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बना दिया लेवल-2 का अस्पताल, लेकिन सुविधा नदारद
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गोंडा जिला अस्पताल में बना कोविड-19 वार्ड।
- फोटो : GONDA
गोंडा। जिला अस्पताल के नए भवन में कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिए कोविड लेवल-2 अस्पताल स्थापित किया गया है। लेकिन यहां तैयारी के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से केवल दिखावा किया जा रहा है। शनिवार को जब इस कोविड लेवल-2 अस्पताल की हकीकत देखी गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अब इसी अधूरी तैयारी के साथ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।
बता दें कि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए हाथों का सेनिटाइजेशन और साफ- सफाई बहुत जरूरी है। जिसके लिए डीएम, सीएमओ और तमाम अफसर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। लेकिन इस कोविड लेवल-2 अस्पताल में हर जगह हैंडवॉश रखा तो दिखाई दिया लेकिन पानी कहीं नहीं था। ऐसे कोई हाथ कैसे साफ करेगा। इसके साथ टॉयलेट का उपयोग भी कैसे होगा।
कोविड लेवल-2 अस्पताल में निचले तल पर मौजूद कर्मचारियों के लिए जरूरी किट मौजूद नहीं है। पूछने पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि एक-एक किट दिया गया है जो कि मरीज के आने पर पहनने को कहा गया है। अभी तो खैर कोई भी संदिग्ध मरीज भर्ती नहीं हुआ है लेकिन आने पर परेशानी होगी। हम कैसे जानेंगे कि कौन सा मरीज कोरोना से संक्रमित है या नहीं। इसलिए ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों को पर्याप्त मात्रा में किट की उपलब्धता होनी चाहिए।
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कोविड लेवल-2 अस्पताल में मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए 24 घंटे का ड्यूटी शेड्यूल बनाया गया है। लेकिन यहां कर्मचारियों के बैठने के लिए कोई जगह नहीं है। जिला अस्पताल के नए भवन में दो तलों पर अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन नीचे के तल को छोड़ दें तो ऊपर के तल पर कर्मचारियों के बैठने की सुविधा नहीं है।
कोरोना वायरस के संक्रमण में सबसे अधिक आइसोलेशन का महत्व होता है। ऐसे यहां इस स्तर पर भी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। क्योंकि कोरोना के मरीजों में गले में बलगम अधिक जमा होने लगता है इसलिए सक्शन मशीन की जरूरत पड़ती है लेकिन यहां केवल दो सक्शन मशीन ही मौजूद हैं। ऐसे में इनका स्टरलाइजेशन बड़ी चुनौती है। इतना ही नहीं वेंटिलेटर भी केवल एक ही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि जैसा कि सीएमएस की ओर बताया गया है कि वहां सारी सुविधाएं मौजूद हैं। यदि नहीं हैं तो तुरंत कराई जाएगी। कर्मचारियों के लिए किट मंगवाई गई है। फीवल क्लीनिक में बराबर लोगों का परीक्षण किया जा रहा है।
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बता दें कि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए हाथों का सेनिटाइजेशन और साफ- सफाई बहुत जरूरी है। जिसके लिए डीएम, सीएमओ और तमाम अफसर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। लेकिन इस कोविड लेवल-2 अस्पताल में हर जगह हैंडवॉश रखा तो दिखाई दिया लेकिन पानी कहीं नहीं था। ऐसे कोई हाथ कैसे साफ करेगा। इसके साथ टॉयलेट का उपयोग भी कैसे होगा।
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कोविड लेवल-2 अस्पताल में निचले तल पर मौजूद कर्मचारियों के लिए जरूरी किट मौजूद नहीं है। पूछने पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि एक-एक किट दिया गया है जो कि मरीज के आने पर पहनने को कहा गया है। अभी तो खैर कोई भी संदिग्ध मरीज भर्ती नहीं हुआ है लेकिन आने पर परेशानी होगी। हम कैसे जानेंगे कि कौन सा मरीज कोरोना से संक्रमित है या नहीं। इसलिए ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों को पर्याप्त मात्रा में किट की उपलब्धता होनी चाहिए।
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कोविड लेवल-2 अस्पताल में मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए 24 घंटे का ड्यूटी शेड्यूल बनाया गया है। लेकिन यहां कर्मचारियों के बैठने के लिए कोई जगह नहीं है। जिला अस्पताल के नए भवन में दो तलों पर अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन नीचे के तल को छोड़ दें तो ऊपर के तल पर कर्मचारियों के बैठने की सुविधा नहीं है।
कोरोना वायरस के संक्रमण में सबसे अधिक आइसोलेशन का महत्व होता है। ऐसे यहां इस स्तर पर भी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। क्योंकि कोरोना के मरीजों में गले में बलगम अधिक जमा होने लगता है इसलिए सक्शन मशीन की जरूरत पड़ती है लेकिन यहां केवल दो सक्शन मशीन ही मौजूद हैं। ऐसे में इनका स्टरलाइजेशन बड़ी चुनौती है। इतना ही नहीं वेंटिलेटर भी केवल एक ही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि जैसा कि सीएमएस की ओर बताया गया है कि वहां सारी सुविधाएं मौजूद हैं। यदि नहीं हैं तो तुरंत कराई जाएगी। कर्मचारियों के लिए किट मंगवाई गई है। फीवल क्लीनिक में बराबर लोगों का परीक्षण किया जा रहा है।

गोंडा के जिला अस्पताल में बने कोविड-19 वार्ड में रखी सक्शन मशीन।- फोटो : GONDA