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Gonda News: आंख की जांच के बाद जमा कराया जा रहा चश्मे का पैसा
Mon, 02 Dec 2024 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 02 Dec 2024 11:56 PM IST
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गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में इलाज कराने के लिए भले ही सिर्फ एक रुपया पंजीकरण शुल्क निर्धारित हो, लेकिन यहां हर कदम पर मरीजों को वसूली का सामना करना पड़ता है। ठंड बढ़ने के साथ ही इन दिनों बड़ी संख्या में आंख के मरीज मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं, लेकिन उनसे जांच के बाद चश्मे के लिए 350 से 400 रुपये तक शुल्क वसूला जा रहा है। सोमवार को नेत्र रोग विभाग में बड़ी अव्यवस्थाएं सामने आईं।
मेडिकल कॉलेज में ओटी के पास संचालित नेत्र रोग विभाग के सामने दोपहर 12:29 बजे 100 से अधिक मरीज आंखों की जांच व उपचार कराने के लिए लाइन में लगे थे। कुछ मरीज बाहर धूप सेंक रहे थे। कई बुजुर्ग मरीजों ने बताया कि दूसरी व तीसरी बार आने पर डॉक्टर मिले हैं। कई मरीजों ने चश्मे के नाम पर वसूली का आरोप लगाया।
शहर के फैजाबाद रोड की रहने वाली शाहीन ने बताया कि सुबह दस बजे अस्पताल आई थीं। करीब ढाई घंटे बाद आंखों की जांच हो सकी। जांच के दौरान बताया गया कि चश्मा लगाना पड़ेगा, इसके लिए वहीं पर 400 रुपये जमा करा लिए गए। जबकि वह बाहर से चश्मा बनवाना चाहती थीं।
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बालपुर से आईं चंदा देवी ने बताया कि उनकी आंखों की जांच के बाद चश्मा लगाने का परामर्श दिया गया। जांच के दौरान ही चश्मे के लिए 350 रुपये जमा करा लिए गए। इसी प्रकार करीब 20 मरीजों से चश्मे के नाम पर शुल्क जमा कराया गया। इनमें से अधिकतर मरीज बाद में या फिर बाहर से चश्मा बनवाना चाहते थे।
कौड़िया के लैबुड़वा निवासी बुजुर्ग धनदेवी सिंह (60) आंखों का उपचार कराने पहुंचीं। बताया कि वह बीते शनिवार को भी अस्पताल आई थीं, लेकिन जानकारी मिली कि डॉक्टर साहब नहीं हैं। दो दिन बाद सोमवार को फिर आने पर इलाज मिला है। इसी प्रकार 65 वर्षीय सुंदरलाली व 41 वर्षीय शकीना ने बताया कि आज दूसरे दिन आने पर आंखों का उपचार हो सका। कर्मचारियों ने बताया कि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार विश्वकर्मा सप्ताह में सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को ओपीडी में बैठते हैं।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी का कहना है कि ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को मुफ्त में काला चश्मा दिया जाता है। अन्य मरीजों की जांच कर चश्मे का नंबर बता दिया जाता है, जो अपनी स्वेच्छा से बाजार से चश्मा खरीद सकते हैं। अस्पताल में चश्मे का शुल्क जमा कराने के मामले में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में ओटी के पास संचालित नेत्र रोग विभाग के सामने दोपहर 12:29 बजे 100 से अधिक मरीज आंखों की जांच व उपचार कराने के लिए लाइन में लगे थे। कुछ मरीज बाहर धूप सेंक रहे थे। कई बुजुर्ग मरीजों ने बताया कि दूसरी व तीसरी बार आने पर डॉक्टर मिले हैं। कई मरीजों ने चश्मे के नाम पर वसूली का आरोप लगाया।
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शहर के फैजाबाद रोड की रहने वाली शाहीन ने बताया कि सुबह दस बजे अस्पताल आई थीं। करीब ढाई घंटे बाद आंखों की जांच हो सकी। जांच के दौरान बताया गया कि चश्मा लगाना पड़ेगा, इसके लिए वहीं पर 400 रुपये जमा करा लिए गए। जबकि वह बाहर से चश्मा बनवाना चाहती थीं।
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बालपुर से आईं चंदा देवी ने बताया कि उनकी आंखों की जांच के बाद चश्मा लगाने का परामर्श दिया गया। जांच के दौरान ही चश्मे के लिए 350 रुपये जमा करा लिए गए। इसी प्रकार करीब 20 मरीजों से चश्मे के नाम पर शुल्क जमा कराया गया। इनमें से अधिकतर मरीज बाद में या फिर बाहर से चश्मा बनवाना चाहते थे।
कौड़िया के लैबुड़वा निवासी बुजुर्ग धनदेवी सिंह (60) आंखों का उपचार कराने पहुंचीं। बताया कि वह बीते शनिवार को भी अस्पताल आई थीं, लेकिन जानकारी मिली कि डॉक्टर साहब नहीं हैं। दो दिन बाद सोमवार को फिर आने पर इलाज मिला है। इसी प्रकार 65 वर्षीय सुंदरलाली व 41 वर्षीय शकीना ने बताया कि आज दूसरे दिन आने पर आंखों का उपचार हो सका। कर्मचारियों ने बताया कि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार विश्वकर्मा सप्ताह में सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को ओपीडी में बैठते हैं।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी का कहना है कि ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को मुफ्त में काला चश्मा दिया जाता है। अन्य मरीजों की जांच कर चश्मे का नंबर बता दिया जाता है, जो अपनी स्वेच्छा से बाजार से चश्मा खरीद सकते हैं। अस्पताल में चश्मे का शुल्क जमा कराने के मामले में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।