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सरयूपुल क्षतिग्रस्त होने से गोंडा-बलरामपुर की फंसी 60 लाख की आबादी
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गोंडा में करनैलगंज के सरयू पुल का बीम धंसने से वैरिकेडिंग वॉल बनाने के लिए मंगाई गई ईंट।
- फोटो : GONDA
गोंडा। 55 साल पुराने जर्जर सरयू पर बने पुल का क्षतिग्रस्त होने से गोंडा बलरामपुर की करीब 60 लाख की आबादी की राह राजधानी के लिए आसान नहीं रह गई। बेहतरीन फोर लेन सड़क के मध्य टू लेन के इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को 40 किलोमीटर का चक्कर लगाकर आना जाना होगा।
समय के साथ धन की बर्बादी होगी। वर्ष 2020 में सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रस्ताव पर तत्कालीन जिलाधिकारी नितिन बंसल व आयुक्त ने जर्जर पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा नए फोर लेन पुल निर्माण के लिए सेतु निगम से प्रस्ताव भेजा था।
करीब 60 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन शासन के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया और परिणाम स्वरूप पुल क्षतिग्रस्त हो गया और आवागमन ठप हो गया है।
वर्ष 1958 में करनैलगंज सरयू नदी पर पुल का निर्माण शुरू कराया गया था। वर्ष 1964 में यह पुल बनकर तैयार हो गया था। करीब 16 साल पहले इस पुल की आयु पूरी हो गई और पुल निर्माण की मांग उठने लगी।
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तत्कालीन मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने सपा सरकार में पुल पर कर वसूली को बंद करवाया था। पुल बीते चार सालों में चार बार डैमेज हो चुका है। कभी पुल में दरार आ जाता है तो कभी बीम के बीच की दूरी बढ़ जाती है। बीते वर्ष पुल में दरार हो गई थी।
कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में होने के नाते इस रास्ते से गुजरने के बाद सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पुल निर्माण के लिए जिलाधिकारी व कमिश्नर से वार्ता किया। तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने सेतु निगम से प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा।
सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक ने सरयू नदी पर किलोमीटर 221 पर पुराने जर्जर दो लेन पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा उसके स्थान पर अप एवं डाउन स्ट्रीम दो-दो लेन पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया। प्रारंभिक आंगणन 5968.31 लाख का तैयार कर जुलाई 2020 में जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया।
इस प्रस्ताव पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसकी खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की थी और पुल की दशा को भी उजागर किया था। अब चूंकि पुल का कैंटीलिवर छह इंच धंस गया है और बीम में दरार आ गई है। लोक निर्माण विभाग ने सेतु निगम को पत्र लिखकर पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी और मरम्मत कराने को कहा।
लेकिन पुल इतना जर्जर हो चुका है कि उसकी मरम्मत नहीं हो सकती है। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत करने के बाद भी पुल पर वाहनों को गुजारना आसान नहीं होगा। इसका केवल एक ही मार्ग बचा है कि पुल को नए सिरे से बनाया जाए।
फरेंदा जरवल मार्ग पर जरवल से गोंडा तक स्टेट प्रोजेक्ट के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण हो चुका है। लेकिन यह पुल स्पीड ब्रेकर साबित हो रहा है। गोंडा से राजधानी व राजधानी लखनऊ से गोंडा, बलरामपुर व डुमरियागंज, सिद्घार्थनगर के वासियों के लिए राह आसान हो गई थी।
पुल के क्षतिग्रस्त होने से वाहनों को या तो परसपुर भौरीगंज से होकर गुजारा जाए जो कि बहुत सकरा रास्ता है या फिर बहराइच कैसरगंज होते हुए जरवल से वाहनों को गुजारा जाए। इसके अलावा गोंडा-बलरामपुर वासियों को अयोध्या होकर गुजारा जाए। इन सभी रास्तों से जाने के लिए लोगों को 40 किलोमीटर से अधिक का रास्ता तय करना होगा।
सरयू पुल के क्षतिग्रस्त होने पर लोक निर्माण विभाग ने पुल के दोनों छोर पर अस्थाई ईंट की दीवार उठाई जा रही है। एंबुलेंस व दो पहिया वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन को जाने से रोक दिया गया है। रविवार को अधिकारी व कर्मचारी इस कार्य में लगे रहे।
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समय के साथ धन की बर्बादी होगी। वर्ष 2020 में सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रस्ताव पर तत्कालीन जिलाधिकारी नितिन बंसल व आयुक्त ने जर्जर पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा नए फोर लेन पुल निर्माण के लिए सेतु निगम से प्रस्ताव भेजा था।
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करीब 60 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन शासन के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया और परिणाम स्वरूप पुल क्षतिग्रस्त हो गया और आवागमन ठप हो गया है।
वर्ष 1958 में करनैलगंज सरयू नदी पर पुल का निर्माण शुरू कराया गया था। वर्ष 1964 में यह पुल बनकर तैयार हो गया था। करीब 16 साल पहले इस पुल की आयु पूरी हो गई और पुल निर्माण की मांग उठने लगी।
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तत्कालीन मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने सपा सरकार में पुल पर कर वसूली को बंद करवाया था। पुल बीते चार सालों में चार बार डैमेज हो चुका है। कभी पुल में दरार आ जाता है तो कभी बीम के बीच की दूरी बढ़ जाती है। बीते वर्ष पुल में दरार हो गई थी।
कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में होने के नाते इस रास्ते से गुजरने के बाद सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पुल निर्माण के लिए जिलाधिकारी व कमिश्नर से वार्ता किया। तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने सेतु निगम से प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा।
सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक ने सरयू नदी पर किलोमीटर 221 पर पुराने जर्जर दो लेन पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा उसके स्थान पर अप एवं डाउन स्ट्रीम दो-दो लेन पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया। प्रारंभिक आंगणन 5968.31 लाख का तैयार कर जुलाई 2020 में जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया।
इस प्रस्ताव पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसकी खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की थी और पुल की दशा को भी उजागर किया था। अब चूंकि पुल का कैंटीलिवर छह इंच धंस गया है और बीम में दरार आ गई है। लोक निर्माण विभाग ने सेतु निगम को पत्र लिखकर पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी और मरम्मत कराने को कहा।
लेकिन पुल इतना जर्जर हो चुका है कि उसकी मरम्मत नहीं हो सकती है। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत करने के बाद भी पुल पर वाहनों को गुजारना आसान नहीं होगा। इसका केवल एक ही मार्ग बचा है कि पुल को नए सिरे से बनाया जाए।
फरेंदा जरवल मार्ग पर जरवल से गोंडा तक स्टेट प्रोजेक्ट के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण हो चुका है। लेकिन यह पुल स्पीड ब्रेकर साबित हो रहा है। गोंडा से राजधानी व राजधानी लखनऊ से गोंडा, बलरामपुर व डुमरियागंज, सिद्घार्थनगर के वासियों के लिए राह आसान हो गई थी।
पुल के क्षतिग्रस्त होने से वाहनों को या तो परसपुर भौरीगंज से होकर गुजारा जाए जो कि बहुत सकरा रास्ता है या फिर बहराइच कैसरगंज होते हुए जरवल से वाहनों को गुजारा जाए। इसके अलावा गोंडा-बलरामपुर वासियों को अयोध्या होकर गुजारा जाए। इन सभी रास्तों से जाने के लिए लोगों को 40 किलोमीटर से अधिक का रास्ता तय करना होगा।
सरयू पुल के क्षतिग्रस्त होने पर लोक निर्माण विभाग ने पुल के दोनों छोर पर अस्थाई ईंट की दीवार उठाई जा रही है। एंबुलेंस व दो पहिया वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन को जाने से रोक दिया गया है। रविवार को अधिकारी व कर्मचारी इस कार्य में लगे रहे।