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Gonda News: डोमाकल्पी में विश्वविद्यालय स्थापना की राह आसान
Tue, 04 Apr 2023 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 04 Apr 2023 11:57 PM IST
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गोंडा। देवीपाटन मंडल में मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दो जिलों में ठनी रार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। परसपुर के डोमाकल्पी में विश्वविद्यालय की स्थापना की राह आसान हो गई है। कारण जिले के डोमाकल्पी में प्रस्तावित जमीन सरकारी है और इसे लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है। जबकि बलरामपुर में जिन दोनों स्थानों पर विवि स्थापना के लिए प्रस्ताव दिया गया है वे दोनों जमीनें चारागाह की हैं।
अपर आयुक्त (प्रशासन व न्यायिक) राकेश चंद्र शर्मा ने विवि की स्थापना के लिए प्रस्तावित स्थल का सोमवार को निरीक्षण कर संतोष जताया था। यहां भूमि की उपलब्धता के साथ ही अन्य सभी मानक पूरे मिले हैं। इससे पहले तत्कालीन जिलाधिकारी के साथ ही तहसील के अधिकारियों की ओर से जमीन प्रस्तावित करने के समय जांच में 58.13 एकड़ भूमि पूरी तरह उपयुक्त मिली थी। उस समय जमीन तय करने वाली टीम में शामिल रहे सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक कैलाशनाथ सिंह कहते हैं कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। पूरी भूमि सरकारी है। इसके आवंटन में सरकार को किसी तरह का खर्च नहीं उठाना है।
बलरामपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जिन दो स्थानों पर जमीन की उपलब्धता बताई जा रही है, वे दोनों जमीनें चारागाह की हैं। इसे लेकर चकबंदी विभाग के सेवानिवृत्त लेखपाल विजय बहादुर तिवारी कहते हैं कि नियमानुसार चारागाह की भूमि किसी अन्य कार्य के लिए आवंटित नहीं हो सकती। बलरामपुर की दोनों जमीनें चारागाह की हैं। इसमें भी एक जमीन तराई क्षेत्र में है।
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ऐसे में डोमाकल्पी की जमीन ही विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त है और इसका आवंटन हो सकता है। इस तरह राजस्व नियमों को देखते हुए डोमाकल्पी में विश्वविद्यालय स्थापना की राह आसान दिख रही है।
राज्य विवि की स्थापना परसपुर के डोमाकल्पी में ही हो, इसके लिए अधिवक्ताओं और शिक्षकों के साथ ही अब सभासद संघ भी लामबंद हो गया है। जिलाध्यक्ष शाहिद अली कुरैशी ने कहा कि विवि तय स्थल पर ही बनना चाहिए। सभी सभासद इसके लिए प्रयास कर रहे लोगों के साथ हैं। अधिवक्ता रवि प्रकाश पांडेय ने कहा कि बलरामपुर के दो विधायकों ने जमीनों का जो प्रस्ताव डीएम को दिया है, वह दोनों जमीनें चारागाह की हैं। ऐसे में नियमों से इतर कैसे मांग की जा सकती है।
परसपुर। सनातन धर्म परिषद एवं तुलसी जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डॉ. (स्वामी) भगवदाचार्य ने भी परसपुर के डोमाकल्पी में ही राज्य विवि की स्थापना की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी के सम्मान में गोस्वामी तुलसीदास विश्वविद्यालय होना चाहिए।
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अपर आयुक्त (प्रशासन व न्यायिक) राकेश चंद्र शर्मा ने विवि की स्थापना के लिए प्रस्तावित स्थल का सोमवार को निरीक्षण कर संतोष जताया था। यहां भूमि की उपलब्धता के साथ ही अन्य सभी मानक पूरे मिले हैं। इससे पहले तत्कालीन जिलाधिकारी के साथ ही तहसील के अधिकारियों की ओर से जमीन प्रस्तावित करने के समय जांच में 58.13 एकड़ भूमि पूरी तरह उपयुक्त मिली थी। उस समय जमीन तय करने वाली टीम में शामिल रहे सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक कैलाशनाथ सिंह कहते हैं कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। पूरी भूमि सरकारी है। इसके आवंटन में सरकार को किसी तरह का खर्च नहीं उठाना है।
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बलरामपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जिन दो स्थानों पर जमीन की उपलब्धता बताई जा रही है, वे दोनों जमीनें चारागाह की हैं। इसे लेकर चकबंदी विभाग के सेवानिवृत्त लेखपाल विजय बहादुर तिवारी कहते हैं कि नियमानुसार चारागाह की भूमि किसी अन्य कार्य के लिए आवंटित नहीं हो सकती। बलरामपुर की दोनों जमीनें चारागाह की हैं। इसमें भी एक जमीन तराई क्षेत्र में है।
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ऐसे में डोमाकल्पी की जमीन ही विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त है और इसका आवंटन हो सकता है। इस तरह राजस्व नियमों को देखते हुए डोमाकल्पी में विश्वविद्यालय स्थापना की राह आसान दिख रही है।
राज्य विवि की स्थापना परसपुर के डोमाकल्पी में ही हो, इसके लिए अधिवक्ताओं और शिक्षकों के साथ ही अब सभासद संघ भी लामबंद हो गया है। जिलाध्यक्ष शाहिद अली कुरैशी ने कहा कि विवि तय स्थल पर ही बनना चाहिए। सभी सभासद इसके लिए प्रयास कर रहे लोगों के साथ हैं। अधिवक्ता रवि प्रकाश पांडेय ने कहा कि बलरामपुर के दो विधायकों ने जमीनों का जो प्रस्ताव डीएम को दिया है, वह दोनों जमीनें चारागाह की हैं। ऐसे में नियमों से इतर कैसे मांग की जा सकती है।
परसपुर। सनातन धर्म परिषद एवं तुलसी जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डॉ. (स्वामी) भगवदाचार्य ने भी परसपुर के डोमाकल्पी में ही राज्य विवि की स्थापना की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी के सम्मान में गोस्वामी तुलसीदास विश्वविद्यालय होना चाहिए।