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Gonda News: बाढ़ और कटान रोकने के उपाय नहीं, तैयारियां ठंडे बस्ते में
Fri, 07 Mar 2025 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 07 Mar 2025 11:05 PM IST
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करनैलगंज के चंदापुर किटौली के पास बाढ़ के दौरान कटान रोकने को किया गया था उपाय। फाइल फोटो
करनैलगंज (गोंडा)। एल्गिन चरसड़ी बांध पर ग्राम बहुवन मदार मांझा के पास अतिसंवेदनशील हो चुके बांध की मरम्मत या कटान रोकने का कार्य ठप है। जून माह में नदी का जलस्तर बढ़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मगर अभी तक बचाव के उपाय नहीं शुरू हुए हैं।
बीते वर्ष बाढ़ के दौरान नदी कटान करते हुए अपनी धारा को बांध के नजदीक ले आई थी। उस समय बाढ़ का अंतिम चरण चल रहा था। उस समय बांध को बचाने की जद्दोजहद में आसपास के खेतों में लगी खड़ी फसल को काटकर खेतों के बीच रास्ता बनाने के बाद कटान रोकने के उपाय किए गए। जलस्तर कम हो जाने से बाढ़ को रोकना आसान हो गया था। मगर इस वर्ष नदी का जलस्तर बढ़ने पर सीधे नदी की धारा बांध के किनारे से बहना शुरू करेगी। जो बड़े खतरे का संकेत है।
ग्राम चंदापुर किटौली के पास दो साल पहले बांध की मजबूती का कार्य करा लिया गया था। अब वही स्थिति बहुवन मदार मांझा के पास की बन गई है। अभी तक वहां बांध की मजबूती, कटान रोकने के उपाय, स्पर व ठोकर का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
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चार बार कट चुका है बांध
एल्गिन चरसड़ी बांध वर्ष 2007 से 2014 तक चार बार कट चुका है। जहां कटान की नौबत आती है, वहीं मरम्मत व बचाव कार्य कराकर अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन कर लेते हैं। मगर पूरे बांध की मजबूती करने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। बांध कटने की स्थिति में करनैलगंज तहसील के परसपुर, करनैलगंज ब्लॉक की 64 ग्राम पंचायतों के 293 मजरे प्रभावित होते हैं। बांध का निर्माण होने बावजूद तीन ग्राम पंचायतों के 18 मजरे प्रतिवर्ष जलस्तर बढ़ने पर जलमग्न हो जाते हैं। इनमें ग्राम नकहरा के नौ मजरे, चंदापुर किटौली के चार मजरे तथा मांझा रायपुर के चार मजरे पूरी तरह बाढ़ की चपेट में होते हैं। यह सभी गांव बांध के अंदर हैं। जिन्हें प्रशासन अब तक बांध के बाहर विस्थापित नहीं कर सका है।
बरसात से पहले पूरा होगा काम
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि बहुवन मदार मांझा के पास स्पर व ठोकर बनाने के साथ ही बांध की मजबूती के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। कागजी खानापूर्ति पूरी होते ही कार्य शुरू कराया जाएगा, जो बाढ़ आने के पहले पूरा भी करा लिया जाएगा।
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बीते वर्ष बाढ़ के दौरान नदी कटान करते हुए अपनी धारा को बांध के नजदीक ले आई थी। उस समय बाढ़ का अंतिम चरण चल रहा था। उस समय बांध को बचाने की जद्दोजहद में आसपास के खेतों में लगी खड़ी फसल को काटकर खेतों के बीच रास्ता बनाने के बाद कटान रोकने के उपाय किए गए। जलस्तर कम हो जाने से बाढ़ को रोकना आसान हो गया था। मगर इस वर्ष नदी का जलस्तर बढ़ने पर सीधे नदी की धारा बांध के किनारे से बहना शुरू करेगी। जो बड़े खतरे का संकेत है।
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ग्राम चंदापुर किटौली के पास दो साल पहले बांध की मजबूती का कार्य करा लिया गया था। अब वही स्थिति बहुवन मदार मांझा के पास की बन गई है। अभी तक वहां बांध की मजबूती, कटान रोकने के उपाय, स्पर व ठोकर का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
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चार बार कट चुका है बांध
एल्गिन चरसड़ी बांध वर्ष 2007 से 2014 तक चार बार कट चुका है। जहां कटान की नौबत आती है, वहीं मरम्मत व बचाव कार्य कराकर अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन कर लेते हैं। मगर पूरे बांध की मजबूती करने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। बांध कटने की स्थिति में करनैलगंज तहसील के परसपुर, करनैलगंज ब्लॉक की 64 ग्राम पंचायतों के 293 मजरे प्रभावित होते हैं। बांध का निर्माण होने बावजूद तीन ग्राम पंचायतों के 18 मजरे प्रतिवर्ष जलस्तर बढ़ने पर जलमग्न हो जाते हैं। इनमें ग्राम नकहरा के नौ मजरे, चंदापुर किटौली के चार मजरे तथा मांझा रायपुर के चार मजरे पूरी तरह बाढ़ की चपेट में होते हैं। यह सभी गांव बांध के अंदर हैं। जिन्हें प्रशासन अब तक बांध के बाहर विस्थापित नहीं कर सका है।
बरसात से पहले पूरा होगा काम
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि बहुवन मदार मांझा के पास स्पर व ठोकर बनाने के साथ ही बांध की मजबूती के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। कागजी खानापूर्ति पूरी होते ही कार्य शुरू कराया जाएगा, जो बाढ़ आने के पहले पूरा भी करा लिया जाएगा।