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जिला अस्पताल में दलालों की दखल से मरीज परेशान
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गोंडा। कोरोना संकट के सात महीने बाद जिला अस्पताल में ओपीडी शुरू होने के साथ ही दलालों की पैठ भी गहरी हो गई है। गेट से लेकर चिकित्सकों की ओपीडी तक दलाल सक्रिय रहते हैं। मरीजों को दलाल गेट से ही समझाने से लगते हैं कि डॉक्टर को उनके घर पर दिखाएं और कार्ड देकर बताते हैं कि किस मेडिकल स्टोर से दवाएं लें।
ये भी दबाव बनाते हैं कि अस्पताल की दवा कारगर नहीं है और अस्पताल में दिखाने पर डॉक्टर बाहर से दवा नहीं लिखेंगे। इससे मरीज भ्रमित भी हो रहे हैं और परेशान भी हैं। कई बार विवाद भी हो चुका है और पुलिस तक भी मामला पहुंच चुका है। इसके बाद भी दलालों का दबदबा कायम है और मरीजों की सांस फूल रही है।
जिला अस्पताल में इस समय दवाओं की कमी होने की बात कही जा रही है। जिला अस्पताल के गेट पर ही मेडिकल स्टोर के दलाल पर्चा या कार्ड बांटते दिख जाएंगे। वह मरीजों को प्रभावित करते हैं और सरकारी दवा के बारे में गलतफहमी पैदा करते हैं। स्थिति ये है कि कोई मरीज यदि बात नहीं मानता है तो उसे डाक्टर के यहां दिखाने में नाकों चने चबाने पड़ते हैं।
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दलालों की डॉक्टरों से सीधी पकड़ है। जो मरीज दलालों की बात मानते हैं, उन्हें आसानी से डॉक्टर देख लेते हैं और दवा भी लिख देते हैं। सीधे पहुंच रहे मरीजों को बीपी जांच आदि कराने के बहाने टरका दिया जाता है। भीड़ होने पर जैसे-तैसे डॉक्टर के दरबार तक पहुुंच भी गए तो दोबारा जांच कराकर लौटने तक डॉक्टर का मिलना मुश्किल होता है। इस स्थिति से हर दिन मरीजों को दो-चार होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों का दलालों से गठजोड़ इस कदर है कि उनके घरों पर मरीजों को देखने की बाकायदा पूरी व्यवस्था रहती है। डॉक्टरों के निजी आवास के चारों तरफ मेडिकल स्टोर व जांच लैब खुले होते हैं और दो-चार दलाल डॉक्टर की ओपीडी कार्यालय के बाहर से लेकर उनके आवास तक जमे रहते हैं। मरीजों की जांच क्या होनी है? ये डॉक्टर नहीं दलाल ही तय करते हैं और मरीजों की अच्छी खासी रकम खर्च करा लेते हैं। ओपीडी में भले ही डॉक्टर के पास संसाधन न हों लेकिन उनके आवास हर तरह की सुविधा उपलब्ध रहती है।
जिला अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्य जांच की लैबों की भरमार है। गलियों तक में एक-एक कमरे में लोग लाखों रुपये की दवाएं रखे हैं। कई प्रतिबंधित दवाइयां भी रखी जाती हैं। मानक के विपरीत मेडिकल स्टोरों का संचालन हो रहा है। इतने मेडिकल स्टोर खुल चुके हैं कि उनका रिकार्ड विभाग के पास भी नहीं है। गालियों में खुले मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाएं हैं जो महंगी होती हैं। इसमें बड़े स्तर पर कमीशन का खेल होता है जो डॉक्टर तक सीधे जाता है। 100 से अधिक दलालों से अस्पताल के आसपास का इलाका गुलजार रहता है।
अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा डॉ. आनंद ओझा ने बताया कि जिला अस्पताल में दलालों के सक्रिय होने की सूचना मिली है। इसकी गोपनीय जांच कराई जाएगी। जो भी दलाली करता मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। चिकित्सकों को पहले ही चेतावनी दी गई है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
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ये भी दबाव बनाते हैं कि अस्पताल की दवा कारगर नहीं है और अस्पताल में दिखाने पर डॉक्टर बाहर से दवा नहीं लिखेंगे। इससे मरीज भ्रमित भी हो रहे हैं और परेशान भी हैं। कई बार विवाद भी हो चुका है और पुलिस तक भी मामला पहुंच चुका है। इसके बाद भी दलालों का दबदबा कायम है और मरीजों की सांस फूल रही है।
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जिला अस्पताल में इस समय दवाओं की कमी होने की बात कही जा रही है। जिला अस्पताल के गेट पर ही मेडिकल स्टोर के दलाल पर्चा या कार्ड बांटते दिख जाएंगे। वह मरीजों को प्रभावित करते हैं और सरकारी दवा के बारे में गलतफहमी पैदा करते हैं। स्थिति ये है कि कोई मरीज यदि बात नहीं मानता है तो उसे डाक्टर के यहां दिखाने में नाकों चने चबाने पड़ते हैं।
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दलालों की डॉक्टरों से सीधी पकड़ है। जो मरीज दलालों की बात मानते हैं, उन्हें आसानी से डॉक्टर देख लेते हैं और दवा भी लिख देते हैं। सीधे पहुंच रहे मरीजों को बीपी जांच आदि कराने के बहाने टरका दिया जाता है। भीड़ होने पर जैसे-तैसे डॉक्टर के दरबार तक पहुुंच भी गए तो दोबारा जांच कराकर लौटने तक डॉक्टर का मिलना मुश्किल होता है। इस स्थिति से हर दिन मरीजों को दो-चार होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों का दलालों से गठजोड़ इस कदर है कि उनके घरों पर मरीजों को देखने की बाकायदा पूरी व्यवस्था रहती है। डॉक्टरों के निजी आवास के चारों तरफ मेडिकल स्टोर व जांच लैब खुले होते हैं और दो-चार दलाल डॉक्टर की ओपीडी कार्यालय के बाहर से लेकर उनके आवास तक जमे रहते हैं। मरीजों की जांच क्या होनी है? ये डॉक्टर नहीं दलाल ही तय करते हैं और मरीजों की अच्छी खासी रकम खर्च करा लेते हैं। ओपीडी में भले ही डॉक्टर के पास संसाधन न हों लेकिन उनके आवास हर तरह की सुविधा उपलब्ध रहती है।
जिला अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्य जांच की लैबों की भरमार है। गलियों तक में एक-एक कमरे में लोग लाखों रुपये की दवाएं रखे हैं। कई प्रतिबंधित दवाइयां भी रखी जाती हैं। मानक के विपरीत मेडिकल स्टोरों का संचालन हो रहा है। इतने मेडिकल स्टोर खुल चुके हैं कि उनका रिकार्ड विभाग के पास भी नहीं है। गालियों में खुले मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाएं हैं जो महंगी होती हैं। इसमें बड़े स्तर पर कमीशन का खेल होता है जो डॉक्टर तक सीधे जाता है। 100 से अधिक दलालों से अस्पताल के आसपास का इलाका गुलजार रहता है।
अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा डॉ. आनंद ओझा ने बताया कि जिला अस्पताल में दलालों के सक्रिय होने की सूचना मिली है। इसकी गोपनीय जांच कराई जाएगी। जो भी दलाली करता मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। चिकित्सकों को पहले ही चेतावनी दी गई है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएंगे।