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अब गोंडा में होगा हीमोफीलिया का इलाज

गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 05 Jul 2015 12:07 AM IST
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पीजीआई से देवीपाटन व फैजाबाद मंडल के रजिस्टर्ड हीमोफीलिया मरीजों को अब अपने रोग के उपचार के लिए बार-बार लखनऊ की दौड़भाग नहीं करनी पड़ेगी। ऐसे मरीज रक्तस्राव की समस्या होने पर किसी भी वक्त गोंडा जिला अस्पताल में आकर फैक्टर-8 व 9 के इंजेक्शन लगवा सकते हैं।
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इसके लिए यहां इसकी सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है। सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि हीमोफीलिया के मरीजों का उपचार आसानी से हो, इसके लिए दोनों मंडलों में हीमोफीलिया के मरीज जिस समय इच्छा हो, यहां आकर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।


हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें चोट लगने पर खून का बहना बंद नहीं होता। अगर ज्यादा देर तक खून का बहना जारी रहा तो मरीज की जान भी जा सकती है। इस बीमारी की जांच व इलाज की सुविधा अभी तक केवल पीजीआई में ही थी।

इसका विस्तार करते हुए स्वास्थ्य निदेशालय ने इसके उपचार में लगने वाले फैक्टर-8 व 9 के इंजेक्शन की व्यवस्था गोंडा जिला अस्पताल में भी करा दी है। जहां देवीपाटन व फैजाबाद मंडल के हीमोफीलिया पीड़ित मरीज किसी भी वक्त जाकर इसका इंजेक्शन लगवा सकते हैं।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्त बताते हैं कि हीमोफीलिया के मरीजों की जांच केवल पीजीआई में ही होती है, जबकि अभी तक इसका इंजेक्शन भी वहीं लगा करता था। लेकिन बीते दिनों इसके इंजेक्शन की उपलब्धता जिला अस्पताल में कराते हुए इसके मरीजों के उपचार का जिम्मा जिला अस्पताल को सौंप दिया गया है।

यहां देवीपाटन व फैजाबाद मंडल में हीमोफीलिया से पीड़ित रजिस्टर्ड मरीज 24 घंटे में किसी भी समय आकर इसका इंजेक्शन लगवा सकता है। यही नहीं हीमोफीलिया की जांच के लिए भी स्वास्थ्य निदेशालय से उनकी वार्ता चल रही है। अगर मुमकिन हो जाता है, तो ऐसे मरीजों की जांच व उनके कार्ड बनाने की सुविधा भी जल्द यहां चालू करवा दी जाएगी। बता दें कि हीमोफीलिया का इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में इस इंजेक्शन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अस्पताल प्रशासन के पास इसकी कालाबाजारी पर अंकुश लगाना एक बड़ी चुनौती है।

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जो आमतौर पर पुरुषों में होती है और ट्रांसमिट होकर महिलाओं में आ जाती है। यह आनुवांशिक है। इसमें शरीर से बहने वाला खून जमता नहीं है। ऐसी स्थिति में कभी चोट लगने या घायल हो जाने पर खून का बहना जल्दी बंद नहीं होता।

डॉक्टरों के मुताबिक इस रोग का कारण शरीर में एक रक्त प्रोटीन की कमी होना है, जिसे क्लोटिंग फैक्टर कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता बहते हुए खून को थक्के के रूप में जमाकर उसे रोकना होता है। ज्यादातर मामलों में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की मौत अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हो जाती है।

यह बीमारी खून में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिन में खून को जल्द ही थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने पर खून का बहना बंद नहीं होता।

- शरीर में नीले निशान पड़ जाना।
- नाक से खून का बहना।
- आंखों में खून उतर आना।
- जोड़ों में सूजन।

जिला अस्पताल में मौजूदा समय फैक्टर-8 व 9 के कुल 20-20 इंजेक्शन उपलब्ध हैं। यह इंजेक्शन उन्हीं लोगों को लगाए जाने हैं, जिनका बीमारी की जांच के बाद पीजीआई से कार्ड बना है। जिले में अगर इस बीमारी से पीड़ित कोई ऐसा मरीज है, जिसका कार्ड नहीं बना है तो वह पीजीआई से कार्ड बनवाकर इसका लाभ उठा सकता है।
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