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Gonda News: रिश्वत का पैसा कम किया तो उठान के मांगे 90 हजार

Tue, 19 Mar 2024 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Tue, 19 Mar 2024 11:11 PM IST
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If the bribe amount was reduced then he asked for 90 thousand rupees
बलरामपुर। रिश्वतखोरी के मामले में फंसे वन विभाग के दोनों कर्मचारी खुलेआम कहते थे कि परमिट देने का काम तो सिस्टम के हिसाब से होता है। फॉरेस्ट रेंजर डीपी सिंह व वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह इस हद तक बेखौफ थे कि पेड़ कटाई के परमिट में रिश्वत का पैसा कम किया तो लकड़ी उठान के एवज में अलग से 90 हजार रुपये मांग लिए।
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डीएम स्तर से कराई गई पूरे मामले की जांच में सामने आया कि वन विभाग के अधिकारी पद का दुरुपयोग कर गैंग बनाकर रिश्वतखोरी से अपनी जेब भर रहे थे।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तो गड़बड़ी का मात्र एक मामला पकड़ में आया है। दोनों वन कर्मियों की इलाके में लंबे समय से तैनाती थी। इस लिए दोनों के खिलाफ गहनता से अवैध ढंग से अर्जित संपत्तियों की जांच राज्य स्तर से कराए जाने की संस्तुति भी डीएम ने अपनी रिपोर्ट में की है।
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लकड़ी ठेकेदार सुनील वर्मा ने डीएम से की शिकायत में बताया कि उसने तुलसीपुर के ग्राम चरनगहिया में रेनू सिंह के नाम दर्ज गाटा संख्या-632 रकबा 1.489 हेक्टेयर जमीन पर लगे सागौन के 300 पेड़ खरीदे थे।
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बीते नवंबर माह में इन पेड़ों की कटान के परमिट के लिए आनलाइन आवेदन किया गया था। इस पर रिपोर्ट के लिए जब फॉर्रेस्ट रेंजर डीपी सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि यहां सब काम सिस्टम के हिसाब से होता है। इस लिए वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह से मिले।


प्रति पेड़ एक हजार की दर से मांगे तीन लाख

वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह से मिलने पर बताया गया कि 300 सागौन के पेड़ो के लिए प्रति पेड़ एक हजार रुपये की दर से तीन लाख रुपये देना पड़ेंगे। पैसा देने से इंकार करने पर उसे दो माह तक दौड़ाया जाता रहा। बाद में दो लाख रुपये में कटान परमिट जारी करने पर सहमति बनी। ठेकेदार का कहना है कि इसमें से 1.79 लाख रुपये दोनों वन कर्मियों को दे दिए गए। कटान होने के बाद वन दरोगा लकड़ी की उठान के एवज में अलग से 90 हजार रुपये की मांग करने लगा। पैसा न देने पर लगभग ढेड़ माह से कटान की लकड़ी के परिवहन परमिट व ढुलाई की अनुमति जबरन रोक रखी थी।
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