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दलालों के दखल से मरीजों की कट रही जेबें,बाहर करवानी पड़ती जांच
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गोंडा। जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल तक में दलालों का बेरोकटोक दखल जारी है। कमीशन के खेल के चलते सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भी बाहर से महंगी जांच कराने के साथ बाजार से दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इसका खामियाजा मरीजों को जेब हल्की कर भुगतना पड़ रहा है। कट बिजनेस के इस खेल में डॉक्टरों के इशारे पर आपरेशन के नाम पर मरीजों के तीमारदारों से खुलकर वसूली हो रही है। पीड़ितों की शिकायत के बाद भी बेखौफ दलालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अस्पताल प्रशासन उदासीन बना है।
जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल तक में दलालों का वर्चस्व कायम है। पर्चा काउंटर से लेकर चिकित्सक के कक्ष तक दलाल जमे रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर पर पहुंचता है।
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वहीं से मरीज के पीछे दवा दुकानों के दलाल लग जाते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में बच्चे टूटे पैर का इलाज कराने आए सम्मयदीन को पर्चा काउंटर के बाहर मिला एक व्यक्ति डॉक्टर को दिखवाने में मदद करने की बात कहकर डॉक्टर के पास ले गया।
परीक्षण बाद उसे अच्छे इलाज के लिए बाहर से जांच कराने का पर्चा थमा दिया गया। इटियाथोक के आशाराम ने भी अपनी माता के आंख के आपरेशन के नाम पर दलाल के माध्यम से अस्पताल स्टाफ पर तीन हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है।
अस्पताल से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि इन दलालों को डॉक्टरों तथा स्टाफ के लोगों का पूरा संरक्षण प्राप्त है। इसी लिए यह लोग डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष में भी बेखौफ टहलते रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज आता है उसे डॉक्टर के पास ले जाते। मरीज को दलाल पहले ही समझा देता है सरकारी दवा से बीमारी ठीक नहीं होगी। बाहर की दवा लेनी पड़ेगी।
यहां जांच के लिए भी पूूरे दिन लाइन लगानी पड़ेगी उसके बाद भी नहीं हो पाएगा। आपकी हम सस्ते में दवा व जांच करवा देगें। अगर मरीज का आपरेशन होना तो भी डॉक्टर के सुविधा शुल्क की बात दलाल ही करता है। ऐसे मेें शिकायत होने पर भी डॉक्टर पल्ला झाड़ किनारे हो जाते हैं। ड्रेस कोड न होने से भी इन दलालों की पहचान करना भी बहुत मुश्किल होता है।
जिला महिला अस्पतला में भी पिछले दिनों सामने आए दलाली के कुछ मामलों के बाद चेते अस्पताल प्रशासन ने बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सख्ती बरतना शुरू कर दिया है।
इसके तहत आशा बहुओं के प्रवेश के लिए भी इंट्री पास को जरूरी बना दिया गया है। इसमें आशा बहुओं का नाम तथा साथ आए मरीज का विवरण भी लिखा जाता है। आशा बहूओं को निजी अस्पताल में प्रसव के लिए ले जाने पर अच्छा खासा कमीशन दिया जाता है।
अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक अवकाश पर हैं। वापस आने पर वही अस्पताल में दलालों व बाहरी लोगों का प्रवेश रोकने को और सख्त नियम लागू कर व्यवस्था को बेहतर बनाएगी। दलालों पर अंकुश एक ही दिन में नहीं लगाया जा सकता है।
-डॉ. सुरेद्र कुमार रावत, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल
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इसका खामियाजा मरीजों को जेब हल्की कर भुगतना पड़ रहा है। कट बिजनेस के इस खेल में डॉक्टरों के इशारे पर आपरेशन के नाम पर मरीजों के तीमारदारों से खुलकर वसूली हो रही है। पीड़ितों की शिकायत के बाद भी बेखौफ दलालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अस्पताल प्रशासन उदासीन बना है।
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जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल तक में दलालों का वर्चस्व कायम है। पर्चा काउंटर से लेकर चिकित्सक के कक्ष तक दलाल जमे रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर पर पहुंचता है।
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वहीं से मरीज के पीछे दवा दुकानों के दलाल लग जाते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में बच्चे टूटे पैर का इलाज कराने आए सम्मयदीन को पर्चा काउंटर के बाहर मिला एक व्यक्ति डॉक्टर को दिखवाने में मदद करने की बात कहकर डॉक्टर के पास ले गया।
परीक्षण बाद उसे अच्छे इलाज के लिए बाहर से जांच कराने का पर्चा थमा दिया गया। इटियाथोक के आशाराम ने भी अपनी माता के आंख के आपरेशन के नाम पर दलाल के माध्यम से अस्पताल स्टाफ पर तीन हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है।
अस्पताल से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि इन दलालों को डॉक्टरों तथा स्टाफ के लोगों का पूरा संरक्षण प्राप्त है। इसी लिए यह लोग डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष में भी बेखौफ टहलते रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज आता है उसे डॉक्टर के पास ले जाते। मरीज को दलाल पहले ही समझा देता है सरकारी दवा से बीमारी ठीक नहीं होगी। बाहर की दवा लेनी पड़ेगी।
यहां जांच के लिए भी पूूरे दिन लाइन लगानी पड़ेगी उसके बाद भी नहीं हो पाएगा। आपकी हम सस्ते में दवा व जांच करवा देगें। अगर मरीज का आपरेशन होना तो भी डॉक्टर के सुविधा शुल्क की बात दलाल ही करता है। ऐसे मेें शिकायत होने पर भी डॉक्टर पल्ला झाड़ किनारे हो जाते हैं। ड्रेस कोड न होने से भी इन दलालों की पहचान करना भी बहुत मुश्किल होता है।
जिला महिला अस्पतला में भी पिछले दिनों सामने आए दलाली के कुछ मामलों के बाद चेते अस्पताल प्रशासन ने बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सख्ती बरतना शुरू कर दिया है।
इसके तहत आशा बहुओं के प्रवेश के लिए भी इंट्री पास को जरूरी बना दिया गया है। इसमें आशा बहुओं का नाम तथा साथ आए मरीज का विवरण भी लिखा जाता है। आशा बहूओं को निजी अस्पताल में प्रसव के लिए ले जाने पर अच्छा खासा कमीशन दिया जाता है।
अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक अवकाश पर हैं। वापस आने पर वही अस्पताल में दलालों व बाहरी लोगों का प्रवेश रोकने को और सख्त नियम लागू कर व्यवस्था को बेहतर बनाएगी। दलालों पर अंकुश एक ही दिन में नहीं लगाया जा सकता है।
-डॉ. सुरेद्र कुमार रावत, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल