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Gonda News: अनियमित भुगतान से मेडिकल कॉलेज सवालों के घेरे में
Sun, 03 Mar 2024 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 03 Mar 2024 12:32 AM IST
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गोंडा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय अनियमितता के आरोपों से घिर गया है। ऑडिट टीम ने खरीद फरोख्त व वेतन भुगतान में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कई बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल के जिम्मेदारों में खलबली मची है। ऑडिट के दौरान आईं आपत्तियों के निस्तारण की जुगत में स्वास्थ्य महकमा जुटा हुआ है।
अस्पताल में एक अप्रैल 2022 से लेकर 31 मार्च 2023 तक हुए खरीद-फरोख्त व अन्य भुगतान की ऑडिट कराई गई। इसमें प्रथमदृष्टया कई बड़े खेल सामने आए। टीम ने अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट भेजकर आपत्तियों का जवाब मांगा है। टीम ने आरोप लगाए कि स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन में लाखों रुपये अधिक भुगतान किया गया है। फार्मासिस्ट धर्मेंद्र तिवारी को एक लाख 50 हजार 278 रुपये, जितेंद्रनाथ तिवारी को 88,993 तथा डॉ. अनिल कुमार को चार लाख 882 रुपये से अधिक भुगतान किए गए। आर्थो सर्जन डॉ. अरुण मिश्र व स्टाफ नर्स प्रतिमा शुक्ला के वेतन में भी त्रुटि बताई गई।
नहीं मिले ईपीएफ भुगतान के साक्ष्य
आउटसोर्स कर्मियों के ईपीएफ भुगतान संबंधी जरूरी पत्रावली ऑडिट टीम को नहीं उपलब्ध कराई गई, जिसको लेकर घपले की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल में तीन फर्मों के माध्यम से 59 स्वास्थ्य कर्मियों को अनुबंधित किया गया है। तीनों फर्मों ने हर महीने अपने लेटरहेड पर बिल बनाकर नौ लाख 68 हजार 197 रुपये प्राप्त किए। ईपीएफ के मद में सालभर में आठ लाख 85 हजार 936 रुपये भुगतान किया गया। लेकिन इसका कोई साक्ष्य ऑडिट टीम को नहीं दिया गया। टीम ने ईपीएफ भुगतान में गबन की आशंका जताई है।
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खरीद-फरोख्त में भी मिली अनियमितता
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार काॅटन-पट्टी आदि खरीदने में भी नियमों को ताक पर रख दिया गया। कार्यालय की ओर से बैंडेज खरीद में एक लाख 70 हजार तथा कंबल खरीद में 45 हजार 400 रुपये का भुगतान हुआ। लेकिन खरीद प्रक्रिया में शासनादेश का उल्लंघन किया गया है तथा जेम पोर्टल पर खरीद के बाद अपडेट नहीं किया गया। आवश्यक अभिलेख न होने के कारण आडिट टीम ने आपत्ति जताई है।
आपत्तियों का दिया जाएगा जवाब
सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी के अनुसार ऑडिट मेरे कार्यकाल के पहले का है। टीम की ओर से जिन बिंदुओं पर आपत्ति लगाई गई है, उसका उचित जवाब साक्ष्य सहित दिया जाएगा। संबंधित लिपिक को जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
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अस्पताल में एक अप्रैल 2022 से लेकर 31 मार्च 2023 तक हुए खरीद-फरोख्त व अन्य भुगतान की ऑडिट कराई गई। इसमें प्रथमदृष्टया कई बड़े खेल सामने आए। टीम ने अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट भेजकर आपत्तियों का जवाब मांगा है। टीम ने आरोप लगाए कि स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन में लाखों रुपये अधिक भुगतान किया गया है। फार्मासिस्ट धर्मेंद्र तिवारी को एक लाख 50 हजार 278 रुपये, जितेंद्रनाथ तिवारी को 88,993 तथा डॉ. अनिल कुमार को चार लाख 882 रुपये से अधिक भुगतान किए गए। आर्थो सर्जन डॉ. अरुण मिश्र व स्टाफ नर्स प्रतिमा शुक्ला के वेतन में भी त्रुटि बताई गई।
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नहीं मिले ईपीएफ भुगतान के साक्ष्य
आउटसोर्स कर्मियों के ईपीएफ भुगतान संबंधी जरूरी पत्रावली ऑडिट टीम को नहीं उपलब्ध कराई गई, जिसको लेकर घपले की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल में तीन फर्मों के माध्यम से 59 स्वास्थ्य कर्मियों को अनुबंधित किया गया है। तीनों फर्मों ने हर महीने अपने लेटरहेड पर बिल बनाकर नौ लाख 68 हजार 197 रुपये प्राप्त किए। ईपीएफ के मद में सालभर में आठ लाख 85 हजार 936 रुपये भुगतान किया गया। लेकिन इसका कोई साक्ष्य ऑडिट टीम को नहीं दिया गया। टीम ने ईपीएफ भुगतान में गबन की आशंका जताई है।
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खरीद-फरोख्त में भी मिली अनियमितता
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार काॅटन-पट्टी आदि खरीदने में भी नियमों को ताक पर रख दिया गया। कार्यालय की ओर से बैंडेज खरीद में एक लाख 70 हजार तथा कंबल खरीद में 45 हजार 400 रुपये का भुगतान हुआ। लेकिन खरीद प्रक्रिया में शासनादेश का उल्लंघन किया गया है तथा जेम पोर्टल पर खरीद के बाद अपडेट नहीं किया गया। आवश्यक अभिलेख न होने के कारण आडिट टीम ने आपत्ति जताई है।
आपत्तियों का दिया जाएगा जवाब
सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी के अनुसार ऑडिट मेरे कार्यकाल के पहले का है। टीम की ओर से जिन बिंदुओं पर आपत्ति लगाई गई है, उसका उचित जवाब साक्ष्य सहित दिया जाएगा। संबंधित लिपिक को जवाब देने का निर्देश दिया गया है।