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Gonda News: कई प्रत्याशियों की जमानत बचना मुश्किल
Fri, 05 May 2023 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 05 May 2023 11:16 PM IST
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गोंडा। निकाय चुनाव में मतदान के बाद अब जीत-हार की चर्चाएं हो रहीं हैं। चेयरमैन के प्रत्याशी पड़े मतों के आधार पर गुणाभाग लगा रहे हैं। वहीं, प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए पड़े मतों के छठे भाग के बराबर मत हासिल करना जरूरी है। गोंडा नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के लिए 11 दावेदार हैं। यहां 1,05,367 मतदाताओं में से 53,885 ने वोट दिया है। ऐसे में जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को कम से कम 8,989 मत हासिल करने हैं। इससे कम वोट पाने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो जाएगी।
गोंडा नगर पालिका में हुए मतदान से ही साफ है कि जमानत बचाने के लिए तय 8,989 मतों का आकड़ा चार से पांच प्रत्याशी ही छूते दिख रहे हैं। ऐसे में छह प्रत्याशियों की जमानत बचनी मुश्किल है। इसी तरह करनैलगंज नगर पालिका में 13 प्रत्याशी रहे। यहां 30,461 मतदाताओं में से 19,666 ने मतदान किया और जमानत बचाने के लिए 3,277 मत चाहिए। यहां भी तीन प्रत्याशी ही इतने मत हासिल करने की स्थिति में दिख रहे हैं। यहां भी 10 की जमानत बचनी मुश्किल है। नवाबगंज नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष के 12 प्रत्याशी हैं और यहां पर 15,448 वोटरों में से 11,206 ने मतदान किया है। ऐसे में यहां जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को कम से कम 1,867 मत चाहिए। यहां चार प्रत्याशी जमानत बचाने की स्थिति में दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि यहां के आठ या इससे अधिक प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सकेंगे। फिलहाल अभी यह मतदान के दौरान के माहौल के आधार पर है। 13 मई को मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।
नगर पंचायतों में जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को जूझना पड़ा। मतदान के बाद कई की जमानत जब्त होने के संकेत मिल रहे हैं। नवगठित नगर पंचायत धानेपुर में चेयरमैन पद के लिए 13 दावेदार हैं। यहां 21,141 मतदाता हैं मगर मतदान 12,027 ने ही किया। यहां के प्रत्याशियों को भी जमानत बचाने के लिए कम से कम 2,037 मत चाहिए। यहां चार दावेदार ही ऐसे दिख रहे हैं जो जमानत बचा सकेंगे। नौ की जमानत बचनी मुश्किल है।
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खरगूपुर नगर पंचायत में चेयरमैन के नौ प्रत्याशी हैं। यहां 8,232 मतदाताओं में से 5,712 ने वोट डाला। यहां 952 वोट जमानत के लिए जरूरी हैं। यहां भी दो उम्मीदवार ही जमानत बचाते दिख रहे हैं। तरबगंज नगर पंचायत से चेयरमैन पद के सात प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए 1,831 मत चाहिए। यहां के 17,639 में से 10,990 मतदाताओं ने ही मतदान किया है।
नगर पंचायत बेलसर से चेयरमैन पद पर छह प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए 2,660 वोट चाहिए। यहां 25,217 में से 15,960 वोटरों ने मतदान किया है। नगर पंचायत कटरा बाजार में चेयरमैन के 17 प्रत्याशियों को भी 1,895 मत चाहिए। यहां 16,823 में से 11,373 मतदाताओं ने मतदान किया है।
नगर पंचायत परसपुर में चेयरमैन के 11 दावेदारों को जमानत बचाने के लिए 1,540 वोट चाहिए। यहां 14,157 में से 9,245 मतदाताओं ने वोट किया है। इसी तरह मनकापुर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए 868 वोट चाहिए। यहां 7,828 मतदाताओं में से 5,213 ने मतदान किया है।
नगर निकायों में कई स्थानों पर मुकाबला आमने-सामने का होने के कारण तीन से अधिक उम्मीदवारों की जमानत राशि बचने के आसार नहीं लग रहे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत चेयरमैन पदों पर दो या तीन से ज्यादा प्रत्याशियों की जमानत बचना मुश्किल है। नगर पालिका परिषद में चेयरमैन पद के अनारक्षित पद के लिए आठ हजार, अनुसूचित वर्ग व पिछड़ा वर्ग के लिए चार हजार रुपये जमानत राशि तय है। इसी तरह नगर पंचायतों में अनारक्षित पद के लिए दो हजार रुपये, अनुसूचित वर्ग व पिछड़ा वर्ग के लिए एक हजार रुपये जमानत राशि तय है। यह रकम बड़ी नहीं है मगर जमानत को राजनीति में अहम माना जाता है। अगर जमानत ही जब्त हो जाए तो अगले किसी चुनाव में पार्टियों से टिकट मिलना भी आसान नहीं रहता है। जमानत बचने के लिए कुल पड़े वोटों का छठा हिस्सा मिलना जरूरी होता है।
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गोंडा नगर पालिका में हुए मतदान से ही साफ है कि जमानत बचाने के लिए तय 8,989 मतों का आकड़ा चार से पांच प्रत्याशी ही छूते दिख रहे हैं। ऐसे में छह प्रत्याशियों की जमानत बचनी मुश्किल है। इसी तरह करनैलगंज नगर पालिका में 13 प्रत्याशी रहे। यहां 30,461 मतदाताओं में से 19,666 ने मतदान किया और जमानत बचाने के लिए 3,277 मत चाहिए। यहां भी तीन प्रत्याशी ही इतने मत हासिल करने की स्थिति में दिख रहे हैं। यहां भी 10 की जमानत बचनी मुश्किल है। नवाबगंज नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष के 12 प्रत्याशी हैं और यहां पर 15,448 वोटरों में से 11,206 ने मतदान किया है। ऐसे में यहां जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को कम से कम 1,867 मत चाहिए। यहां चार प्रत्याशी जमानत बचाने की स्थिति में दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि यहां के आठ या इससे अधिक प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सकेंगे। फिलहाल अभी यह मतदान के दौरान के माहौल के आधार पर है। 13 मई को मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।
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नगर पंचायतों में जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को जूझना पड़ा। मतदान के बाद कई की जमानत जब्त होने के संकेत मिल रहे हैं। नवगठित नगर पंचायत धानेपुर में चेयरमैन पद के लिए 13 दावेदार हैं। यहां 21,141 मतदाता हैं मगर मतदान 12,027 ने ही किया। यहां के प्रत्याशियों को भी जमानत बचाने के लिए कम से कम 2,037 मत चाहिए। यहां चार दावेदार ही ऐसे दिख रहे हैं जो जमानत बचा सकेंगे। नौ की जमानत बचनी मुश्किल है।
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खरगूपुर नगर पंचायत में चेयरमैन के नौ प्रत्याशी हैं। यहां 8,232 मतदाताओं में से 5,712 ने वोट डाला। यहां 952 वोट जमानत के लिए जरूरी हैं। यहां भी दो उम्मीदवार ही जमानत बचाते दिख रहे हैं। तरबगंज नगर पंचायत से चेयरमैन पद के सात प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए 1,831 मत चाहिए। यहां के 17,639 में से 10,990 मतदाताओं ने ही मतदान किया है।
नगर पंचायत बेलसर से चेयरमैन पद पर छह प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए 2,660 वोट चाहिए। यहां 25,217 में से 15,960 वोटरों ने मतदान किया है। नगर पंचायत कटरा बाजार में चेयरमैन के 17 प्रत्याशियों को भी 1,895 मत चाहिए। यहां 16,823 में से 11,373 मतदाताओं ने मतदान किया है।
नगर पंचायत परसपुर में चेयरमैन के 11 दावेदारों को जमानत बचाने के लिए 1,540 वोट चाहिए। यहां 14,157 में से 9,245 मतदाताओं ने वोट किया है। इसी तरह मनकापुर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों को जमानत बचाने के लिए 868 वोट चाहिए। यहां 7,828 मतदाताओं में से 5,213 ने मतदान किया है।
नगर निकायों में कई स्थानों पर मुकाबला आमने-सामने का होने के कारण तीन से अधिक उम्मीदवारों की जमानत राशि बचने के आसार नहीं लग रहे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत चेयरमैन पदों पर दो या तीन से ज्यादा प्रत्याशियों की जमानत बचना मुश्किल है। नगर पालिका परिषद में चेयरमैन पद के अनारक्षित पद के लिए आठ हजार, अनुसूचित वर्ग व पिछड़ा वर्ग के लिए चार हजार रुपये जमानत राशि तय है। इसी तरह नगर पंचायतों में अनारक्षित पद के लिए दो हजार रुपये, अनुसूचित वर्ग व पिछड़ा वर्ग के लिए एक हजार रुपये जमानत राशि तय है। यह रकम बड़ी नहीं है मगर जमानत को राजनीति में अहम माना जाता है। अगर जमानत ही जब्त हो जाए तो अगले किसी चुनाव में पार्टियों से टिकट मिलना भी आसान नहीं रहता है। जमानत बचने के लिए कुल पड़े वोटों का छठा हिस्सा मिलना जरूरी होता है।