनैलगंज के नाम करा दिया।
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साधु सरन शुक्ल के प्रार्थनापत्र पर डीआईजी के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने बृजेश कुमार अवस्थी व चार अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया। इस मामले में आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर अधिवक्ता होने का हवाला देते हुए एफआईआर निरस्त करने की याचना की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति सरोज यादव ने एफआईआर का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध प्राथमिकी में आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास भी है, ऐसे में इस मामले में रिट याचिका खारिज की जाती है।