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Gonda News: बाढ़ से मिले निजात तो 780 गांवों में हो विकास की बात

Wed, 24 Jul 2024 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Wed, 24 Jul 2024 12:18 AM IST
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If there is relief from floods then there will be development in 780 villages

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गोंडा। नेपाल के पहाड़ी नालों से आने वाले पानी से हर साल जिले के करनैलगंज व तरबगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ कहर बरपाती है। दो तटबंध बनने से करनैलगंज के 150 गांवों में बाढ़ का खतरा तो कम हुआ है लेकिन तटबंध कटने से इन गांवों में बड़ी तबाही आती है। इसी तरह तटबंध न होने से तरबगंज के 600 से अधिक गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार 780 गांवों में बैराजों से पानी छोड़े जाने से बाढ़ का असर रहता है।
लोकसभा में पेश किए गए बजट में बाढ़ नियंत्रण के लिए नेपाल से वार्ता की बात कही गई है। जिसके लिए दोनों देश मिलकर योजना बनाएंगे। इससे बाढ़ के स्थायी हल की उम्मीद बढ़ी है। बाढ़ से जिले के गांवों को मुक्ति मिले तो वहां भी विकास की उम्मीद बढ़े। अभी तो बनने वाली सड़कें, खेत आदि कट जाते हैं। इससे कराेड़ों का नुकसान होता है। इस बार भी शासन ने जिले को पांच करोड़ का बजट बाढ़ प्रभावितों की राहत और बचाव कार्य के लिए दिया है। इसके अलावा बाढ़ से सुरक्षा पर ही बीते 17 साल में पांच सौ करोड़ से अधिक का बजट खर्च किया जा चुका है। इससे माना जा रहा है कि बाढ़ का संकट कम हो तो बाढ़ के दौरान होने वाला खर्च कम होगा। जो विकास कार्य में उपयोग हो सकेगा।
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नेपाल से जल समझौता जरूरी
देवीपाटन मंडल को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए नेपाल से एक जल समझौता जरूरी है। नेपाल भी पानी उस समय छोड़ता है जब बारिश का समय होता है। इस समय में वैसे ही घाघरा, सरयू, राप्ती नदियों में पर्याप्त पानी रहता है। ऐसे में बैराजों से पहाड़ी नालों का पानी आने से नदियां खतरे के निशान को पार कर बाढ़ की तबाही मचाती हैं। गोंडा में तैनाती के दौरान महसूस किया था कि यदि अप्रैल, मई, जून में जब नदियों में पानी कम होता है उस समय नेपाल पानी छोड़कर अपने बैराजों को खाली करे तो जिलों को सूखे से भी निजात मिलेगी। इसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच पानी छोड़ने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे बाढ़ का संकट तो खत्म हो सकेगा। बजट में चर्चा हुई है तो सकारात्मक पहल की उम्मीद है।
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- राम बहादुर, पूर्व जिलाधिकारी गोंडा
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