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6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का पारा
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गोंडा। गुरुवार सुबह से ही अचानक बढ़ी गलन व ठंड के चलते लोग बेहाल हो उठे। सर्दी से बचने के लिए लोगों ने हीटर व अलाव का सहारा लिया। कुछ दिनों से सामान्य चल रहे मौसम में अचानक बदलाव होने से पारा लुढ़ककर 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं दिन का तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहा।
शहर हो या गांव, गुरुवार को सर्द हवा ने ऐसा सितम ढाया कि लोग ठिठुरन से बेहाल हो उठे। दुकानदार हो या फिर रिक्शेवाला, सभी परेशान रहे। सुबह से ही चली बर्फीली हवा ने लोगों को घर से निकलना मुहाल कर दिया। हाड़ कंपा देने वाली कड़ाके की ठंड से लोग परेशान दिखे। रोजी-रोटी के लिए घर से निकले दुकानदार व गरीबों का धंधा चौपट रहा। दुकानें तो खुलीं लेकिन ग्राहक न होने से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदार खरीदारों की आस में बैठे रहे।
वहीं सबसे ज्यादा दिक्कत रिक्शा चालकों को उठानी पड़ी। ठंड के कारण रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर सवारियां भी नहीं दिखीं। पंडरीकृपाल क्षेत्र के रामलखन ने बताया कि पहले दिनभर में दो-तीन सौ रुपये कमा लेते थे लेकिन आज सिर्फ 75 रुपये ही कमाए हैं। ऐसे में बड़ी मुश्किल से एक वक्त का खाना हो पाएगा। दुकानदार कृष्ण मुरारी का कहना है कि सर्दी इतनी ज्यादा है कि ग्राहक घरों से नहीं निकल रहे हैं। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए लोग हीटर व अलाव का सहारा लेते दिखे।
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कड़ाके की ठंड में टोपी उतरी न शाल
दिन भर चली सर्द हवा के कारण जहां लोग घरों में दुबके रहे, वहीं ठंड के चलते लोगों के सिर से न तो टोपी उतरी और न ही शाल। हर कोई दिन भर ठंड से बचने के लिए जुगत लगाता रहा। कोई कंडे जलाता रहा तो कोई कूड़े कचरे के ढेर जलाकर अपनी ठंडी भगाता रहा।
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शहर हो या गांव, गुरुवार को सर्द हवा ने ऐसा सितम ढाया कि लोग ठिठुरन से बेहाल हो उठे। दुकानदार हो या फिर रिक्शेवाला, सभी परेशान रहे। सुबह से ही चली बर्फीली हवा ने लोगों को घर से निकलना मुहाल कर दिया। हाड़ कंपा देने वाली कड़ाके की ठंड से लोग परेशान दिखे। रोजी-रोटी के लिए घर से निकले दुकानदार व गरीबों का धंधा चौपट रहा। दुकानें तो खुलीं लेकिन ग्राहक न होने से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदार खरीदारों की आस में बैठे रहे।
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वहीं सबसे ज्यादा दिक्कत रिक्शा चालकों को उठानी पड़ी। ठंड के कारण रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर सवारियां भी नहीं दिखीं। पंडरीकृपाल क्षेत्र के रामलखन ने बताया कि पहले दिनभर में दो-तीन सौ रुपये कमा लेते थे लेकिन आज सिर्फ 75 रुपये ही कमाए हैं। ऐसे में बड़ी मुश्किल से एक वक्त का खाना हो पाएगा। दुकानदार कृष्ण मुरारी का कहना है कि सर्दी इतनी ज्यादा है कि ग्राहक घरों से नहीं निकल रहे हैं। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए लोग हीटर व अलाव का सहारा लेते दिखे।
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कड़ाके की ठंड में टोपी उतरी न शाल
दिन भर चली सर्द हवा के कारण जहां लोग घरों में दुबके रहे, वहीं ठंड के चलते लोगों के सिर से न तो टोपी उतरी और न ही शाल। हर कोई दिन भर ठंड से बचने के लिए जुगत लगाता रहा। कोई कंडे जलाता रहा तो कोई कूड़े कचरे के ढेर जलाकर अपनी ठंडी भगाता रहा।