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फाइलों का निपटारा मात्र ही न्याय नहीं
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2015 10:22 PM IST
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अदालतों में फाइलों का निपटारा करना न्याय नहीं है। न्याय वह है, जिसे आम जनता दिल से स्वीकार करे और पीड़ित पक्ष भी उससे राहत महसूस करे। यह कार्य न्यायिक अधिकारी बेहतर तरीके से कर सकते हैं। यह बात शनिवार को सेवानिवृत्त हो रहे जनपद न्यायाधीश सीएम दीक्षित ने एसबीआई द्वारा वेंकटाचार्य स्वाभिमान क्लब में आयोजित अपने विदाई व सम्मान समारोह में के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में न्याय प्रणाली मंहगी होती जा रही है। भारी खर्च के कारण निम्न तथा मध्यम आय वर्ग के लोग उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय तक नहीं पहुंच सकते हैं। इसलिए निचले स्तर पर पीड़ित लोगों को न्याय प्रदान करने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कहा कि जिले में कानून का राज स्थापित करना भी न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए चाहिए कि हम कार्यपालिका को भी अपना सहयोगी समझें तथा कानून का राज स्थापित करने में उन्हें पूरा सहयोग दें।
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जिला जज ने कहा कि शातिर अपराधियों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा जमानत दिए जाने से गलत संदेश जाता है। हमें भ्रष्टाचार निवारण की दिशा में भी आगे बढ़कर काम करना चाहिए।
जिला जज ने जिलाधिकारी से अपील की कि वह बैंकों की सुरक्षा का ध्यान दें तथा उनकी समस्याओं का समाधान भी करें। साथ ही पुलिस को भी नसीहत दी कि वे ऐसा कार्य करें जिससे जनता को राहत महसूस हो।
जिलाधिकारी एके उपाध्याय ने कहा कि अल्प सेवाकाल के बावजूद जनपद न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सहयोग की जो सकारात्मक शुरुआत की है, उसके दूरगामी परिणाम आएंगे।
जिलाधिकारी समेत बैंक अधिकारियों व क्लब के पदाधिकारियों ने जिला जज को अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह इत्यादि प्रदान करते हुए सम्मानित किया।
समारोह को जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष श्याम लाल, अपर जिला जज प्रथम रामानंद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार, स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष माधवराज मिश्र, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार मिश्र, पूर्व अध्यक्ष जीपी मिश्र, कुंवर साहब, केके श्रीवास्तव आदि ने भी सम्बोधित किया। समारोह का संचालन राजेन्द्र सिंह खुराना एडवोकेट ने किया।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में न्याय प्रणाली मंहगी होती जा रही है। भारी खर्च के कारण निम्न तथा मध्यम आय वर्ग के लोग उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय तक नहीं पहुंच सकते हैं। इसलिए निचले स्तर पर पीड़ित लोगों को न्याय प्रदान करने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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कहा कि जिले में कानून का राज स्थापित करना भी न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए चाहिए कि हम कार्यपालिका को भी अपना सहयोगी समझें तथा कानून का राज स्थापित करने में उन्हें पूरा सहयोग दें।
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जिला जज ने कहा कि शातिर अपराधियों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा जमानत दिए जाने से गलत संदेश जाता है। हमें भ्रष्टाचार निवारण की दिशा में भी आगे बढ़कर काम करना चाहिए।
जिला जज ने जिलाधिकारी से अपील की कि वह बैंकों की सुरक्षा का ध्यान दें तथा उनकी समस्याओं का समाधान भी करें। साथ ही पुलिस को भी नसीहत दी कि वे ऐसा कार्य करें जिससे जनता को राहत महसूस हो।
जिलाधिकारी एके उपाध्याय ने कहा कि अल्प सेवाकाल के बावजूद जनपद न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सहयोग की जो सकारात्मक शुरुआत की है, उसके दूरगामी परिणाम आएंगे।
जिलाधिकारी समेत बैंक अधिकारियों व क्लब के पदाधिकारियों ने जिला जज को अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह इत्यादि प्रदान करते हुए सम्मानित किया।
समारोह को जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष श्याम लाल, अपर जिला जज प्रथम रामानंद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार, स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष माधवराज मिश्र, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार मिश्र, पूर्व अध्यक्ष जीपी मिश्र, कुंवर साहब, केके श्रीवास्तव आदि ने भी सम्बोधित किया। समारोह का संचालन राजेन्द्र सिंह खुराना एडवोकेट ने किया।