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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   people are longing for rural infrastructure in Lohia Villages

लोहिया गांवों में बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग

Wed, 16 Dec 2015 10:36 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 16 Dec 2015 10:36 PM IST
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मंशा तो थी अंबेडकर गांवों की तर्ज पर डॉ. राममनोहर लोहिया गांवों को एक आदर्श गांव बनाने की, लेकिन प्रदेश सरकार के इस सपने को सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारियों के तवज्जो न देने से उसकी यह मंशा धरी की धरी रह गई। सत्ता में आने के बाद वर्ष 2012-13 से अब तक जिले में कुल 142 गांवों का चयन प्रदेश सरकार की तरफ से समग्र गांव योजना में किया गया है।
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जिसमें से वर्ष 2014-15 तक चयनित 105 समग्र गांव, सरकारी अभिलेखों में पूरी तरह से संतृप्त होने के बाद भी बदहाली की दास्तां बयां कर रहे हैं। जहां एकमात्र मुख्य समग्र गांव को छोड़ उसके मजरों तक आने-जाने के लिए न तो कोई पक्की सड़क है न ही सीसी रोड। बिजली से लेकर पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी गांव वालों को मयस्सर नहीं हो पा रही हैं।
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समग्र गांव के नाते शौचालय से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं का गांव में कोई अता-पता ही नहीं है। अब जब मुख्य सचिव के निर्देश पर शासन में बैठे प्रमुख सचिवों की टीम इन गांवों के हुए विकास का पता लगाने आ रही है तो स्थानीय अधिकारियों की भागदौड़ भी तेज हो गई है।
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केस-एक
विकासखंड-झंझरी, समग्र गांव-भगहर बुलंद
वर्ष 20012-13 में चयनित लोहिया समग्र गांव भगहर बुलंद की कुल आबादी जहां 6 हजार है तो वहीं वोटरों की संख्या 26 सौ के करीब। मुख्य गांव भगहर बुलंद आधा विद्युतीकृत है। जबकि भगहरबुलंद अंतर्गत आने वाले 17 गांवों में से 11 गांवों, पिढ़ैया, मुन्नागांव, बिजलीभवानी टेपरा, कोरिन टेपरा, घोलिया, खालेपुरवा, खलहनगांव, मिश्रनगांव, जनेउनगांव व बड़कईयनगांव में बिजली ही नहीं है। लालापुरवा गांव का ट्रांसफार्मर काफी समय से खराब पड़ा है। भगहर बुलंद गांव में जहां पानी की बड़ी समस्या है। तो वहीं इस गांव के अंतर्गत आने वाले मजरों में न तो खड़ंजा है न ही सीसी रोड। तमाम लोगों के घरों के बाहर बने शौचालय निष्प्रयोज्य और आधे-अधूरे पड़े हैं। जिसमें लोग उपले रखते हैं। गांव को जोड़ने वाले तमाम रास्ते आज भी पगडंडियों से होकर जाते हैं।
फोटो-20

विकासखंड परसपुर, समग्र गांव-सालपुर धौताल
तीन साल पहले वर्ष 2012-13 में समग्र ग्राम में चयनित सालपुर धौताल गांव की स्थिति जैसे आजादी के पहले थी वैसी ही आज भी है। विकास के नाम पर यहां एकमात्र परसपुर रोड से मुख्य गांव को जोड़ने वाली सड़क के सिवाय कुछ भी नहीं है। गांव की तीन हजार आबादी अलग-अलग 8 मजरों में बसी है। जिसमें 17 सौ वोटर हैं। बावजूद इसके मुख्य गांव को छोड़ न तो कहीं सड़क है न ही खड़ंजा। नंदकुमार पुरवा और मुख्य गांव सालपुर को छोड़ दिया जाए तो कोई भी गांव विद्युतीकरण से भी संतृप्त नहीं है। अवस्थीपुरवा में लोग आज भी ट्यूबवेल के कनेक्शन से घरों की बिजली जला रहे हैं। गांव में गंदगी से लेकर कोटेदार के गल्ला न बांटने की शिकायत हर कोई करता है। वहीं शौचालय की केवल दीवार भर उठी है। जो किसी काम के नहीं हैं।

विकासखंड-बेलसर, समग्र गांव-मुजेड़
17 सौ के करीब आबादी वाले मुजेड़ समग्र गांव के 8 पुरवों में बिजली का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है। इस गांव में 173 के करीब शौचालय बनाए जाने थे, जिसमें से केवल 75 शौचालय ही बन पाए, वह भी आधे-अधूरे, जिनका कोई उपयोग ही नहीं करता। जबकि 20 शौचालयों की अभी केवल नींव ही रखी गई है। इसके अलावा 70 शौचालय गांव में बने ही नहीं। गांव के 12 पुरवों में कुछ को छोड़ ज्यादातर गांवों में सिर्फ खड़ंजा ही लगा है। जबकि बीच गांव में लोगों को गंदगी और पगडंडियों से होकर ही आना-जाना होता है।

विकासखंड-इटियाथोक, समग्र गांव-फरेंदा कानूनगो
वर्ष 2013-14 में चयनित समग्र गांव फरेंदा कानूनगो में कुल तीन मजरे फरेंदा, फंरेंदी और पुरवा आते हैं। जहां गांव की 15 सौ के करीब आबादी रहती है। समग्रगांव में दो प्राथमिक और एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय तो है, लेकिन इसके शिक्षक कभी-कभार ही स्कूल आते हैं। जबकि छात्रों की उपस्थिति भी न के बराबर है। स्कूल में लगा हैंडपंप चार महीने से खराब पड़ा है। वहीं गांव में बने सवा सौ के करीब शौंचालयों में से 100 शौंचालय अधूरे होने के कारण निष्प्रयोज्य पड़े हैं। मुख्य गांव से मजरों को जोडने के लिए कोई सड़क ही नहीं है। जबकि जो इक्का-दुक्का सड़कें हैं भी उनका तारकोल तक गायब हो चुका है। सीसी रोड के नाम पर कुल 490 मीटर रोड बनी है। जबकि 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाली नाली का काम भी अधूरा पड़ा है। गांव में बिजली के खंभे न होने के कारण लोगों ने जैसे-तैसे केबिल से कनेक्शन ले रखा है। वहीं गांव की साफ-सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से पंगु है।


कभी झांकने नहीं आए सफाईकर्मी आज आ गई पूरी फौज
कल तक जिन गांवों में सफाईकर्मी कभी झांकने नहीं आते थे, बुधवार को उन गांवों में सुबह होते ही सफाईकर्मियों की पूरी फौज पहुंची हुई थी। विकासखंड परसपुर के समग्र गांव सालपुर धौताल पहुंचे एक दर्जन सफाईकर्मी सड़क किनारे से लेकर गांव के गली-कूचे में झाडू लगा रहे थे। वहीं भगहर बुलंद गांव पहुंचे सफाईकर्मी एक शौंचालय में लगे उपले (कंडो) के ढेरों को हटाकर उसे खाली कराने में लगे थे। जबकि विकासखंड इटियाथोक के समग्र गांव पहुंचे सीडीओ जयंत दीक्षित अपने सामने बैठकर गांव की साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करा रहे थे। इसी तरह समग्र गांव मुजेड़ में भी अधिकारियों की टीम अपनी मौजूदगी में गांव की साफ-सफाई व्यवस्था को मुकम्मल करने में जुटी थी।
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