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Gonda News: ट्रेन हादसे में इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही उजागर
Mon, 22 Jul 2024 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 22 Jul 2024 12:23 AM IST
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गोंडा। गोंडा-मनकापुर रेलखंड पर हुए चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन हादसे की जांच में कई वजह सामने आई हैं। छह सदस्यीय जांच टीम में से पांच अधिकारियों ने ट्रैक की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। एक अधिकारी ने रफ्तार तेज होने और अचानक ब्रेक लगाए जाने के कारण को प्रमुखता दी है। जांच में सबसे गंभीर लापरवाही इंजीनियरिंग विभाग की सामने आई है। वहीं, फॉरेंसिक जांच में नियमित निगरानी न होने से ट्रैक के कमजोर होने के संकेत मिले हैं।
बृहस्पतिवार को हुए ट्रेन हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई थी। 33 यात्री घायल हुए थे। हादसा ऐसा था कि एसी कोच की दो बोगियां ट्रैक से उतरकर पानी में पलट गई थीं। जबकि छह बोगियां ट्रैक से पलट गई थीं। अन्य बोगियां ट्रैक पर लटक गई थीं। हादसे के बाद रेलवे की टीमों ने प्रारंभिक जांच की, इसके साथ ही सीआरएस की जांच शुरू हुई।
विभागीय अधिकारियों की छह सदस्यीय संयुक्त टीम ने जांच में पाया कि ट्रैक की फास्टिंग (लाइन में लगे उपकरण) दुरुस्त नहीं थी और आईएमआर डिटेक्ट होने के बाद गाड़ी के कॉशन ऑर्डर मिलने के पूर्व तक साइड का प्रोटेक्शन नहीं किया गया। जिस कारण से ट्रेन पटरी से उतर गई।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक मोतीगंज-झिलाही रेलवे स्टेशन के बीच डाउन ट्रैक संख्या-638 पर कर्मचारियों ने नियमित निगरानी व देखभाल नहीं की। इस ट्रैक पर कई जगह खामियां मिली हैं। ट्रैक और स्लीपर के बीच लगने वाला यंत्र ठीक से कसा नहीं था। छह सदस्यीय संयुक्त जांच टीम में यातायात निरीक्षक जीसी श्रीवास्तव, चीफ लोको इंस्पेक्टर दिलीप कुमार, सीनियर सेक्शन इंजीनियर सिग्नल वेदप्रकाश मीणा, मनकापुर के आरपीएफ इंस्पेक्टर एस. राज, जूनियर इंजीनियर शिवम पांडेय एवं सीनियर सेक्शन इंजीनियर पुरुषोत्तम कुमार सिंह शामिल हैं। दूसरी तरफ इस संयुक्त जांच टीम के सदस्य सीनियर सेक्शन इंजीनियर व पीडब्ल्यूआई मनकापुर ने जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर न करके विरोध करते हुए अपनी आपत्ति को जोड़ा है।
ट्रेन के ड्राइवर त्रिभुवन नारायण ने जांच टीम को बताया कि मोतीगंज स्टेशन का होम सिग्नल पीला होने कारण ट्रेन 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, लेकिन ट्रेन जब मोतीगंज स्टेशन पहुंच रही थी और स्टार्टर लेट ऑफ होने के कारण ट्रेन रन थ्रू 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकाली। ट्रैक संख्या-638 किलोमीटर पर बड़ा झटका लगा और खड़खड़ाहट की आवाज आने लगी। बताया कि इंजन में लगे यंत्र बीपी प्रेशर कम (यह मशीन लोको में से ट्रेन के सबसे अंतिम कोच व ट्रेन मैनेजर यानी गार्ड के डिब्बे तक लगा होता है) होने पर बड़ी समस्या का संकेत मिलने पर इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद हादसे की जानकारी हुई।
चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे की वजह जानने के लिए रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। रेलवे की जांच टीमों को ट्रैक अपनी मौजूदा स्थिति से करीब चार फीट खिसका मिला। ट्रैक के पास पानी भरा था। इस वजह से ट्रैक कमजोर था। यही वजह है कि फॉरेंसिक टीम ने पटरी का लोहा और मिट्टी का सैंपल लिया। रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल के हालात देखने के बाद इस हादसे पर अपनी रिपोर्ट दी। अब रेल संरक्षा आयुक्त की जांच में विभागीय लोगों के बयान रविवार को दर्ज हुए हैं। जिसमें भी कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल रिपोर्ट तैयार होने के बाद बड़ा खुलासा होगा।
हादसे के बाद यह बात भी सामने आई जिसमें पटरी के तीन मीटर तक फैलाव के कारण पहिया उतरा था। इंजन निकलने के बाद यह स्थिति बनी। लोको पायलट को झटका लगा तो उसने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। इस पर ट्रेन चार सौ मीटर दूर जाकर रुकी। इससे 350 मीटर की दूरी तक ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रेन के बेपटरी होने के बाद करीब 3.07 मीटर का पटरी का टुकड़ा गायब मिला। डाउन ट्रैक के दाहिनी ओर पटरी फैली हुई मिली। इसका कारण वेल्डिंग पर दबाव होना बताया गया। इंजन के बाद जनरेटर पावर कार बेपटरी थी। इसकी डिस्क व्हील और सेकेंड्री डैंपर क्षतिग्रस्त मिला। ट्राॅली गिट्टियों में धंसी थी।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि संयुक्त रिपोर्ट में सभी लोगों द्वारा बिना सभी तथ्यों को देखे एकमत होकर रिपोर्ट बनाई गई है, जो कि बिल्कुल गलत है। संयुक्त रिपोर्ट से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने 11 बिंदुओं के आधार पर असहमति जताई। इसमें स्पीड मापने के पैमाने, मैकेनिकल की ओर से कोई मेजरमेंट नहीं देने और कॉमर्शियल की तरफ से पार्सल लोड की जानकारी देने पर सवाल उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह हादसा टोटली इंमप्राॅपर ब्रेकिंग के कारण हुआ है। पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने व्हील मेजरमेंट के बिना पहियों में बताई गई गड़बड़ी पर भी सवाल खड़ा किया है।
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बृहस्पतिवार को हुए ट्रेन हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई थी। 33 यात्री घायल हुए थे। हादसा ऐसा था कि एसी कोच की दो बोगियां ट्रैक से उतरकर पानी में पलट गई थीं। जबकि छह बोगियां ट्रैक से पलट गई थीं। अन्य बोगियां ट्रैक पर लटक गई थीं। हादसे के बाद रेलवे की टीमों ने प्रारंभिक जांच की, इसके साथ ही सीआरएस की जांच शुरू हुई।
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विभागीय अधिकारियों की छह सदस्यीय संयुक्त टीम ने जांच में पाया कि ट्रैक की फास्टिंग (लाइन में लगे उपकरण) दुरुस्त नहीं थी और आईएमआर डिटेक्ट होने के बाद गाड़ी के कॉशन ऑर्डर मिलने के पूर्व तक साइड का प्रोटेक्शन नहीं किया गया। जिस कारण से ट्रेन पटरी से उतर गई।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक मोतीगंज-झिलाही रेलवे स्टेशन के बीच डाउन ट्रैक संख्या-638 पर कर्मचारियों ने नियमित निगरानी व देखभाल नहीं की। इस ट्रैक पर कई जगह खामियां मिली हैं। ट्रैक और स्लीपर के बीच लगने वाला यंत्र ठीक से कसा नहीं था। छह सदस्यीय संयुक्त जांच टीम में यातायात निरीक्षक जीसी श्रीवास्तव, चीफ लोको इंस्पेक्टर दिलीप कुमार, सीनियर सेक्शन इंजीनियर सिग्नल वेदप्रकाश मीणा, मनकापुर के आरपीएफ इंस्पेक्टर एस. राज, जूनियर इंजीनियर शिवम पांडेय एवं सीनियर सेक्शन इंजीनियर पुरुषोत्तम कुमार सिंह शामिल हैं। दूसरी तरफ इस संयुक्त जांच टीम के सदस्य सीनियर सेक्शन इंजीनियर व पीडब्ल्यूआई मनकापुर ने जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर न करके विरोध करते हुए अपनी आपत्ति को जोड़ा है।
ट्रेन के ड्राइवर त्रिभुवन नारायण ने जांच टीम को बताया कि मोतीगंज स्टेशन का होम सिग्नल पीला होने कारण ट्रेन 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, लेकिन ट्रेन जब मोतीगंज स्टेशन पहुंच रही थी और स्टार्टर लेट ऑफ होने के कारण ट्रेन रन थ्रू 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकाली। ट्रैक संख्या-638 किलोमीटर पर बड़ा झटका लगा और खड़खड़ाहट की आवाज आने लगी। बताया कि इंजन में लगे यंत्र बीपी प्रेशर कम (यह मशीन लोको में से ट्रेन के सबसे अंतिम कोच व ट्रेन मैनेजर यानी गार्ड के डिब्बे तक लगा होता है) होने पर बड़ी समस्या का संकेत मिलने पर इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद हादसे की जानकारी हुई।
चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे की वजह जानने के लिए रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। रेलवे की जांच टीमों को ट्रैक अपनी मौजूदा स्थिति से करीब चार फीट खिसका मिला। ट्रैक के पास पानी भरा था। इस वजह से ट्रैक कमजोर था। यही वजह है कि फॉरेंसिक टीम ने पटरी का लोहा और मिट्टी का सैंपल लिया। रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल के हालात देखने के बाद इस हादसे पर अपनी रिपोर्ट दी। अब रेल संरक्षा आयुक्त की जांच में विभागीय लोगों के बयान रविवार को दर्ज हुए हैं। जिसमें भी कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल रिपोर्ट तैयार होने के बाद बड़ा खुलासा होगा।
हादसे के बाद यह बात भी सामने आई जिसमें पटरी के तीन मीटर तक फैलाव के कारण पहिया उतरा था। इंजन निकलने के बाद यह स्थिति बनी। लोको पायलट को झटका लगा तो उसने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। इस पर ट्रेन चार सौ मीटर दूर जाकर रुकी। इससे 350 मीटर की दूरी तक ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रेन के बेपटरी होने के बाद करीब 3.07 मीटर का पटरी का टुकड़ा गायब मिला। डाउन ट्रैक के दाहिनी ओर पटरी फैली हुई मिली। इसका कारण वेल्डिंग पर दबाव होना बताया गया। इंजन के बाद जनरेटर पावर कार बेपटरी थी। इसकी डिस्क व्हील और सेकेंड्री डैंपर क्षतिग्रस्त मिला। ट्राॅली गिट्टियों में धंसी थी।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि संयुक्त रिपोर्ट में सभी लोगों द्वारा बिना सभी तथ्यों को देखे एकमत होकर रिपोर्ट बनाई गई है, जो कि बिल्कुल गलत है। संयुक्त रिपोर्ट से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने 11 बिंदुओं के आधार पर असहमति जताई। इसमें स्पीड मापने के पैमाने, मैकेनिकल की ओर से कोई मेजरमेंट नहीं देने और कॉमर्शियल की तरफ से पार्सल लोड की जानकारी देने पर सवाल उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह हादसा टोटली इंमप्राॅपर ब्रेकिंग के कारण हुआ है। पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने व्हील मेजरमेंट के बिना पहियों में बताई गई गड़बड़ी पर भी सवाल खड़ा किया है।