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Gonda News: पढ़ाई के साथ कैरी बैग की छपाई कर भविष्य संवार रहीं निशा

Sun, 16 Mar 2025 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 16 Mar 2025 11:37 PM IST
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Nisha is shaping her future by printing carry bags along with her studies
गोंडा। आर्यनगर कस्बे की निशा कनौजिया पढ़ाई के साथ कैरी बैग की छपाई कर भविष्य संवार रही हैं। खुद के साथ ही परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गई हैं। कैरी बैग की छपाई से न सिर्फ उनकी व भाइयों की पढ़ाई पूरी हो रही है, बल्कि वह भाइयों को स्वरोजगार से भी जोड़ रही हैं। इस काम में उनके बड़े भाई महेश भी सहयोग कर रहे हैं।
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महेश बताते हैं कि कैरी बैग की छपाई से पहले शादी का कार्ड छापते थे। ऐसे में आसपास के लोगों तक ही सीमित थे। अब उनके पास मनकापुर, बाबागंज, धानेपुर, तरबगंज के साथ ही देवीपाटन मंडल के जिलों से भी आर्डर आ रहे हैं। ऐसे में भाई-बहन मिलकर काम को बखूबी निभा रहे हैं। हर महीने तीन से चार लाख का टर्नओवर है और कैरी बैग की छपाई से 50 से 60 हजार रुपये की बचत हो जाती है।
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महेश ने बताया कि निशा दो साल की थीं तभी वर्ष 2007 में पिता दीप नारायन का आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार में दो भाई व बहन थे। बुजुर्ग बाबा का सहयोग मिला तो किसी तरह से महेश की ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो पाई। निशा भी एलबीएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। भाई-बहन ने कैरी बैग की प्रिंटिंग में किस्मत आजमाई तो आर्थिक तंगी के चलते कारवां आगे नहीं बढ़ पाया। इस बीच उद्योग विभाग में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 12 लाख रुपये का लोन मिला तो छपाई के लिए मशीन लगाकर यूनिट स्थापित कर दी। खुद के साथ अन्य लोगों को भी इस काम से जोड़ा। भाई-बहन खुद के साथ ही अन्य को भी काम दे रहे हैं। वहीं, योजना के तहत तीन लाख रुपये का उन्हें अनुदान भी दिया गया। महेश बताते हैं कि कैरी बैग प्रिंटिंग से होने वाली आय से बैंक की किस्त देने के साथ ही परिवार का अच्छे से भरण-पोषण भी कर रहे हैं।
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पिता की मौत के बाद टूट गया था परिवार

महेश कुमार ने बताया कि पिता के आकस्मिक निधन से परिवार टूट गया था। आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। भाई-बहन छोटे-छोटे थे। बाबा ही मदद के लिए खड़े थे। ऐसे में बड़े होने के साथ ही खुद के पैरों पर खड़े होने की कोशिशें कीं। पहले शादी का कार्ड छापते थे, लेकिन किसी तरह से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। बहन निशा के कैरी बैग प्रिंटिंग के काम से परिवार को आर्थिक रूप से मजबूती मिली है। भाई बहन पढ़ाई कर रहे हैं। उनके इस काम में जिला उद्योग उपायुक्त बाबू राम के अलावा उद्यमी मित्र संदीप द्विवेदी और प्रथमा यूपी ग्रामीण बैक मैनेजर अंबुज मणि त्रिपाठी ने सहयोग किया है।

नारी सशक्तीकरण की मिसाल

जिला उद्योग उपायुक्त बाबू राम ने बताया कि निशा कन्नौजिया की सफलता सिर्फ उनकी अपनी जीत नहीं है, बल्कि यह हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सही मार्गदर्शन और सरकार की मदद मिले तो महिलाएं भी एक सफल उद्यमी बन सकती हैं।
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