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Gonda News: दूध-लावा चढ़ाकर पूजे जाएंगे नागदेव
Thu, 08 Aug 2024 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 08 Aug 2024 11:31 PM IST
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गोंडा। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर धूमधाम से नाग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। शुक्रवार को घरों में नाग देवता का पूजन कर उन्हें दूध व धान का लावा चढ़ाया जाएगा।
सर्पदोष से मुक्त होने के लिए शुक्रवार को नाग देवता की पूजा की जाएगी। घरों के प्रवेशद्वार पर गाय के गोबर से नाग व नागिन का चित्र बनाकर दूध व लावा चढ़ाया जाएगा। काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री के अनुसार नाग पंचमी को नाग देवता की पूजा करने से ग्रह व बाधाएं कट जाती हैं। इस दौरान घरों में गुझिया सहित अन्य पकवान बनाए जाएंगे। बच्चे तालाब के किनारे कपड़े की गुड़िया पीटेंगे।
कटरा बाजार में राजगढ़ के पास स्थित बांकी झील के पास स्थित नाग देवता के मंदिर पर मेले का आयोजन किया जाएगा। शिवलिंग व नाग देवता के विग्रह पर दूध व चना चढ़ाकर अर्घ्य दिया जाएगा। क्षेत्र के निवासी मधुवन ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पहले बारिश न होने से टेढ़ी नदी सूख गई थी। लेकिन बांकी झील तब भी नहीं सूखी थी। अहिरन पुरवा निवासी 95 वर्षीय मुनका देवी ने बताया कि लक्ष्मण जी की तपस्या के दौरान नाग पंचमी के दिन सरोवर से एक स्वर्ण नाव व स्वर्ण पात्र निकला था, जिसमें उन्होंने भोजन किया था। इसी के चलते बांकी झील को लक्ष्मण कुंड भी कहा जाता है। यहां कभी राजा पृथ्वी सिंह की रियासत थी, उन्होंने यहां बाग लगाए थे।
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पूजन का शुभ मुहूर्त
नाग पंचमी शुक्रवार को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से शुरू होकर रात आठ बजकर 26 मिनट तक है। दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से लेकर एक बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम छह बजकर 33 मिनट से रात आठ बजकर 20 मिनट तक है।
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सर्पदोष से मुक्त होने के लिए शुक्रवार को नाग देवता की पूजा की जाएगी। घरों के प्रवेशद्वार पर गाय के गोबर से नाग व नागिन का चित्र बनाकर दूध व लावा चढ़ाया जाएगा। काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री के अनुसार नाग पंचमी को नाग देवता की पूजा करने से ग्रह व बाधाएं कट जाती हैं। इस दौरान घरों में गुझिया सहित अन्य पकवान बनाए जाएंगे। बच्चे तालाब के किनारे कपड़े की गुड़िया पीटेंगे।
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कटरा बाजार में राजगढ़ के पास स्थित बांकी झील के पास स्थित नाग देवता के मंदिर पर मेले का आयोजन किया जाएगा। शिवलिंग व नाग देवता के विग्रह पर दूध व चना चढ़ाकर अर्घ्य दिया जाएगा। क्षेत्र के निवासी मधुवन ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पहले बारिश न होने से टेढ़ी नदी सूख गई थी। लेकिन बांकी झील तब भी नहीं सूखी थी। अहिरन पुरवा निवासी 95 वर्षीय मुनका देवी ने बताया कि लक्ष्मण जी की तपस्या के दौरान नाग पंचमी के दिन सरोवर से एक स्वर्ण नाव व स्वर्ण पात्र निकला था, जिसमें उन्होंने भोजन किया था। इसी के चलते बांकी झील को लक्ष्मण कुंड भी कहा जाता है। यहां कभी राजा पृथ्वी सिंह की रियासत थी, उन्होंने यहां बाग लगाए थे।
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पूजन का शुभ मुहूर्त
नाग पंचमी शुक्रवार को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से शुरू होकर रात आठ बजकर 26 मिनट तक है। दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से लेकर एक बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम छह बजकर 33 मिनट से रात आठ बजकर 20 मिनट तक है।