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शिक्षकों को लगी चार करोड़ की चपत
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:12 PM IST
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परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दो सेट ड्रेस बनवाने में जिले के शिक्षकों को चार करोड़ रुपये की चपत लग गई। गत शिक्षा सत्र में 75 प्रतिशत राशि से करीब तीन लाख बच्चों की ड्रेस बनवाने वाले शिक्षकों को अभी तक शेष 25 प्रतिशत राशि का भुगतान नहीं मिला। शिक्षक इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दूसरी तरफ अधिकारी ड्रेस मानक विहीन होने का तर्क दे रहे हैं।
शिक्षा सत्र 2014-15 में परिषदीय विद्यालयों के कक्षा आठ तक करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत थे। सभी बच्चों को यूनीफार्म उपलब्ध कराने के लिए 75 प्रतिशत धनराशि रूप में 12 करोड़ रुपये शिक्षकों के खाते में भेजे गए। शेष करीब चार करोड़ रुपये ड्रेस आपूर्ति के बाद उपलब्ध कराने को कहा गया।
बीते वर्ष परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दो-दो सेट यूनीफार्म वितरण के लिए प्रति विद्यार्थी 400 रुपये दिए गए थे। चूंकि हर विद्यार्थी को दो-दो ड्रेस देने के लिए 400 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से शिक्षकों को भुगतान मिलना था लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूनीफार्म आपूर्ति के लिए केवल 75 प्रतिशत धनराशि की शिक्षकों के खातों में भेजी।
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एक विद्यार्थी के लिए 400 रुपये की जगह 300 रुपये ही दिए गए। 25 प्रतिशत धनराशि यह कह कर रोकी गई कि यूनीफार्म की गुणवत्ता सही होने तथा उपभोग प्रमाण पत्र देने पर ही भुगतान किया जाएगा।
शिक्षकों का कहना है कि उपभोग प्रमाण पत्र खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया गया जिन्होंने प्रमाण पत्र बीएसए कार्यालय में जमा किया कि नहीं उन लोगों को पता नहीं है। गुणवत्ता की रिपोर्ट भी खंड शिक्षा अधिकारियों को देनी थी। उन्होंने जांच भी की। इसके बावजूद यूनिफॉर्म की शेष 25 प्रतिशत राशि शिक्षकों को नहीं मिली।
पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रजेश मिश्र, महामंत्री अशोक पांडेय, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद त्रिपाठी ने कहा कि इसमें अधिकारियों ने जानबूझ कर धनराशि दबाने का प्रयास किया है।
सभी शिक्षकों ने उपभोग प्रमाण पत्र दे दिया था और जांच भी खंड शिक्षा अधिकारियों ने की। रिपोर्ट न देना और धनराशि दबाने के पीछे अधिकारियों की साजिश है।
आपूर्ति की गई यूनीफार्म का उपभोग प्रमाण पत्र ब्लाकों ने नहीं भेजा। सर्व शिक्षा अभियान की गाइडलाइन में है कि जब तक उपभोग न मिल जाए तब तक धनराशि का आहरण न किया जाए।
शिक्षकों द्वारा आपूर्ति की गई ड्रेस की गुणवत्ता की जांच करायी गई। जांच पता चला कि यूनीफार्म की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। मानक विहीन ड्रेस का वितरण किया गया। इससे 25 प्रतिशत धनराशि का आहरण रोक दिया गया।
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शिक्षा सत्र 2014-15 में परिषदीय विद्यालयों के कक्षा आठ तक करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत थे। सभी बच्चों को यूनीफार्म उपलब्ध कराने के लिए 75 प्रतिशत धनराशि रूप में 12 करोड़ रुपये शिक्षकों के खाते में भेजे गए। शेष करीब चार करोड़ रुपये ड्रेस आपूर्ति के बाद उपलब्ध कराने को कहा गया।
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बीते वर्ष परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दो-दो सेट यूनीफार्म वितरण के लिए प्रति विद्यार्थी 400 रुपये दिए गए थे। चूंकि हर विद्यार्थी को दो-दो ड्रेस देने के लिए 400 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से शिक्षकों को भुगतान मिलना था लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूनीफार्म आपूर्ति के लिए केवल 75 प्रतिशत धनराशि की शिक्षकों के खातों में भेजी।
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एक विद्यार्थी के लिए 400 रुपये की जगह 300 रुपये ही दिए गए। 25 प्रतिशत धनराशि यह कह कर रोकी गई कि यूनीफार्म की गुणवत्ता सही होने तथा उपभोग प्रमाण पत्र देने पर ही भुगतान किया जाएगा।
शिक्षकों का कहना है कि उपभोग प्रमाण पत्र खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया गया जिन्होंने प्रमाण पत्र बीएसए कार्यालय में जमा किया कि नहीं उन लोगों को पता नहीं है। गुणवत्ता की रिपोर्ट भी खंड शिक्षा अधिकारियों को देनी थी। उन्होंने जांच भी की। इसके बावजूद यूनिफॉर्म की शेष 25 प्रतिशत राशि शिक्षकों को नहीं मिली।
पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रजेश मिश्र, महामंत्री अशोक पांडेय, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद त्रिपाठी ने कहा कि इसमें अधिकारियों ने जानबूझ कर धनराशि दबाने का प्रयास किया है।
सभी शिक्षकों ने उपभोग प्रमाण पत्र दे दिया था और जांच भी खंड शिक्षा अधिकारियों ने की। रिपोर्ट न देना और धनराशि दबाने के पीछे अधिकारियों की साजिश है।
आपूर्ति की गई यूनीफार्म का उपभोग प्रमाण पत्र ब्लाकों ने नहीं भेजा। सर्व शिक्षा अभियान की गाइडलाइन में है कि जब तक उपभोग न मिल जाए तब तक धनराशि का आहरण न किया जाए।
शिक्षकों द्वारा आपूर्ति की गई ड्रेस की गुणवत्ता की जांच करायी गई। जांच पता चला कि यूनीफार्म की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। मानक विहीन ड्रेस का वितरण किया गया। इससे 25 प्रतिशत धनराशि का आहरण रोक दिया गया।